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नगरा न्यू पीएचसी में डेढ़ साल से नहीं हुईं जांचें, 55 हजार की आबादी पर एक डॉक्टर
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झांसी। कोरोना की तीसरी लहर में एक तरफ जहां स्वास्थ्य ढांचा मजबूत करने की बात की जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ चिकित्सा इकाइयां ही बीमार पड़ी हैं। 55 हजार की आबादी आबादी के बीच नगरा नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अव्यवस्थाएं चरम पर हैं। यह केंद्र एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। यहां पर तैनात लैब टेक्नीशियन की ड्यूटी कोविड में लगी होने की वजह से सात किलोमीटर दूर जिला अस्पताल आकर गर्भवती महिलाओं को जांच करानी पड़ती है। हाल ही में सदर विधायक रवि शर्मा ने इस स्वास्थ्य केंद्र को गोद भी लिया है।
न्यूपीएचसी नगरा में 10 स्वास्थ्य कर्मचारी तैनात हैं, इनमें एक स्टाफ नर्स, एक फार्मासिस्ट, एक लैब टेक्नीशियन, तीन एएनएम, एक एलएचवी, दो वार्ड आया, एक चौकीदार शामिल है। जबकि, डॉक्टर के नाम पर एमओआईसी ही हैं। कोरोना के चलते अभी लोग घरों से कम बाहर निकल रहे हैं, वरना पहले यहां पर रोजाना सौ से ज्यादा मरीज ओपीडी के लिए आते थे। इन दिनों ज्यादातर गर्भवती महिलाएं ही इलाज कराने के लिए आ रही हैं। चूंकि, एमओआईसी को विभागीय बैठकों में शामिल होना पड़ता है, ऐसे में कई बार ओपीडी में डॉक्टर ही नहीं रहता है। इस कारण गर्भवती महिलाओं को बहुत दिक्कत होती है। अस्पताल में डॉक्टर और कुछ स्टाफ की भी मांग की गई है मगर कोई नहीं भेजा गया है। ऐसे 55 हजार से अधिक आबादी सरकारी खामियां का दंश झेल रही है। अब सदर विधायक ने इसे केंद्र को गोद लिया है। उन्होंने केंद्र में सुविधाएं बढ़ाने के लिए विभागीय अधिकारियों और डॉक्टरों से बात भी की है। विधायक निधि से केंद्र का कायाकल्प करने की बात कही है।
बाल रोग विशेषज्ञ हो गए सेवानिवृत्त
स्वास्थ्य केंद्र में कुछ समय पहले तक तो एक बाल रोग विशेषज्ञ कांट्रेक्ट पर तैनात थे मगर 65 वर्ष आयु पूरी हो जाने की वजह से सेवानिवृत्त हो गए। अब प्रसव के बाद किसी बच्चे को समस्या हो जाए तो कोई देखने वाला नहीं है। एमओआईसी पर ही जच्चा-बच्चा दोनों की जिम्मेदारी रहती है।
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आधी-अधूरी पड़ी टीबी लैब
न्यू पीएचसी में टीबी लैब भी आधी-अधूरी पड़ी हुई है। यहां पर लैब का ढांचा तो तैयार कर दिया गया है मगर यहां न ही जांच करने के लिए कर्मचारी है और न ही मशीनें व अन्य संसाधन। पहले अप्रैल तक इस लैब का शुरू करने की योजना थी मगर कोरोना के चलते इसकी शुरूआत में देरी हो गई है।
इन जांचों के लिए भटकती गर्भवती
केंद्र पर हीमोग्लोबिन, टीएलसी, डीएलसी, ईएसआर, ब्लड ग्रुप, यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट, यूरिन डिपस्टिक, ब्लड ग्लूकोज, एचबीए, सी, मलेरिया सीमर, रेपिड साइफिल्स टेस्ट, एचआईवी, हेपेटाइटिस, टीबी आदि जांचें होने का नियम है। इन दिनों केंद्र पर एचआईवी की जांच तो स्टाफ कर देता है, मगर एलटी नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को अन्य जांचों के लिए जिला अस्पताल आना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होती है। इससे बड़ी आबादी को फायदा मिल रहा है। अभी कोविड में एलटी की ड्यूटी लगी होने से कुछ जांचों के लिए गर्भवतियों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। जल्द ही स्वास्थ्य केंद्र में और सुविधाएं बढ़ेंगी। - डॉ. गरिमा पुरोहित, एमओआईसी, न्यूपीएचसी, नगरा।
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न्यूपीएचसी नगरा में 10 स्वास्थ्य कर्मचारी तैनात हैं, इनमें एक स्टाफ नर्स, एक फार्मासिस्ट, एक लैब टेक्नीशियन, तीन एएनएम, एक एलएचवी, दो वार्ड आया, एक चौकीदार शामिल है। जबकि, डॉक्टर के नाम पर एमओआईसी ही हैं। कोरोना के चलते अभी लोग घरों से कम बाहर निकल रहे हैं, वरना पहले यहां पर रोजाना सौ से ज्यादा मरीज ओपीडी के लिए आते थे। इन दिनों ज्यादातर गर्भवती महिलाएं ही इलाज कराने के लिए आ रही हैं। चूंकि, एमओआईसी को विभागीय बैठकों में शामिल होना पड़ता है, ऐसे में कई बार ओपीडी में डॉक्टर ही नहीं रहता है। इस कारण गर्भवती महिलाओं को बहुत दिक्कत होती है। अस्पताल में डॉक्टर और कुछ स्टाफ की भी मांग की गई है मगर कोई नहीं भेजा गया है। ऐसे 55 हजार से अधिक आबादी सरकारी खामियां का दंश झेल रही है। अब सदर विधायक ने इसे केंद्र को गोद लिया है। उन्होंने केंद्र में सुविधाएं बढ़ाने के लिए विभागीय अधिकारियों और डॉक्टरों से बात भी की है। विधायक निधि से केंद्र का कायाकल्प करने की बात कही है।
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बाल रोग विशेषज्ञ हो गए सेवानिवृत्त
स्वास्थ्य केंद्र में कुछ समय पहले तक तो एक बाल रोग विशेषज्ञ कांट्रेक्ट पर तैनात थे मगर 65 वर्ष आयु पूरी हो जाने की वजह से सेवानिवृत्त हो गए। अब प्रसव के बाद किसी बच्चे को समस्या हो जाए तो कोई देखने वाला नहीं है। एमओआईसी पर ही जच्चा-बच्चा दोनों की जिम्मेदारी रहती है।
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आधी-अधूरी पड़ी टीबी लैब
न्यू पीएचसी में टीबी लैब भी आधी-अधूरी पड़ी हुई है। यहां पर लैब का ढांचा तो तैयार कर दिया गया है मगर यहां न ही जांच करने के लिए कर्मचारी है और न ही मशीनें व अन्य संसाधन। पहले अप्रैल तक इस लैब का शुरू करने की योजना थी मगर कोरोना के चलते इसकी शुरूआत में देरी हो गई है।
इन जांचों के लिए भटकती गर्भवती
केंद्र पर हीमोग्लोबिन, टीएलसी, डीएलसी, ईएसआर, ब्लड ग्रुप, यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट, यूरिन डिपस्टिक, ब्लड ग्लूकोज, एचबीए, सी, मलेरिया सीमर, रेपिड साइफिल्स टेस्ट, एचआईवी, हेपेटाइटिस, टीबी आदि जांचें होने का नियम है। इन दिनों केंद्र पर एचआईवी की जांच तो स्टाफ कर देता है, मगर एलटी नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को अन्य जांचों के लिए जिला अस्पताल आना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होती है। इससे बड़ी आबादी को फायदा मिल रहा है। अभी कोविड में एलटी की ड्यूटी लगी होने से कुछ जांचों के लिए गर्भवतियों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। जल्द ही स्वास्थ्य केंद्र में और सुविधाएं बढ़ेंगी। - डॉ. गरिमा पुरोहित, एमओआईसी, न्यूपीएचसी, नगरा।