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पति-पत्नी के रिश्तों में दरार डाल रहा मोबाइल
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केस एक- बड़ागांव गेट बाहर निवासी युवती का विवाह पिछले साल कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले युवक से हुआ। कारोबार के चलते युवक का अधिकांश समय मोबाइल पर बीतता है। पैसों का पूरा लेन-देन मोबाइल पर होने से वह अपना मोबाइल हमेशा लॉक रखते हैं। इसी बात पर पत्नी को शक होने लगा। विवाद से बढ़ते-बढ़ते नौबत मारपीट तक आ गई। मामला महिला थाने पहुंच गया। परिवार परामर्श केेंद्र के माध्यम से दोनों को समझा-बुझाकर साथ रहने पर राजी कर लिया गया।
केस दो- सीपरी बाजार निवासी एक युवती का विवाह पिछले वर्ष ही मार्च माह में हुआ है। पति प्राइवेट कंपनी में सेल्स का काम संभालते हैं। कामकाज के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं। घर आने पर भी फोन पर बिजी हो जाते हैं। यह बात पत्नी को अखरने लगी। अपने पर ध्यान न दिए जाने पर उसे पति पर शक होने लगा। पत्नी ने टोकाटाकी शुरू की। इस पर विवाद शुरू हो गया। विवाद महिला थाने पहुंच गया। दोनों पक्षों को पारिवारिक परामर्श केंद्र बुलाया गया। यहां पति ने पुलिस के सामने अपनी बात रखी। परामर्श केंद्र में समझाने-बुझाने के बाद दोनों पक्ष साथ रहने को राजी हुए।
केस तीन- नवाबाद के सिविल लाइन निवासी एक युवक की पत्नी सारा दिन मोबाइल पर बात करती रहती है। आधी रात के बाद भी पत्नी मोबाइल पर बात करती रहती है। पति को शक होने लगा। टोका-टाकी पर दोनों में विवाद शुरू हो गया। मारपीट तक की नौबत की आ गई। महिला गुहार लेकर थाने पहुंच गई। यहां पति को भी बुलाया गया। थाना पहुंचने पर मूल विवाद सामने आया कि वह मायके बात करती है। दोनों को समझा-बुझाकर शांत कराया गया।
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झांसी। पारिवारिक परामर्श केंद्र में पहुंचने वाली शिकायतों में अधिकांश मामले एक से दो वर्ष पहले विवाह करने वालों के दर्ज हैं। इनमें सर्वाधिक मामले विवाहोत्तर संबंधों से संबंधित हैं। पुलिस का कहना है कि पति-पत्नी के रिश्तों में दरार डालने में मोबाइल भी अहम कड़ी बनकर सामने आया है। इसकी वजह से रिश्ते बनने के साथ ही बिगड़ना शुरू हो जाते हैं। शक से पैदा हुई रिश्तों की इस खाई को पाटने में बड़ी मुश्किल आती है। पति-पत्नी की नासमझी से मामला पुलिस की चौखट तक पहुंच जाता है। मुकदमा दर्ज करने से पहले पुलिस इनको परिवार परामर्श केंद्र के जरिए सुलझाने की कोशिश करती है लेकिन, अधिकतम 50 फीसदी मामले ही निपट पाते हैं। बाकी मामलों में एफआईआर दर्ज हो जाती है।
अगर सिर्फ वर्ष 2021 की बात करें तब पूरे वर्ष में कुल 145 मामले ही परामर्श केंद्र के पास आए। इनमें 80 मामले ऐसे थे जिनमें पति-पत्नी का एक-दूसरे पर विश्वास नहीं था। शक करने के मामले में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक हैं। इसके बाद नवदंपती के बीच विवाद की दूसरी वजह शराब है। शराब पीकर मारपीट करने की शिकायतें भी लेकर महिलाएं सबसे अधिक पहुंचती हैं। संयुक्त परिवार की जगह अलग रहने की मांग लेकर भी विवाहिताएं महिला थाने पहुंचती हैं।
परामर्श केंद्र में काउंसलिंग से निपटाए गए 45 मामले
पिछले वर्ष 2021 में परिवार परामर्श केंद्र में कुल 145 मामले पहुंचे। काउंसिलिंग के बाद 45 मामलों में राजीनामा हो गया। पति-पत्नी साथ रहने को राजी हो गए। महिला थाने में गठित समिति में डा.नीति शास्त्री, डा.आलिया एजाज, नीलम गुप्ता, निरुपमा मोहन, शशिप्रभ मिश्रा शामिल हैं। प्रत्येक शनिवार को परामर्श केंद्र में ऐसे मामलों की काउंसिल कराई जाती है। महिला थाना प्रभारी नीलेश कुमारी का कहना है कोशिश की जाती है कि दोनों पक्षों की गलतफहमी को दूर करके उनको साथ में रहने पर राजी किया जा सके। काउंसलिंग के बाद नियमित अंतराल पर फीडबैक लेने का काम भी किया जाता है। हर शनिवार को महिला थाने में काउंसलिंग कराई जाती है।
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केस दो- सीपरी बाजार निवासी एक युवती का विवाह पिछले वर्ष ही मार्च माह में हुआ है। पति प्राइवेट कंपनी में सेल्स का काम संभालते हैं। कामकाज के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं। घर आने पर भी फोन पर बिजी हो जाते हैं। यह बात पत्नी को अखरने लगी। अपने पर ध्यान न दिए जाने पर उसे पति पर शक होने लगा। पत्नी ने टोकाटाकी शुरू की। इस पर विवाद शुरू हो गया। विवाद महिला थाने पहुंच गया। दोनों पक्षों को पारिवारिक परामर्श केंद्र बुलाया गया। यहां पति ने पुलिस के सामने अपनी बात रखी। परामर्श केंद्र में समझाने-बुझाने के बाद दोनों पक्ष साथ रहने को राजी हुए।
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केस तीन- नवाबाद के सिविल लाइन निवासी एक युवक की पत्नी सारा दिन मोबाइल पर बात करती रहती है। आधी रात के बाद भी पत्नी मोबाइल पर बात करती रहती है। पति को शक होने लगा। टोका-टाकी पर दोनों में विवाद शुरू हो गया। मारपीट तक की नौबत की आ गई। महिला गुहार लेकर थाने पहुंच गई। यहां पति को भी बुलाया गया। थाना पहुंचने पर मूल विवाद सामने आया कि वह मायके बात करती है। दोनों को समझा-बुझाकर शांत कराया गया।
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झांसी। पारिवारिक परामर्श केंद्र में पहुंचने वाली शिकायतों में अधिकांश मामले एक से दो वर्ष पहले विवाह करने वालों के दर्ज हैं। इनमें सर्वाधिक मामले विवाहोत्तर संबंधों से संबंधित हैं। पुलिस का कहना है कि पति-पत्नी के रिश्तों में दरार डालने में मोबाइल भी अहम कड़ी बनकर सामने आया है। इसकी वजह से रिश्ते बनने के साथ ही बिगड़ना शुरू हो जाते हैं। शक से पैदा हुई रिश्तों की इस खाई को पाटने में बड़ी मुश्किल आती है। पति-पत्नी की नासमझी से मामला पुलिस की चौखट तक पहुंच जाता है। मुकदमा दर्ज करने से पहले पुलिस इनको परिवार परामर्श केंद्र के जरिए सुलझाने की कोशिश करती है लेकिन, अधिकतम 50 फीसदी मामले ही निपट पाते हैं। बाकी मामलों में एफआईआर दर्ज हो जाती है।
अगर सिर्फ वर्ष 2021 की बात करें तब पूरे वर्ष में कुल 145 मामले ही परामर्श केंद्र के पास आए। इनमें 80 मामले ऐसे थे जिनमें पति-पत्नी का एक-दूसरे पर विश्वास नहीं था। शक करने के मामले में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक हैं। इसके बाद नवदंपती के बीच विवाद की दूसरी वजह शराब है। शराब पीकर मारपीट करने की शिकायतें भी लेकर महिलाएं सबसे अधिक पहुंचती हैं। संयुक्त परिवार की जगह अलग रहने की मांग लेकर भी विवाहिताएं महिला थाने पहुंचती हैं।
परामर्श केंद्र में काउंसलिंग से निपटाए गए 45 मामले
पिछले वर्ष 2021 में परिवार परामर्श केंद्र में कुल 145 मामले पहुंचे। काउंसिलिंग के बाद 45 मामलों में राजीनामा हो गया। पति-पत्नी साथ रहने को राजी हो गए। महिला थाने में गठित समिति में डा.नीति शास्त्री, डा.आलिया एजाज, नीलम गुप्ता, निरुपमा मोहन, शशिप्रभ मिश्रा शामिल हैं। प्रत्येक शनिवार को परामर्श केंद्र में ऐसे मामलों की काउंसिल कराई जाती है। महिला थाना प्रभारी नीलेश कुमारी का कहना है कोशिश की जाती है कि दोनों पक्षों की गलतफहमी को दूर करके उनको साथ में रहने पर राजी किया जा सके। काउंसलिंग के बाद नियमित अंतराल पर फीडबैक लेने का काम भी किया जाता है। हर शनिवार को महिला थाने में काउंसलिंग कराई जाती है।