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मेडिकल कॉलेज में सिर्फ इमरजेंसी दवाएं
jhansi
Updated Mon, 23 Oct 2017 12:31 AM IST
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- फोटो : demo pic
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में सिर्फ इमरजेंसी दवाएं बची हैं। ओपीडी, वार्ड के मरीजों को दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं। डॉक्टर मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। खासतौर पर निर्धन मरीजों को इलाज कराना मुश्किल हो गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शासन से 10 करोड़ बजट मांगा है।
मेडिकल कॉलेज को वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए सरकार अब तक चार करोड़ रुपये बजट दे चुकी है। लगभग डेढ़ महीने पहली ही 2.75 करोड़ रुपये बजट भेजा गया था। इसमें 30 लाख रुपये ऑक्सीजन गैस के थे। चार करोड़ रुपये बजट से मेडिकल कॉलेज सिर्फ 80 लाख रुपये की ही दवाएं खरीद सका। बाकी पैसा ऑक्सीजन गैस, केमिकल और बकाया के भुगतान में खर्च हो गया। अब फिर से मेडिकल कॉलेज में दवाओं का टोटा हो गया है। वार्ड, ओपीडी में आने वाले मरीजों को दवाएं नहीं दी जा रही हैं। डॉक्टर उन्हें बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। सिर्फ गंभीर मरीजों के लिए इमरजेंसी की दवाएं बची हुई हैं, इनमें रक्तचाप कम होने पर जरूरी डबूटामिन, डेक्सामीटासोन, डोपामिन, हाइड्रोहॉर्टीसोन आदि हैं। इनमें भी आईबी फ्लूड की बोतलें उधार खरीदी गई हैं। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जीवन रक्षक दवाएं भी उधारी पर खरीदी हैं।
बॉक्स..
रिजर्व में एंटीबायोटिक, एंटी मलेरिया प्रचुर
मेडिकल कॉलेज में नीरोपलम, सेफट्रिक्सजॉन समेत एंटीबायोटिक इंजेक्शन रिजर्व में हैं। इसके अलावा वाइरल के लिए सामान्य एंटीबायोटिक ही हैं। राहत की बात बस ये है कि एंटी मलेरिया, एंटी स्नैक बिनम, एंटी रैबीज इंजेक्शन प्रचुर मात्रा में हैं।
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महज 24 हजार रुपये बचे
मेडिकल कॉलेज में औषधियों के लिए सिर्फ 24 हजार रुपये ही बचे हैं। जबकि, अक्तूबर माह से ऑक्सीजन गैस की उधारी शुरू हो गई है। बताया गया कि हर महीने मेडिकल कॉलेज में 18.50 लाख रुपये की ऑक्सीजन गैस खरीदी जाती है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज पर इस महीने से गैस की उधारी भी चढ़ती जाएगी।
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पहले ही मांग चुके 10 करोड़
अभी जानकारी नहीं है कि कितनी दवाएं बची हैं। सोमवार को सीएमएस से दवाओं के संबंध में पूछताछ की जाएगी। हालांकि, 20-25 दिन पहले ही शासन को पत्र लिखकर मार्च तक की दवाओं के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट मांगा जा चुका है। - डॉ. एनएस सेंगर, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य।
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मेडिकल कॉलेज को वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए सरकार अब तक चार करोड़ रुपये बजट दे चुकी है। लगभग डेढ़ महीने पहली ही 2.75 करोड़ रुपये बजट भेजा गया था। इसमें 30 लाख रुपये ऑक्सीजन गैस के थे। चार करोड़ रुपये बजट से मेडिकल कॉलेज सिर्फ 80 लाख रुपये की ही दवाएं खरीद सका। बाकी पैसा ऑक्सीजन गैस, केमिकल और बकाया के भुगतान में खर्च हो गया। अब फिर से मेडिकल कॉलेज में दवाओं का टोटा हो गया है। वार्ड, ओपीडी में आने वाले मरीजों को दवाएं नहीं दी जा रही हैं। डॉक्टर उन्हें बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। सिर्फ गंभीर मरीजों के लिए इमरजेंसी की दवाएं बची हुई हैं, इनमें रक्तचाप कम होने पर जरूरी डबूटामिन, डेक्सामीटासोन, डोपामिन, हाइड्रोहॉर्टीसोन आदि हैं। इनमें भी आईबी फ्लूड की बोतलें उधार खरीदी गई हैं। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जीवन रक्षक दवाएं भी उधारी पर खरीदी हैं।
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रिजर्व में एंटीबायोटिक, एंटी मलेरिया प्रचुर
मेडिकल कॉलेज में नीरोपलम, सेफट्रिक्सजॉन समेत एंटीबायोटिक इंजेक्शन रिजर्व में हैं। इसके अलावा वाइरल के लिए सामान्य एंटीबायोटिक ही हैं। राहत की बात बस ये है कि एंटी मलेरिया, एंटी स्नैक बिनम, एंटी रैबीज इंजेक्शन प्रचुर मात्रा में हैं।
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महज 24 हजार रुपये बचे
मेडिकल कॉलेज में औषधियों के लिए सिर्फ 24 हजार रुपये ही बचे हैं। जबकि, अक्तूबर माह से ऑक्सीजन गैस की उधारी शुरू हो गई है। बताया गया कि हर महीने मेडिकल कॉलेज में 18.50 लाख रुपये की ऑक्सीजन गैस खरीदी जाती है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज पर इस महीने से गैस की उधारी भी चढ़ती जाएगी।
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पहले ही मांग चुके 10 करोड़
अभी जानकारी नहीं है कि कितनी दवाएं बची हैं। सोमवार को सीएमएस से दवाओं के संबंध में पूछताछ की जाएगी। हालांकि, 20-25 दिन पहले ही शासन को पत्र लिखकर मार्च तक की दवाओं के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट मांगा जा चुका है। - डॉ. एनएस सेंगर, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य।