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मेडिकल कालेज: आकस्मिक निकास पर लगे ताले, पड़ सकते हैं जान के लाले
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आकस्मिक निकास के मार्ग के गेटों पर ताले लगे हुए हैं। जबकि, आकस्मिक स्थिति में कभी भी कोई घटना हो सकती है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि यदि आग लगी तो मरीज कैसे अपनी जान बचाएंगे।
मेडिकल कॉलेज में तीन मंजिला वार्ड बिल्डिंग बनी हुई है। हर वार्ड में बाथरूम से पहले आकस्मिक निकास के लिए दो गेट लगे हुए हैं। इसमें एक गेट से ऊपर तो दूसरे से नीचे की ओर रास्ता जाता है। इस गेट का उपयोग इमरजेंसी की स्थिति में वार्ड से बाहर निकलने के लिए किया जाता है। सभी का रास्ता भूतल वाले वार्ड पर आकर खुलता है। मगर वार्ड की हर बिल्डिंग के इमरजेंसी गेट पर ताले लगे हुए हैं। इन हालातों में अगर आग लगने जैसी स्थिति बनती है तो फिर मरीजों के सामने जान बचाने के लाले पड़ सकते हैं। मेडिकल कालेज प्रशासन ने दिल्ली जैसे अग्निकांड से भी कोई सबक नहीं लिया है।
हर वार्ड पर रहते हैं 75 लोग
प्रथम तल से लेकर ऊपर तक छह वार्ड पड़ते हैं। हर वार्ड में लगभग 50 बेड होते हैं। औसतन प्रत्येक वार्ड में 30 रोगी रहते हैं। हर मरीज के साथ एक से दो तीमारदार भी होते हैं। इसके अलावा 10 से 15 स्टाफ कर्मी रहते हैं। ऐसे में हर वार्ड में औसतन 75 लोग रहते हैं।
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अभी इस संबंध में जानकारी नहीं है। सोमवार को इस बाबत स्टाफ से पूछताछ की जाएगी। - डॉ. सुनीता भदौरिया, एसआईसी, मेडिकल कॉलेज।
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मेडिकल कॉलेज में तीन मंजिला वार्ड बिल्डिंग बनी हुई है। हर वार्ड में बाथरूम से पहले आकस्मिक निकास के लिए दो गेट लगे हुए हैं। इसमें एक गेट से ऊपर तो दूसरे से नीचे की ओर रास्ता जाता है। इस गेट का उपयोग इमरजेंसी की स्थिति में वार्ड से बाहर निकलने के लिए किया जाता है। सभी का रास्ता भूतल वाले वार्ड पर आकर खुलता है। मगर वार्ड की हर बिल्डिंग के इमरजेंसी गेट पर ताले लगे हुए हैं। इन हालातों में अगर आग लगने जैसी स्थिति बनती है तो फिर मरीजों के सामने जान बचाने के लाले पड़ सकते हैं। मेडिकल कालेज प्रशासन ने दिल्ली जैसे अग्निकांड से भी कोई सबक नहीं लिया है।
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हर वार्ड पर रहते हैं 75 लोग
प्रथम तल से लेकर ऊपर तक छह वार्ड पड़ते हैं। हर वार्ड में लगभग 50 बेड होते हैं। औसतन प्रत्येक वार्ड में 30 रोगी रहते हैं। हर मरीज के साथ एक से दो तीमारदार भी होते हैं। इसके अलावा 10 से 15 स्टाफ कर्मी रहते हैं। ऐसे में हर वार्ड में औसतन 75 लोग रहते हैं।
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अभी इस संबंध में जानकारी नहीं है। सोमवार को इस बाबत स्टाफ से पूछताछ की जाएगी। - डॉ. सुनीता भदौरिया, एसआईसी, मेडिकल कॉलेज।