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मेरे पिता ध्यानचंद ने हॉकी को बहुत कुछ दिया, पर कुछ नहीं मिला

Thu, 31 Aug 2017 04:35 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, झांसी
ब्यूरो/ अमर उजाला, झांसी Updated Thu, 31 Aug 2017 04:35 PM IST
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My father Dhyan Chand gave a lot to hockey, but nothing got
फाइल
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद अपने अंतिम दिनों में आर्थिक तंगी से परेशान थे। वह अक्सर कहते थे कि हॉकी को उन्होंने बहुत कुछ दिया, पर उन्हें कुछ नहीं मिला। यह कहना है उनके पुत्र पूर्व ओलंपियन अशोक ध्यानचंद का। 
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अशोक बताते हैं कि दद्दा इतने नाराज रहते थे कि परिवार के सदस्यों को हॉकी नहीं खेलने देते थे। वह घर में पीछे के दरवाजे से हॉकी खेलने जाते थे। 29 अगस्त 1905 में इलाहाबाद में जन्मे मेजर ध्यानचंद ने बचपन में ही हॉकी थाम ली थी। जल्द ही हॉकी में विशेषज्ञता हासिल करने पर उन्हें पंजाब रेजीमेंट में जगह मिली। यहां उनके खेल में निखार आया और वह न्यूजीलैंड जाने वाली आर्मी हॉकी टीम का हिस्सा बने।
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न्यूजीलैंड में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद 1928 में उन्हें एस्टरडम ओलंपिक के लिए चुना गया, जिसके बाद वह भारतीय टीम के प्रमुख सदस्य बन गए। 1936 में बर्लिन ओलंपिक में भारतीय टीम का नेतृत्व किया और स्वर्ण जीता। उनके खेल कौशल का जर्मन तानाशाह हिटलर मुरीद था। समूची दुनिया उनकी हॉकी खेल तकनीक की कायल थी।
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पढ़ें:- ध्यानचंद के बारे में सर डॉन ब्रैडमैन ने 1935 में कही यह बड़ी बात 

न लाइट जलती है, न सुरक्षा के इंतजाम

My father Dhyan Chand gave a lot to hockey, but nothing got
फाइल
यही कारण है कि आस्ट्रिया के शहर विएना में मेजर ध्यानचंद की चार हाथ वाली मूर्ति लगी है। वही भारतीय डाक विभाग ने उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया। इसके अलावा दिल्ली, झांसी में उनके नाम पर स्टेडियम बना। अंतर्राष्ट्रीय कॅरियर में दद्दा के 400 से अधिक गोल किए हैं। वर्ष 1956 में राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद से देश के तीसरे सबसे बडे़ नागरिक सम्मान पद्म भूषण से उन्हें सम्मानित किया था।

पढ़ें:- ध्यानचंद की इस मांग पर हैरान रह गए थे रेफरी

न लाइट जलती है, न सुरक्षा के इंतजाम
मेजर ध्यानचंद के सुपुत्र देवेंद्र ध्यानचंद ने कहा कि हीरोज ग्राउंड के विकास की जरूरत है। हॉकी के जादूगर की समाधि स्थल मैदान में न तो लाइट की जलती और न ही सुरक्षा व्यवस्था है। अराजक तत्वों के जमावड़ा होने से कई बार झगडे़ की नौबत भी आ चुकी हैं। 

ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां - https://goo.gl/j6S1ic

 
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