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मनरेगा : तीन साल में आधा रह गया 100 दिन का काम
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। सरकार भले ही मनरेगा मजदूरों की स्थिति में सुधार के दावे कर रही हो, लेकिन जिले में मजदूरों की स्थिति बेहद खराब है। साल दर साल रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं। तीन साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो 100 दिन का रोजगार घटकर 50 फीसदी के पास ही रह गया है। ऐसे में मजदूर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर रुख कर रहे हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में श्रमिकों को रोजगार देने के लिए मनरेगा योजना संचालित है। इसके तहत, जॉब कार्डधारक परिवार को गांव में 100 दिन का रोजगार दिया जाता है, ताकि वह गांव में रहकर परिवार का भरण-पोषण कर सके। जिले के आठ विकास खंड में 496 ग्राम पंचायतें हैं।
मनरेगा में 2024-25 के आंकड़ों पर नजर डाले तो एक लाख 92 हजार जॉब कार्डधारक परिवार है और 2 लाख 98 हजार मजदूर पंजीकृत हैं। ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी मजदूरों को गांव में काम मिलने की स्थिति ठीक नहीं है। पिछले तीन साल की स्थिति पर गौर करें तो साल दर साल गांवों में मजदूरों को रोजगार मिलना कम हो रहा है।
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झांसी। सरकार भले ही मनरेगा मजदूरों की स्थिति में सुधार के दावे कर रही हो, लेकिन जिले में मजदूरों की स्थिति बेहद खराब है। साल दर साल रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं। तीन साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो 100 दिन का रोजगार घटकर 50 फीसदी के पास ही रह गया है। ऐसे में मजदूर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर रुख कर रहे हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में श्रमिकों को रोजगार देने के लिए मनरेगा योजना संचालित है। इसके तहत, जॉब कार्डधारक परिवार को गांव में 100 दिन का रोजगार दिया जाता है, ताकि वह गांव में रहकर परिवार का भरण-पोषण कर सके। जिले के आठ विकास खंड में 496 ग्राम पंचायतें हैं।
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मनरेगा में 2024-25 के आंकड़ों पर नजर डाले तो एक लाख 92 हजार जॉब कार्डधारक परिवार है और 2 लाख 98 हजार मजदूर पंजीकृत हैं। ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी मजदूरों को गांव में काम मिलने की स्थिति ठीक नहीं है। पिछले तीन साल की स्थिति पर गौर करें तो साल दर साल गांवों में मजदूरों को रोजगार मिलना कम हो रहा है।
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