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मेडिकल कॉलेज : सिर्फ पढ़ाई जाती है रोबोटिक सर्जरी, नहीं होता प्रैक्टिकल
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में पीजी कर रहे छात्र-छात्राओं को रोबोटिक सर्जरी का सिर्फ किताबी ज्ञान दिया जा रहा है। प्रैक्टिकल नहीं कराए जा रहे हैं। इसकी वजह रोबोटिक सर्जरी के उपकरण का न होना है। मेडिकल के छात्रों का कहना है कि रोबोटिक सर्जरी सीखने के लिए निजी चिकित्सा संस्थान में जाना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज में पीजी के छात्रों को सर्जरी (ऑपरेशन) करना सिखाया जाता है। कोई जनरल सर्जरी (गॉल ब्लैडर, अपेंडिक्स आदि), ईएनटी, पैंक्रियाज, गायनी तो कोई किडनी आदि की सर्जरी सीखता है। इन छात्र-छात्राओं को रोबोटिक सर्जरी का व्यावहारिक ज्ञान नहीं दिया जाता है।
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डॉ. सुमित (जेआर थर्ड) का कहना है कि पीजी में रोबोटिक सर्जरी के बारे में पढ़ाया जाता है। कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी नहीं सिखाई जाती है क्योंकि काफी महंगी होती है। इसमें ऑपरेशन के समय सर्जन कंट्रोल करता है।
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सीनियर रेजिडेंट डॉ. मंजूनाथ ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी की सुविधा सुपर स्पेशलिटी में होती है। मेडिकल कालेज में इसके बारे में पढ़ाया जाता है। चूंकि हर सर्जरी के अलग-अलग उपकरण होते हैं, इसलिए महंगी होती है।
वहीं, मेडिकल कॉलेज के सीनियर सर्जन डॉ. सूर्य प्रकाश ने कहा कि पीजी में रोबोटिक सर्जरी का एक टॉपिक है। आर्थो, किडनी, पैंक्रियाज, गॉल ब्लैडर, यूरिन ब्लैडर आदि के अलग-अलग होते हैं। यह प्रदेश के किसी मेडिकल कॉलेज में नहीं।
वर्जन
पीजी के मेडिकल छात्र-छात्राओं को रोबोटिक सर्जरी पढ़ाई जाती है। कॉलेज में फिलहाल प्रैक्टिकल की सुविधा नहीं है। इसमें सर्जन ऑपरेशन के दौरान उपकरण को कंट्रोल करता है। - डॉ. अलबेल सिंह, विभागाध्यक्ष सर्जरी विभाग
0- जिले में सिर्फ एक जगह होता है रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण
झांसी। जिले में एकमात्र रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. गौरव गुप्ता हैं। उन्होंने रोबोट की सहायता से होने वाले घुटना प्रत्यारोपण में एक विशिष्ट रोबोट का प्रयोग किया है। बिना ज्यादा हड्डी काटे नए घुटने के प्रत्यारोपण को सुनिश्चित करता है, जो 100 फीसदी सटीक होता है। इसमें रक्त स्राव काफी कम होता है और दर्द रहित होता है। जोड़ प्रत्यारोपण के बाद मरीज अगले दिन से चलना शुरू कर सकता है। किसी प्रकार का कोई प्लास्टर नहीं लगता है। रोबोटिक सर्जरी जोखिम को कम करता है।