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घरों की चौखट से इकट्ठा किया जाएगा प्लास्टिक कचरा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jul 2016 02:00 AM IST
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झांसी। नगर निगम अब घर-घर से प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करवा कर प्लांट में भिजवाएगा। इसके लिए तीस कबाड़ी चिह्नित कर लिए गए हैं और कुछ मशीनें भी आ गई हैं। प्लास्टिक कचरे से डीजल, लकड़ी और ग्रीस बनाई जाएगी। यह कार्य अगस्त के अंत तक शुरू होने की संभावना है। ऐसा होने पर झांसी प्रदेश का पहला कचरा प्रबंधन करने वाला जिला बन जाएगा।
शहर में तीन सौ टन कचरा प्रतिदिन निकलता है। यह कचरा न केवल प्रदूषण के लिहाज से हानिकारक होता है, बल्कि नालों में जलभराव की समस्या भी खड़ी करता है। अब शहर से निकलने वाला यह कचरा भी उपयोगी बनाया जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने आरआर कलेक्टिव कंपनी को राजगढ़ में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन प्लांट लगाने की जिम्मेदारी दी है। इसके लिए तीस कबाड़ी चिह्नित कर लिए गए हैं। यह कबाड़ी प्रत्येक घर में कैरी बैग देकर सूखा और गीला कचरा एकत्र करेंगे।
करीब 15 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में तीन करोड़ रुपए कंपनी को मिल गए हैं। इससे कुछ मशीनें और कचरा एकत्र करने के लिए तीस दुकानें बनवा दी गई हैं। मशीनों के लगाने का काम भी जल्द शुरू होगा। कचरे से डीजल, ग्रीस और लकड़ी बनाई जाएगी। ट्रायल के तौर पर कंपनी ने 18 हजार घरों में कैरीबैग बांटे थे, इसमें से करीब 11 हजार परिवारों ने कैरीबैग में कचरा भरकर वापस लौटाकर बेहतर रिस्पांस दिया है।
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प्लास्टिक कचरा प्रबंधन अच्छी पहल है। इसके शुरू होने से झांसी प्रदेश का पहला शहर बन जाएगा। अब केंद्र सरकार के हाथ में है कि शेष अनुदान कितनी जल्दी उपलब्ध कराता है। इससे शहर को प्लास्टिक कचरा से मुक्त किया जा सकेगा।
- किरन वर्मा, महापौर
स्वच्छ भारत पर चल रहा काम
केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत इस पर काम चल रहा है। महात्मा गांधी की जयंती दो अक्तूबर से प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के कार्य में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति
प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट कार्य शुरू होने से प्रदूषण पर काफी हद तक लगाम लग जाएगी। जनता टूथ पेस्ट, ब्रश, शेविंग क्रीम, रेजर, ब्लेड, चिप्स, पालीथिन आदि का उपयोग कर फेंक देते हैं। इस सामग्री को गाय आदि जानवर खाते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है। लेकिन, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन कार्य शुरू होने से न केवल इधर, उधर कचरा फेंकने पर रोक लगेगी, बल्कि इससे प्रदूषण जैसी समस्या का भी समाधान होगा।
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शहर में तीन सौ टन कचरा प्रतिदिन निकलता है। यह कचरा न केवल प्रदूषण के लिहाज से हानिकारक होता है, बल्कि नालों में जलभराव की समस्या भी खड़ी करता है। अब शहर से निकलने वाला यह कचरा भी उपयोगी बनाया जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने आरआर कलेक्टिव कंपनी को राजगढ़ में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन प्लांट लगाने की जिम्मेदारी दी है। इसके लिए तीस कबाड़ी चिह्नित कर लिए गए हैं। यह कबाड़ी प्रत्येक घर में कैरी बैग देकर सूखा और गीला कचरा एकत्र करेंगे।
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करीब 15 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में तीन करोड़ रुपए कंपनी को मिल गए हैं। इससे कुछ मशीनें और कचरा एकत्र करने के लिए तीस दुकानें बनवा दी गई हैं। मशीनों के लगाने का काम भी जल्द शुरू होगा। कचरे से डीजल, ग्रीस और लकड़ी बनाई जाएगी। ट्रायल के तौर पर कंपनी ने 18 हजार घरों में कैरीबैग बांटे थे, इसमें से करीब 11 हजार परिवारों ने कैरीबैग में कचरा भरकर वापस लौटाकर बेहतर रिस्पांस दिया है।
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प्लास्टिक कचरा प्रबंधन अच्छी पहल है। इसके शुरू होने से झांसी प्रदेश का पहला शहर बन जाएगा। अब केंद्र सरकार के हाथ में है कि शेष अनुदान कितनी जल्दी उपलब्ध कराता है। इससे शहर को प्लास्टिक कचरा से मुक्त किया जा सकेगा।
- किरन वर्मा, महापौर
स्वच्छ भारत पर चल रहा काम
केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत इस पर काम चल रहा है। महात्मा गांधी की जयंती दो अक्तूबर से प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के कार्य में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति
प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट कार्य शुरू होने से प्रदूषण पर काफी हद तक लगाम लग जाएगी। जनता टूथ पेस्ट, ब्रश, शेविंग क्रीम, रेजर, ब्लेड, चिप्स, पालीथिन आदि का उपयोग कर फेंक देते हैं। इस सामग्री को गाय आदि जानवर खाते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है। लेकिन, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन कार्य शुरू होने से न केवल इधर, उधर कचरा फेंकने पर रोक लगेगी, बल्कि इससे प्रदूषण जैसी समस्या का भी समाधान होगा।