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रामलला की भक्ति से निहाल करती है महरौनी की रामलीला
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झांसी। ललितपुर के महरौनी कस्बे में रामलीला के मंचन को 80 वर्ष हो चुके हैं। दर्शकों के लिए यहां की रामलीला आज भी आकर्षण का विशेष केंद्र है। वरिष्ठ कलाकारों का कहना है कि लीला मंचन में भाव को प्रधानता दी जाती है। यही कारण है कि कई दर्शक मंचन के दौरान भक्ति भाव से विभोर हो जाते हैं।
महरौनी की रामलीला अपने में कई विशेषताएं लिए हुए हैं। वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस में वर्णित प्रसंगों के साथ ही मेघनाथ-रावण संवाद और रावण-बाणासुर संवाद का भी आकर्षक मंचन किया जाता है। श्रीराम यश कीर्तन मंडली के अनुसार रामलीला को देखने के लिए दूर-दूर के गांव से लोग आते हैं। उनके बैठने की भी संपूर्ण व्यवस्था की जाती है। दशहरे पर भव्य विजय जुलूस निकाला जाता है। वरिष्ठ कलाकारों के अनुसार पिछले साल रामलीला कोरोना के कारण नहीं हो पाई थी। इस बार मंचन की तैयारियां की जा रही हैं।
मंचन में सभी कलाकार भाव को प्रधानता देते हैं। अनुशासन भरा जीवन जीते हैं। बुजुर्ग कलाकारों की निगरानी में मंचन किया जाता है।
बाबूलाल नायक, वरिष्ठ कलाकार
धनुष यज्ञ, रावण-मेघनाथ एवं रावण-बाणासुर संवाद का मंचन आकर्षक रहता है। सभी कलाकार निशुल्क काम करते हैं।
कुलदीप खरे, मंच व्यवस्थापक
महरौनी की रामलीला में कई कलाकार पीढ़ियों से काम कर रहे हैं। यहां की रामलीला को देखने के लिए दूर-दूर के गांवों से लोग आते हैं।
अमित नायक, वरिष्ठ कलाकार
रामलीला में सभी समाजों के लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और अपनी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी संभालते हैं। यहां की रामलीला को 80 वर्ष हो चुके हैं।
भाग चंद्र जैन, वरिष्ठ कलाकार
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महरौनी की रामलीला अपने में कई विशेषताएं लिए हुए हैं। वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस में वर्णित प्रसंगों के साथ ही मेघनाथ-रावण संवाद और रावण-बाणासुर संवाद का भी आकर्षक मंचन किया जाता है। श्रीराम यश कीर्तन मंडली के अनुसार रामलीला को देखने के लिए दूर-दूर के गांव से लोग आते हैं। उनके बैठने की भी संपूर्ण व्यवस्था की जाती है। दशहरे पर भव्य विजय जुलूस निकाला जाता है। वरिष्ठ कलाकारों के अनुसार पिछले साल रामलीला कोरोना के कारण नहीं हो पाई थी। इस बार मंचन की तैयारियां की जा रही हैं।
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मंचन में सभी कलाकार भाव को प्रधानता देते हैं। अनुशासन भरा जीवन जीते हैं। बुजुर्ग कलाकारों की निगरानी में मंचन किया जाता है।
बाबूलाल नायक, वरिष्ठ कलाकार
धनुष यज्ञ, रावण-मेघनाथ एवं रावण-बाणासुर संवाद का मंचन आकर्षक रहता है। सभी कलाकार निशुल्क काम करते हैं।
कुलदीप खरे, मंच व्यवस्थापक
महरौनी की रामलीला में कई कलाकार पीढ़ियों से काम कर रहे हैं। यहां की रामलीला को देखने के लिए दूर-दूर के गांवों से लोग आते हैं।
अमित नायक, वरिष्ठ कलाकार
रामलीला में सभी समाजों के लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और अपनी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी संभालते हैं। यहां की रामलीला को 80 वर्ष हो चुके हैं।
भाग चंद्र जैन, वरिष्ठ कलाकार