{"_id":"603ab3468ebc3ee8f4299108","slug":"neither-diabetes-nor-bp-drives-a-car-at-the-age-of-80-jhansi-news-jhs189663265","type":"story","status":"publish","title_hn":"80 की उम्र में न डायबिटीज, न बीपी, खुल चलाते हैं कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
80 की उम्र में न डायबिटीज, न बीपी, खुल चलाते हैं कार
विज्ञापन
उर्म दराज होने के बाद भी खुद कार चलाते हैं मुकुंद महरौत्रा। अमर उजाला
झांसी। शहर के व्यवसायी और कलाप्रेमी मुकुंद मेहरोत्रा नई पीढ़ी के लिए मिसाल हैं। ये सुबह उठकर टहलते हैं, योगासन करते हैं। यही नहीं, इसके बाद बढ़ चढ़कर समाज सेवा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता करते हैं। इससे उन्हें स्फूर्ति मिलती है। खुश रहने के साथ ही वे कार चलाने के भी शौकीन हैं।
मेहरोत्रा का कहना है कि न उन्हें डायबिटीज है और न ही बीपी यो कोई अन्य रोग। वह खुद ही कार चलाते हैं। बिना चश्मे के मोबाइल, कंप्यूटर देखते और किताब, नोवल, मैगजीन, अखबार पढ़ते हैं। यही नहीं
इतनी अधिक उम्र में न तो घुटने में उन्हें घुटने में दर्द है और न ही कमर में। इसके पीछे का कारण उन्होंने अपनी संतुलित जीवनशैली को बताया है। बताया कि बाल काल से ही वह सुबह तड़के चार बजे उठ जाते हैं। उन्होंने बताया कि 16 साल की उम्र से उन्होंने दूध और चीनी मिलाकर कभी चाय नहीं पी। सुबह नौ बजे तक नाश्ता कर लेते हैं।
विज्ञापन
शाम को चार-पांच बजे चाय-बिस्कुट खाते हैं। फिर रात में दस बजे तक डिनर कर लेते हैं। रोज मिक्स वेज वाला सूप भी पीते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि गुस्सा न आए, अनावश्यक न घूमें, मुस्कुराते रहें और सकारात्मकता बनी रहे। राजनीति की नकारात्मक खबरों पर वह कभी ध्यान नहीं देते हैं। उनका कहना है कि इससे बेवजह का तनाव बढ़ता है, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। नए प्रयोगों और नए विचार को लेकर भी उनका रुझान ज्यादा रहता है।
विज्ञापन
मेहरोत्रा का कहना है कि न उन्हें डायबिटीज है और न ही बीपी यो कोई अन्य रोग। वह खुद ही कार चलाते हैं। बिना चश्मे के मोबाइल, कंप्यूटर देखते और किताब, नोवल, मैगजीन, अखबार पढ़ते हैं। यही नहीं
विज्ञापन
इतनी अधिक उम्र में न तो घुटने में उन्हें घुटने में दर्द है और न ही कमर में। इसके पीछे का कारण उन्होंने अपनी संतुलित जीवनशैली को बताया है। बताया कि बाल काल से ही वह सुबह तड़के चार बजे उठ जाते हैं। उन्होंने बताया कि 16 साल की उम्र से उन्होंने दूध और चीनी मिलाकर कभी चाय नहीं पी। सुबह नौ बजे तक नाश्ता कर लेते हैं।
विज्ञापन
शाम को चार-पांच बजे चाय-बिस्कुट खाते हैं। फिर रात में दस बजे तक डिनर कर लेते हैं। रोज मिक्स वेज वाला सूप भी पीते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि गुस्सा न आए, अनावश्यक न घूमें, मुस्कुराते रहें और सकारात्मकता बनी रहे। राजनीति की नकारात्मक खबरों पर वह कभी ध्यान नहीं देते हैं। उनका कहना है कि इससे बेवजह का तनाव बढ़ता है, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। नए प्रयोगों और नए विचार को लेकर भी उनका रुझान ज्यादा रहता है।