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गोशाला पर निर्भर होगा बायोगेस प्लांअ

Sat, 31 Jul 2021 01:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jul 2021 01:57 AM IST
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Model biogas plant will depend on Gaushala
झांसी। छुट्टा जानवरों से भरी पड़ी गोशालाओं के गोबर का उपयोग अब बायोगैस बनाने में किया जाएगा। इससे गांवों का पर्यावरण स्वच्छ रहेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा उत्पादन भी बढ़ाया जाएगा। मॉडल के तौर पर चिरगांव ब्लाक की लुहरगांव गोशाला को तैयार किया जा रहा है। गोशाला में लगने वाले बायोगैस प्लांट का एस्टीमेट तैयार हो रहा है।
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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत संचालित गोबर धन वेस्ट टू वेल्थ जिला गोबर धन परियोजना के अंतर्गत मॉडल बायोगैस प्लांट लगाया जा रहा है। इस पर पांच लाख रुपये खर्च होंगे। लुहरगांव में गोशाला गांव से लगभग सौ मीटर की दूरी पर है। यहां 915 गोवंश हैं। गोशाला में गायों का गोबर इकट्ठा होता है। गोबर से बायोगैस तैयार की जाएगी, जिसका उपयोग गांव वाले करेंगे। यूपी नेडा को तकनीकी सहयोग करने के लिए नामित किया गया है और परियोजना के क्रियान्वयन के लिए कंसलटेंट महिम कुमार होंगे।
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सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा की तरह ही बायोगैस भी ऊर्जा का स्रोत है। यह गैस का वह मिश्रण है, जो आक्सीजन की अनुपस्थिति में जैविक सामग्री के विघटन से उत्पन्न होता है। इसमें मीथेन गैस होती है, जो ज्वलनशील होती है और इसे जलाने पर ऊर्जा प्राप्त होती है। बायोगैस को पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है। इसमें धुआं नहीं होता है, इससे बिजली तैयार की जा सकती है। एक किलोग्राम गोबर से .037 क्यूबिक लीटर मीथेन गैस निकलती है। इस हिसाब से 25 किलोग्राम गोबर से एक परिवार का खाना बनाने के लिए गैस तैयार हो जाती है। बायोगैस से बिजली बनाने के लिए झालर वाले बल्ब और बेकार तीन बैट्री सेल के कवर उतारकर उसमें तार जोड़कर इन्हें तीन अलग- अलग कुल्हड़ में भरे गोबर के घोल में डाल देते हैं। बायोगैस का उपयोग घरेलू और कृषि कार्यों में किया जाता है।
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अगले चरण में सुकुवां गोशाला
योजना के अंतर्गत अगले चरण में बबीना ब्लाक के ग्राम सुकुवां की गोशाला में बायोगैस प्लांट लगाया जाएगा। सुकुवां गोशाला में 815 गोवंश हैं। इनके गोबर का उपयोग बायोगैस बनाने में किया जाएगा।

अभी लुहरगांव गोशाला का एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। इसके बाद सुकुवां गोशाला के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। बायोगैस प्लांट लग जाने से गांव का पर्यावरण साफ- सुथरा रहेगा और ग्रामीण क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
- जगदीश राम गौतम
जिला पंचायत राज अधिकारी
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