चरित्र पर शक: पत्नी को जंजीर से बांधकर सोता है पति, किसी ने ताले में कर दिया कैद
मॉरबिड जेलिसी यानी शक की बीमारी। शक भी अपने पार्टनर के चरित्रहीन होने का, जो न होते हुए भी यकीन में बदल जाए। यह बीमारी झांसी में सैकड़ों परिवार तबाह कर रही है। अपने पार्टनर की इस बीमारी से दूसरा व्यक्ति इस कदर परेशान हो जा रहा है कि वह मौत को गले लगाने से भी नहीं पीछे हटता। कई लोग आत्महत्या का भी प्रयास कर चुके हैं। हालात ये हैं कि बीमारी से ग्रसित एक बुजुर्ग व्यक्ति अपनी पत्नी को जंजीर से बांधकर सोता है तो कोई ताले में कैद कर रखता है।
मॉरबिड जेलिसी बीमारी में कोई व्यक्ति अपने पार्टनर के चरित्र पर शक करने लगता है। धीरे-धीरे शक यकीन में बदल जाता है तो फिर मारपीट से लेकर तमाम तरह से वह पार्टनर को प्रताड़ित करता है। कई बार वह खुद या पार्टनर की जान भी ले लेता है। झांसी में इस बीमारी के कई मामले लगातार सामने आ रहे हैं। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. शिकाफा जाफरीन ने बताया कि इस तरह की बीमारी अत्यधिक शराब का सेवन करने वालों या फिर गांजा पीने वालों में ज्यादातर देखने को मिलती है।
यदि किसी व्यक्ति को अपनी पत्नी के चरित्र के प्रति शक की बीमारी हो जाती है तो वह कोई न कोई कमी ढूंढता रहता है। पत्नी के गलत न होते हुए भी चरित्रहीनता का इल्जाम लगाने लगता है। पत्नी के मोबाइल फोन, पर्स की जांच करता रहता है। घर से बाहर निकलने पर उसका पीछा करता है। नौकरीपेशा होने पर ऑफिस जाकर पूछताछ करता है। घर पर आए दिन विवाद करता रहता है। जैसे-जैसे समय बीतता जाता है तो मारपीट शुरू कर देता है। कोई-कोई तो जान तक लेने का प्रयास करता है। उन्होंने बताया कि झांसी में जिला अस्पताल की ओपीडी में इस तरह के हर महीने 20-25 मामले सामने आ रहे हैं।
ये हैं लक्षण
इस बीमारी की शुरुआत अचानक या फिर धीरे-धीरे भी होती है। ऐसे में यदि आपका पार्टनर चरित्र को लेकर बेवजह बातें गढ़ने लगे, बाहर निकलने पर पीछा करने लगे, आपको लेकर पूछताछ करना शुरू कर दे, बार-बार चरित्रहीन होने का आरोप लगाए तो समझिए कि वह इस बीमारी की चपेट में आ चुका है। यदि समय से उसका उपचार नहीं कराया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
ये हैं मामले
केस-1
पड़ोसी से प्रेमप्रसंग के शक में 12 साल से कर रहा प्रताड़ित
सीपरी बाजार के एक व्यक्ति को पड़ोसी संग अपनी पत्नी के प्रेमप्रसंग का शक हो गया। पत्नी नौकरीपेशा है। पड़ोसी और महिला के ऑफिस जाने का एक ही समय था। इसलिए यह शक पैदा हुआ। पति ने पत्नी का पीछा करना शुरू कर दिया। घर लौटने पर वह पड़ोसी को लेकर आरोप लगाने लगा। पत्नी गलत नहीं है, इसलिए वह उसके आरोपों को नकारते हुए समझाती रही। एक दिन पति ने गुस्से में आकर पत्नी पर जानलेवा हमला कर दिया। परिजनों ने बीच बचाव कर दोनों को अलग किया। इसके बाद उसे मनोरोग विशेषज्ञ के पास लेकर आए। इलाज चलने के बाद अब वह ठीक है।
केस-2
कामधंधा बंद कर दिनभर पत्नी को आंखों के सामने बैठाने लगा
सुभाषगंज में ठेला लगाने वाले 35 वर्षीय युवक को भी मॉरबिड जेलिसी बीमारी होने की वजह से अपनी पत्नी के चरित्र को लेकर संदेह हो गया। पत्नी भी लोगों के घरों पर काम करने जाती थी। उसने खुद भी ठेला लगाना बंद कर दिया और पत्नी को भी कामकाज पर जाने से रोक दिया। दिनभर पत्नी को अपनी आंखों के सामने रखता। इसी बीच, उसे नशे की लत लग गई। परिवार में भुखमरी की स्थिति आ गई। किसी तरह पत्नी पति को मनोरोग विशेषज्ञ के पास लेकर पहुंची। वह दवा खाने को तैयार ही नहीं हुआ। लंबी काउंसिलिंग के बाद उसका इलाज शुरू हुआ। अब बीमारी धीरे-धीरे ठीक हो रही है।
केस-3
डॉक्टर ने घर पर लगवाए कैमरे, पत्नी ने काट ली हाथ की नस
अगर आप सोच रहे होंगे कि मॉरबिड जेलिसी बीमारी उच्च शिक्षित लोगों को नहीं हो सकती तो आप गलत हैं। सिविल लाइन निवासी एक डॉक्टर भी इस बीमारी ने चपेट में ले लिया। पत्नी के चरित्र पर संदेह इतना बढ़ गया कि उन्होंने घर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगा दिए। चिकित्सक जब भी घर से बाहर जाता तो दरवाजे पर ताला लगाकर पत्नी और बच्चों को घर के अंदर बंद कर जाता। पिता की हरकतों से बच्चे खौफजदा हो गए और पत्नी इस कदर डिप्रेशन में चली गई कि उसने हाथ की नस काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। अब डॉक्टर ्रका मनोचिकित्सक के पास इलाज चल रहा है।
केस-4
पैरों के निशां दे रही उत्पीड़न की गवाही, बच्चों की खातिर चुप रही
मॉरबिड जेलिसी बीमारी का शिकार रेलवे से सेवानिवृत्त अधिकारी जब भी रात में सोते, अपनी पत्नी को बेड के कोने से जंजीर से बांध देते। बच्चों के भविष्य को लेकर पत्नी सालों अत्याचार सहती रही। पति पत्नी के साथ लगातार गाली-गलौज करता रहा। यही नहीं, पत्नी का भाई तक मिलने आया तो उस पर भी शक करने लगा। एक दिन पत्नी मनोचिकित्सक के पास पहुंचकर रोने लगी। उसे अपने पांव पर जख्म के निशान भी डॉक्टर को दिखाए। पति खुद को गलत मानने को तैयार ही नहीं था। उसने इलाज से भी मना कर दिया। हालांकि, बाद में फिर लंबी काउंसलिंग के बाद उपचार शुरू हो सका।