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Jhansi News: -बुंदेलखंड के लिए सबक है नेपाल की त्रासदी

Sat, 29 Aug 2026 02:01 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Sat, 29 Aug 2026 02:01 AM IST
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-Nepal's tragedy holds a lesson for Bundelkhand.
झांसी। नदी बचाओ अभियान से जुड़े संजय सिंह ने नेपाल की भीषण त्रासदी से बुंदेलखंड को सबक लेने की जरूरत बताई है। नेपाल में लगभग डेढ़ हजार से अधिक लोगों का जीवन संकट में पड़ गया। यह सब अचानक नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से बढ़ रहे तापमान और प्रतिकूल मौसम के कारण जलवायु परिवर्तन का संकट गहरा रहा है।
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संजय सिंह का कहना है कि ग्लेशियर पिघलने से अचानक झील में पानी बढ़ा और उसके दबाव से नदी किनारे का पूरा इलाका कुछ ही सेकंड में डूब गया। बुंदेलखंड में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति बन रही है, जहां बांदा इस बार दुनिया के सबसे गर्म क्षेत्रों में रहा है। यहां सूरज की विकिरण किरणों का प्रभाव सबसे अधिक बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटों में हुई लगातार बारिश के कारण यहां के नदी-नाले और तालाब उफान पर आ गए। सुखनई नदी और बामौर के इलाके में लोगों की जिंदगी बचाने के लिए सेना को आगे आना पड़ा। ये परिस्थितियां बुंदेलखंड के लिए खतरनाक संकेत हैं, जो आने वाले दिनों में किसी बड़ी आपदा का रूप ले सकते हैं।
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संकट के मुख्य कारण
परमार्थ समाजसेवी संस्था के सचिव संजय सिंह के अनुसार, अगर इसी तरह तापमान बढ़ता रहा और कुछ ही घंटों में एक साथ मूसलाधार वर्षा होती रही, तो यह बहुत बड़ा संकट है। इसके पीछे घटते जंगल प्रमुख कारण हैं। कृषि योग्य भूमि का गैर-कृषि कार्यों में उपयोग बढ़ रहा है। नदी-नालों के किनारे अतिक्रमण और तालाबों में अप्राकृतिक खनन भी ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न कर रहा है।
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भविष्य की आपदा से बचाव
नेपाल की घटना से समय रहते सबक लेना आवश्यक है। यदि बुंदेलखंड में नदियों में यकायक पानी बढ़ा तो नेपाल जैसे हालात बन जाएंगे। यह विंध्य के पठार का निचला इलाका है, जहां मध्य प्रदेश में अधिक बारिश होने पर डूब जैसे हालात बनेंगे। इस स्थिति को रोकने के लिए जंगलों का होना, नदियों के किनारे का क्षेत्र खाली होना और पहाड़ों का सुरक्षित रहना जरूरी है। जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को बचाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है, वरना भविष्य में हमें भी नेपाल जैसे खतरों का सामना करना पड़ेगा।

नेपाल की त्रासदी से बुंदेलखंड के लिए पांच सबक
- नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण रोकना
- अचानक बाढ़ की पूर्व चेतावनी व्यवस्था मजबूत करना
- तालाब और जलाशयों की क्षमता बरकरार रखना
- पहाड़ और जंगल बचाना
- मध्य प्रदेश के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी की निगरानी जरूरी
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