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नगर निगम में मनमानी का आलम, जो हो जाए वो कम
ब्यूरो
Updated Tue, 15 Dec 2015 01:28 AM IST
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झांसी। नगर निगम में अफसरों की मनमानी चरम पर है। जनता के पैसे की बंदरबांट करने के लिए यह नियमों और आदेशों को ताक पर रखने से भी नहीं चूक रहे हैं। सदन ने कोटेशन के काम पर रोक लगा रखी है, लेकिन पिछले दो माह में ही पचास से अधिक छोटे-छोटे कोटेशनों के माध्यम से सात सड़कें बना दी गईं।
अगस्त 2014 में हुई सदन की बैठक में कोटेशन से होने वाले कार्यों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए पार्षदों ने इस पर रोक लगाने की मांग की थी। सदन ने प्रस्ताव पास कर कोटेशन से होने वाले कामों पर रोक लगा दी थी। नगर निगम के अफसरों व कुछ पार्षदों ने इस रोक को अव्यवहारिक बताते हुए कोटेशन के कार्यों को आवश्यक बताया था। बाद में यह तय हुआ था कि छोटी-मोटी टूट-फूट के मरम्मत कार्यों को कोटेशन से करा लिया जाए।
इस व्यावहारिक छूट का नगर निगम के जनकार्य विभाग ने जमकर फायदा उठाया। कोटेशन पर मरम्मत कार्य कराने के स्थान पर बड़े-बड़े निर्माण कार्य करा दिए। सौ मीटर की सड़क को दस-दस मीटर के दस टुकड़ों में बांट कर अलग-अलग नामों से कोटेशन जारी कर उसका निर्माण करा दिया गया।
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पिछले दो माह में वार्ड नंबर 12, 15, 24, 31, 41, 45 में करीब पचास कोटेशन पर सात सड़कें नगर निगम के अभियंताओं ने बनवा दीं। यह सड़कें कैसे बनीं, किसके आदेश पर बनीं यह पूछने पर जन कार्य विभाग के जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं।
मजबूरी में कराने पड़ते हैं काम
नगर निगम के चीफ इंजीनियर आरके वर्मा का कहना है कि कोटेशन से काम मजबूरी में कराने पड़ते हैं। कहीं टूट-फूट होने की सूचना मिलने पर उसका तत्काल मरम्मतीकरण कराना पड़ता है। कोटेशन पर छोटे काम ही कराए जा रहे हैं।
छोटे-छोटे कोटेशन पर हुए बड़े कामों की जानकारी उन्हें नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो यह स्थिति बेहद चिंतनीय है। पिछले एक वर्ष में कोटेशन पर हुए कार्यों की जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।
- किरन राजू बुकसेलर, महापौर
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अगस्त 2014 में हुई सदन की बैठक में कोटेशन से होने वाले कार्यों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए पार्षदों ने इस पर रोक लगाने की मांग की थी। सदन ने प्रस्ताव पास कर कोटेशन से होने वाले कामों पर रोक लगा दी थी। नगर निगम के अफसरों व कुछ पार्षदों ने इस रोक को अव्यवहारिक बताते हुए कोटेशन के कार्यों को आवश्यक बताया था। बाद में यह तय हुआ था कि छोटी-मोटी टूट-फूट के मरम्मत कार्यों को कोटेशन से करा लिया जाए।
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इस व्यावहारिक छूट का नगर निगम के जनकार्य विभाग ने जमकर फायदा उठाया। कोटेशन पर मरम्मत कार्य कराने के स्थान पर बड़े-बड़े निर्माण कार्य करा दिए। सौ मीटर की सड़क को दस-दस मीटर के दस टुकड़ों में बांट कर अलग-अलग नामों से कोटेशन जारी कर उसका निर्माण करा दिया गया।
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पिछले दो माह में वार्ड नंबर 12, 15, 24, 31, 41, 45 में करीब पचास कोटेशन पर सात सड़कें नगर निगम के अभियंताओं ने बनवा दीं। यह सड़कें कैसे बनीं, किसके आदेश पर बनीं यह पूछने पर जन कार्य विभाग के जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं।
मजबूरी में कराने पड़ते हैं काम
नगर निगम के चीफ इंजीनियर आरके वर्मा का कहना है कि कोटेशन से काम मजबूरी में कराने पड़ते हैं। कहीं टूट-फूट होने की सूचना मिलने पर उसका तत्काल मरम्मतीकरण कराना पड़ता है। कोटेशन पर छोटे काम ही कराए जा रहे हैं।
छोटे-छोटे कोटेशन पर हुए बड़े कामों की जानकारी उन्हें नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो यह स्थिति बेहद चिंतनीय है। पिछले एक वर्ष में कोटेशन पर हुए कार्यों की जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।
- किरन राजू बुकसेलर, महापौर