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आधुनिक कालोनियों में बदलेंगे पुराने मुहल्ले
झांसी / ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2015 12:25 AM IST
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स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत शहर में अव्यवस्थित रूप से बसी बस्तियों का भी विकास किया जाएगा। हालांकि, अभी इस संदर्भ में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। लेकिन, नगर निगम में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के बारह शहरों को स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत शामिल करने को मंजरी दे दी है, जिसमें झांसी महानगर भी शामिल है। स्मार्ट सिटी मिशन योजना में शहर की अव्यवस्थित ढंग से बसीं पुरानी बस्तियों को भी नया रूप देने की योजना है। न्यूनतम पचास एकड़ के क्षेत्रफल में बसी बस्ती पर यह प्रावधान लागू होगा। हालांकि, अभी इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। लेकिन, नगर निगम ने अपनी ओर से ऐसी बस्तियों को चिह्नित करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर आयुक्त ने यह जिम्मेदारी पार्षदों को सौंपी है। उन्हें अपने वार्ड या आसपास के वार्डों में संयुक्त रूप से बसी उक्त क्षेत्रफल की बस्ती तलाशने को कहा गया है। योजना के तहत उक्त बस्तियों का पुनर्विकास किया जाएगा। इसके लिए केंद्र व प्रदेश सरदार द्वारा बजट आवंटित किया जाएगा। इन बस्तियों का पीपीपी मॉडल पर विकास होगा।
उक्त योजना के तहत चयनित बस्तियों में अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। लेकिन, इसके लिए उक्त बस्ती में रहने वाले लोगों की सहमति जरूरी होगी। इसमें केंद्र व राज्य सरकार के साथ स्थानीय लोगों का भी अंशदान होगा, लेकिन यह कितना होगा? यह अभी तय नहीं है।
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- अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त
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भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के बारह शहरों को स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत शामिल करने को मंजरी दे दी है, जिसमें झांसी महानगर भी शामिल है। स्मार्ट सिटी मिशन योजना में शहर की अव्यवस्थित ढंग से बसीं पुरानी बस्तियों को भी नया रूप देने की योजना है। न्यूनतम पचास एकड़ के क्षेत्रफल में बसी बस्ती पर यह प्रावधान लागू होगा। हालांकि, अभी इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। लेकिन, नगर निगम ने अपनी ओर से ऐसी बस्तियों को चिह्नित करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर आयुक्त ने यह जिम्मेदारी पार्षदों को सौंपी है। उन्हें अपने वार्ड या आसपास के वार्डों में संयुक्त रूप से बसी उक्त क्षेत्रफल की बस्ती तलाशने को कहा गया है। योजना के तहत उक्त बस्तियों का पुनर्विकास किया जाएगा। इसके लिए केंद्र व प्रदेश सरदार द्वारा बजट आवंटित किया जाएगा। इन बस्तियों का पीपीपी मॉडल पर विकास होगा।
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उक्त योजना के तहत चयनित बस्तियों में अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। लेकिन, इसके लिए उक्त बस्ती में रहने वाले लोगों की सहमति जरूरी होगी। इसमें केंद्र व राज्य सरकार के साथ स्थानीय लोगों का भी अंशदान होगा, लेकिन यह कितना होगा? यह अभी तय नहीं है।
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- अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त