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Jhansi News: पहूज नदी पर अतिक्रमण की एमपीपीसीबी ने शुरू की जांच
Mon, 15 Jun 2026 02:28 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Mon, 15 Jun 2026 02:28 AM IST
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झांसी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने पहूज नदी में अवैध निर्माण, अतिक्रमण, प्रदूषण और प्राकृतिक जलमार्गों को अवरुद्ध किए जाने के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने केसर सिंह, नरेंद्र कुशवाहा, पंकज रावत, प्रवीण कुमार पांडेय, ओमप्रकाश सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की तरफ से सुनवाई करते हुए यह कदम उठाया है, इसकी अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को तय की गई है। प्राचीन ग्रंथों में पुष्पावती नाम से प्रसिद्ध और सिंध की सहायक यह नदी मध्य प्रदेश के शिवपुरी से निकलकर लगभग 265 किलोमीटर का सफर तय करती है, जो बुंदेलखंड के जल सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहद अहम है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश के दतिया जनपद स्थित धार्मिक स्थल उनाव में प्रशासन द्वारा नदी के डूब क्षेत्र में नियम विरुद्ध कंक्रीट निर्माण कराया जा रहा है, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही दतिया के उनाव, भांडेर व उत्तर प्रदेश के झांसी व जालौन जिलों के तमाम गांवों में राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्राकृतिक नालों और फीडर चैनलों पर अतिक्रमण कर अवैध निर्माण किया जा रहा है। इनमें सीवेज का गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। इससे प्रदूषित जल सीधे पहूज नदी में मिलकर उसकी जलीय पारिस्थितिकी को नष्ट कर रहा है। उन्नाव स्थित पहूज नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी काफी गहरा है। वहां श्रद्धालु नदी में स्नान कर भगवान सूर्य बालाजी को जल अर्पित करते हैं।
मान्यता के अनुसार इस जल के औषधीय गुणों से चर्म रोग ठीक होते हैं, लेकिन वर्तमान गतिविधियों से इस पारंपरिक महत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। अधिकरण के समक्ष याचिकाकर्ताओं द्वारा निर्माण और प्रदूषण की तस्वीरें भी पेश की गईं, जिस पर कोर्ट ने प्रतिवादियों को अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने को कहा है। इस कानूनी कार्रवाई के बीच आज 14 जून को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर की टीम ने उन्नाव बालाजी धाम पहुंचकर पहूज नदी पर चल रहे निर्माण कार्य, जलकुंभी, आसपास के नालों और डंपिंग साइट का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इसमें क्षेत्रीय अधिकारी डीवीएस जाटव व सहायक अभियंता विशाल पांडेय शामिल थे। बोर्ड की टीम ने निरीक्षण के दौरान प्रभावित स्थलों की जांच कर तस्वीरें ली हैं, जिनकी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी के समक्ष दाखिल की जाएगी। मौके पर मौजूद आवेदक के प्रतिनिधि ने बताया कि निरीक्षण टीम के साथ स्थानीय सरपंच लक्ष्मण वर्मा भी शामिल रहे।
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याचिका में आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश के दतिया जनपद स्थित धार्मिक स्थल उनाव में प्रशासन द्वारा नदी के डूब क्षेत्र में नियम विरुद्ध कंक्रीट निर्माण कराया जा रहा है, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही दतिया के उनाव, भांडेर व उत्तर प्रदेश के झांसी व जालौन जिलों के तमाम गांवों में राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्राकृतिक नालों और फीडर चैनलों पर अतिक्रमण कर अवैध निर्माण किया जा रहा है। इनमें सीवेज का गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। इससे प्रदूषित जल सीधे पहूज नदी में मिलकर उसकी जलीय पारिस्थितिकी को नष्ट कर रहा है। उन्नाव स्थित पहूज नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी काफी गहरा है। वहां श्रद्धालु नदी में स्नान कर भगवान सूर्य बालाजी को जल अर्पित करते हैं।
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मान्यता के अनुसार इस जल के औषधीय गुणों से चर्म रोग ठीक होते हैं, लेकिन वर्तमान गतिविधियों से इस पारंपरिक महत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। अधिकरण के समक्ष याचिकाकर्ताओं द्वारा निर्माण और प्रदूषण की तस्वीरें भी पेश की गईं, जिस पर कोर्ट ने प्रतिवादियों को अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने को कहा है। इस कानूनी कार्रवाई के बीच आज 14 जून को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर की टीम ने उन्नाव बालाजी धाम पहुंचकर पहूज नदी पर चल रहे निर्माण कार्य, जलकुंभी, आसपास के नालों और डंपिंग साइट का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इसमें क्षेत्रीय अधिकारी डीवीएस जाटव व सहायक अभियंता विशाल पांडेय शामिल थे। बोर्ड की टीम ने निरीक्षण के दौरान प्रभावित स्थलों की जांच कर तस्वीरें ली हैं, जिनकी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी के समक्ष दाखिल की जाएगी। मौके पर मौजूद आवेदक के प्रतिनिधि ने बताया कि निरीक्षण टीम के साथ स्थानीय सरपंच लक्ष्मण वर्मा भी शामिल रहे।
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