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झांसी में 1000 से ज्यादा लोगों को हर समय सताता रहता बीमारी का डर

Mon, 07 Mar 2022 12:17 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2022 12:17 AM IST
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More than 1000 people in Jhansi persecuted at all times
झांसी। झांसी में एक हजार से ज्यादा लोगों को हर समय किसी न किसी बीमारी का डर सताता रहता है। ऐसा कोविड की वजह से फियर ऑफ सिकनेस या फिर हाइपोकॉन्डियासिस बढ़ने की वजह से हुआ है। खुद को बीमार महसूस करने वाले व्यक्ति की सभी जांच रिपोर्ट सामान्य आती हैं तो वो बार-बार डॉक्टर बदल देता है।
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पिछले तीन महीने में ही अलग-अलग मर्ज के डॉक्टरों ने हाइपोकॉन्डियासिस के लगभग 500 रोगियों को काउंसलिंग के लिए मनोचिकित्सकों के पास रेफर किया है। मनोचिकित्सकों के मुताबिक कोरोना महामारी ने लोगों का मानसिक तनाव बढ़ाया है। कइयों को घबराहट की समस्या हो गई है। ऐसे में हल्का सा सीने में दर्द होता है तो मरीज हार्ट अटैक समझने लगता है। मुंह में छाला हो जाता है तो वो इसे कैंसर समझने लगते हैं। पेट में दर्द होता है तो मान लेते हैं कि जैसे लिवर या किडनी फेल हो गई हो। ऐसे मरीज खुद ही डॉक्टर पर तमाम जांचें लिखने का दबाव बनाने लगते हैं। जब सब जांचें सामान्य आती हैं तो कहने लगते हैं कि डॉक्टर मर्ज पकड़ नहीं पा रहा है। फिर वो एक-एक कर कई डॉक्टर बदलते रहते हैं। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक दौड़ लगाते हैं। झांसी के चार-पांच मनोचिकित्सक के पास तीन महीने में 80 से 100 मरीज ऐसी ही समस्या लेकर आ चुके हैं। ऐसे रोगियों को योग, मेडिटेशन आदि की सलाह देते हैं।
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ये परेशानी हो जाती
- चिंता
- डिप्रेशन
- नींद न आना
- नींद की गोलियां खाना
- एंटी डिप्रेशन दवाएं खाना
ये मामले आए सामने
केस-1
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एक महीने में दस डॉक्टरों को दिखाया
जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक के पास कुछ समय पहले हाइपोकॉन्डियासिस का एक मरीज फिजीशियन द्वारा रेफर करके भेजा गया। उसने पेट की समस्या होने पर एक महीने में 10 डॉक्टरों को दिखा लिया था। इसमें दिल्ली तक के डॉक्टर शामिल थे। उसकी एंडोस्कोपी तक कराई गई लेकिन कुछ नहीं निकला। मनोचिकित्सक ने काउंसलिंग कर उसे ठीक किया।
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केस-2
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चेस्ट पेन हुआ तो बोला-हार्ट अटैक आया
मनोचिकित्सक के पास ह्रदय रोग विशेषज्ञ ने एक मरीज रेफर किया। वह कई दिनों से चेस्ट पेन की समस्या बता रहा था। सभी जांचें सामान्य थीं। जब मनोचिकित्सक के पास पहुंचा तो बोला कि कोई डॉक्टर बीमारी पता नहीं कर पा रहा है। बाद में उसे दवाएं दी गईं, साथ में काउंसलिंग की गई तब जाकर वो ठीक हो सका।
कोरोना महामारी में कइयों ने अपनों को खोया तो कई खुद गंभीर बीमार पड़े। इससे लोगों में घबराहट और मानसिक तनाव बढ़ा है। पिछले तीन महीने में सौ से सवा सौ हाइपोकॉन्डियासिस के मरीज आ चुके हैं। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक।

पिछले तीन महीने में लगभग डेढ़ सौ मरीज हाइपोकॉन्डियासिस के आ चुके हैं। इस बीमारी की चपेट में आने वाला रोगी खुद को बीमार समझता रहता है। जांचें सामान्य आने पर भी बार-बार डॉक्टर बदलता रहता है। - डॉ. अर्जित गौरव, मनोचिकित्सक।
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