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हमारे परिवार की बेटी है इटली में रह रही वेरा बेरती
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झांसी। चालीस साल पहले लावारिस अवस्था में अनाथालय में छोड़ दी गई झांसी की एक बेटी अब इटली में सिविल लॉयर बन गई है। आज जिंदगी में वो ऊंचा मुकाम हासिल कर चुकी है और उसके पास सबकुछ है। अब वो जानना चाहती है कि आखिरकार उसे जन्म किसने दिया और किन परिस्थितियों में मां ने उससे मुंह मोड़ लिया। जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं वेरा बेरती की, जो इटली में रहकर झांसी में अपने मां-बाप की तलाश कर रही है और इसमें उसका सहयोगी बना है अमर उजाला। अमर उजाला के दो जुलाई के अंक में प्रकाशित खबर ‘जिस बेटी को पैदा होते ही छोड़ दिया था,ं आज वो इटली में बड़ी वकील है और झांसी में मां-बाप को ढूंढ रही है’ के जरिये इस बेटी की दास्तां बताई गई थी। अच्छी बात ये है कि एक परिवार सामने भी आया है, जिसने वेरा बेरती को अपने परिवार की एक महिला सदस्य की बेटी बताया है।
पति ने छोड़ा तो छोड़नी पड़ी बेटी
नगर के एक परिवार के सदस्य ने बताया कि तकरीबन पैंतालीस साल पहले बाहर से आई एक महिला की यहां शादी हुई थी। पति पेशे से ट्रक ड्राइवर था। सबकुछ ठीक चल रहा था। इसी दरम्यान महिला ने बेटी को जन्म दिया। बेटी के पैदा होने के बाद पति - पत्नी का रिश्ता टूट गया था। इसके बाद महिला ने उनके परिवार के एक सदस्य से दूसरी शादी रचाई थी। लेकिन, शादी से पहले महिला के सामने शर्त रख दी गई थी कि उसे अपनी पहली बेटी से छुटकारा पाना होगा। महिला का न तो आमदनी का कोई जरिया था और न ही कोई मददगार। यहां तक कि सिर छुपाने के लिए छत तक नहीं थी। ऐसे में उस दौर में अकेली महिला बेटी को कैसे पालेगी ये बड़ी चुनौती थी। इसी दरम्यान उनके एक पारिवारिक मित्र आगे आए, जिन्होंने खाती बाबा स्थित फाउंडलिंग होम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फाउंडलिंग होम में बच्चों की बेहतर परवरिश की जाती है। ऐसे में बच्ची को फाउंडलिंग होम में छोड़ने में कोई हर्ज नहीं है। इसके बाद बच्ची को फाउंडलिंग होम पहुंचा दिया गया। इसके बाद महिला ने दूसरी शादी कर अपना घर बसा लिया और पारिवारिक जिम्मेदारियां संभाल लीं। हालांकि, इस दरम्यान जानकारी जरूर हुई कि उसकी बेटी को इटली के एक दंपति ने गोद लिया है। लेकिन, संपर्क कभी नहीं हो पाया। इसके उन्होंने साक्ष्य भी दिए हैं, जो हम खबर की अगली कड़ी में इटली में रह रही वेरा बेरती से बात करने के बाद सामने लाएंगे।
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पति ने छोड़ा तो छोड़नी पड़ी बेटी
नगर के एक परिवार के सदस्य ने बताया कि तकरीबन पैंतालीस साल पहले बाहर से आई एक महिला की यहां शादी हुई थी। पति पेशे से ट्रक ड्राइवर था। सबकुछ ठीक चल रहा था। इसी दरम्यान महिला ने बेटी को जन्म दिया। बेटी के पैदा होने के बाद पति - पत्नी का रिश्ता टूट गया था। इसके बाद महिला ने उनके परिवार के एक सदस्य से दूसरी शादी रचाई थी। लेकिन, शादी से पहले महिला के सामने शर्त रख दी गई थी कि उसे अपनी पहली बेटी से छुटकारा पाना होगा। महिला का न तो आमदनी का कोई जरिया था और न ही कोई मददगार। यहां तक कि सिर छुपाने के लिए छत तक नहीं थी। ऐसे में उस दौर में अकेली महिला बेटी को कैसे पालेगी ये बड़ी चुनौती थी। इसी दरम्यान उनके एक पारिवारिक मित्र आगे आए, जिन्होंने खाती बाबा स्थित फाउंडलिंग होम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फाउंडलिंग होम में बच्चों की बेहतर परवरिश की जाती है। ऐसे में बच्ची को फाउंडलिंग होम में छोड़ने में कोई हर्ज नहीं है। इसके बाद बच्ची को फाउंडलिंग होम पहुंचा दिया गया। इसके बाद महिला ने दूसरी शादी कर अपना घर बसा लिया और पारिवारिक जिम्मेदारियां संभाल लीं। हालांकि, इस दरम्यान जानकारी जरूर हुई कि उसकी बेटी को इटली के एक दंपति ने गोद लिया है। लेकिन, संपर्क कभी नहीं हो पाया। इसके उन्होंने साक्ष्य भी दिए हैं, जो हम खबर की अगली कड़ी में इटली में रह रही वेरा बेरती से बात करने के बाद सामने लाएंगे।
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