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दुकानदारों पर किराये का बोझ बढ़ाकर खजाना भरेगा नगर निगम
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झांसी। कोरोना काल में बजट के अभाव के चलते आर्थिक तंगी से जूझ रहा नगर निगम दुकानदारों पर किराये को बोझ बढ़ाने जा रहा है। नए वित्तीय वर्ष से दुकानदारों ने सर्कि ल रेट के हिसाब से किराया लिया जाएगा। इसके बाद अब तक 500 से एक हजार रुपये किराये पर काबिज दुकानदारों को पांच हजार रुपये प्रतिमाह तक चुकाने होंगे। इसके साथ ही सिकमी किरायेदारों को भी असली बनने के लिए नामांतरण के तौर पर 15-20 लाख रुपये तक देने होंगे। नए नियम के बाद नगर निगम की आय में करीब दो करोड़ रुपये तक का इजाफा होगा।
नगर निगम की महानगर में 1279 दुकानें हैं। इन पर काबिज दुकानदारों से लिए जा रहे किराये में सालों से कोई वृद्धि नहीं की गई है। आलम यह है कि दुकानदार किराये के तौर पर 150 रुपये से लेकर एक हजार रुपये महीना तक दे रहे हैं। वहीं तमाम दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने सालों से कोई किराया नहीं दिया है। दुकानों के किराये से भी नगर निगम को हर साल महज 34-35 लाख रुपये की आय हो पाती है। कोरोना काल में नगर निगम बजट के अभाव के चलते आर्थिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में दुकानों का किराया सर्किल रेट के आधार पर लिया जाएगा। महानगर के इलाइट चौराहा, सुभाषगंज, बड़ा बाजार, मानिक चौक, गल्ला मंडी, तालपुरा, बस स्टैंड समेत प्रमुख क्षेत्रों का सर्किल रेट करीब 35 रुपये प्रति वर्ग फुट तक है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी दुकान का क्षेत्रफल 120 स्क्वायर फुट है, तो दुकानदार को सर्किल रेट के हिसाब से 4200 रुपये प्रतिमाह तक किराया देना होगा। नगर निगम की महानगर में 250 स्क्वायर फुट की दुकानें भी हैं। कुल मिलाकर अब तक एक हजार रुपये किराया चुका रहे दुकानदार नए वित्तीय वर्ष में पांच हजार रुपये तक किराया चुकाएंगे।
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सिकमी किरायेदारों की जेब भी होगी ढीली
महानगर में करीब 292 सिकमी किरायेदार हैं। ये वे किरायेदार हैं, जिन्होंने नगर निगम के किरायेदारों से दुकान किराये पर ली हैं। महानगर में करीब 150 किरायेदार हैं, जिन्होंने नामांतरण करा लिया है। शेष बचे सिकमी किरायेदारों को भी असली बनने के लिए जेब अधिक ढीली करनी होगी। हर दुकानदार को सर्किल रेट के आधार पर करीब 15-20 लाख बतौर पेनल्टी देने होंगे। इसके साथ ही जहां सर्किल रेट अधिक होगा, वहां पर राशि बढ़ जाएगी। नगर निगम सदन में प्रस्ताव पारित होने के बाद नई प्रक्रिया लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
पहले छह लाख रुपये का था प्रस्ताव
नगर निगम में सिकमी किरायेदारों का मामला सदन में पहले भी आया था। जिसमें सिकमी दुकानदार को नामांतरण शुल्क के तौर पर छह लाख देने का प्रस्ताव था, लेकिन सदन में विरोध के चलते नामांतरण शुल्क को बतौर पेनल्टी सर्किल रेट के आधार पर लागू करने का प्रस्ताव पास हुआ।
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नगर निगम की महानगर में 1279 दुकानें हैं। इन पर काबिज दुकानदारों से लिए जा रहे किराये में सालों से कोई वृद्धि नहीं की गई है। आलम यह है कि दुकानदार किराये के तौर पर 150 रुपये से लेकर एक हजार रुपये महीना तक दे रहे हैं। वहीं तमाम दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने सालों से कोई किराया नहीं दिया है। दुकानों के किराये से भी नगर निगम को हर साल महज 34-35 लाख रुपये की आय हो पाती है। कोरोना काल में नगर निगम बजट के अभाव के चलते आर्थिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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ऐसे में दुकानों का किराया सर्किल रेट के आधार पर लिया जाएगा। महानगर के इलाइट चौराहा, सुभाषगंज, बड़ा बाजार, मानिक चौक, गल्ला मंडी, तालपुरा, बस स्टैंड समेत प्रमुख क्षेत्रों का सर्किल रेट करीब 35 रुपये प्रति वर्ग फुट तक है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी दुकान का क्षेत्रफल 120 स्क्वायर फुट है, तो दुकानदार को सर्किल रेट के हिसाब से 4200 रुपये प्रतिमाह तक किराया देना होगा। नगर निगम की महानगर में 250 स्क्वायर फुट की दुकानें भी हैं। कुल मिलाकर अब तक एक हजार रुपये किराया चुका रहे दुकानदार नए वित्तीय वर्ष में पांच हजार रुपये तक किराया चुकाएंगे।
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सिकमी किरायेदारों की जेब भी होगी ढीली
महानगर में करीब 292 सिकमी किरायेदार हैं। ये वे किरायेदार हैं, जिन्होंने नगर निगम के किरायेदारों से दुकान किराये पर ली हैं। महानगर में करीब 150 किरायेदार हैं, जिन्होंने नामांतरण करा लिया है। शेष बचे सिकमी किरायेदारों को भी असली बनने के लिए जेब अधिक ढीली करनी होगी। हर दुकानदार को सर्किल रेट के आधार पर करीब 15-20 लाख बतौर पेनल्टी देने होंगे। इसके साथ ही जहां सर्किल रेट अधिक होगा, वहां पर राशि बढ़ जाएगी। नगर निगम सदन में प्रस्ताव पारित होने के बाद नई प्रक्रिया लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
पहले छह लाख रुपये का था प्रस्ताव
नगर निगम में सिकमी किरायेदारों का मामला सदन में पहले भी आया था। जिसमें सिकमी दुकानदार को नामांतरण शुल्क के तौर पर छह लाख देने का प्रस्ताव था, लेकिन सदन में विरोध के चलते नामांतरण शुल्क को बतौर पेनल्टी सर्किल रेट के आधार पर लागू करने का प्रस्ताव पास हुआ।