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मेडिकल कॉलेज : 20 में से 17 विभाग ‘बीमार’, एमबीबीएस की मान्यता पर तलवार
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के 20 में से 17 विभागों में चिकित्सा शिक्षकों की कमी है। नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) को भेजे स्वघोषणा पत्र के बाद कई अन्य कमियां भी सामने आई हैं। ऐसे में एमबीबीएस की मान्यता पर खतरा मंडराने लगा है। इसके अलावा, जवाब संतोषजनक न मिलने पर भारी जुर्माना भी लग सकता है।
पिछले साल अक्तूबर में मेडिकल कॉलेज ने एनएमसी के पोर्टल पर स्वघोषणा पत्र अपलोड किया था। इसमें चिकित्सा शिक्षकों की संख्या से लेकर ओपीडी, आईपीडी से लेकर ओटी तक की कई जानकारियां दर्ज की गई थीं। हाल ही में एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी किया। बायोमेट्रिक उपस्थिति के रिकॉर्ड आधार पर कॉलेज में एनाटॉमी, एनेस्थीसिया, बायोकेमिस्ट्री, कम्युनिटी मेडिसिन, फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सीकोलॉजी, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, माइक्रोबायोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, ऑप्थेल्मोलॉजी, पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी, फिजियोलॉजी, साइक्रेट्री, रेडियो डायग्नोसिस समेत 17 विभागों में चिकित्सा शिक्षकों की कमी है।
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वहीं, सभी विभागों में 80 फीसदी से अधिक बेड पर मरीज भर्ती रहने चाहिए। इसमें भी कमी सामने आई है। वहीं, ओपीडी में बायोप्सी और पैथोलॉजिकल जांच की नमूनों की संख्या भी मानक से कम मिली है। मेजर और माइनर ओटी की जानकारी अपलोड नहीं की गई है। इन सब बिंदुओं का उल्लेख करते हुए एनएमसी ने कॉलेज प्रशासन से एक हफ्ते में जवाब मांग लिया है। ऐसे में चिकित्सा शिक्षकों की कमी की वजह से एमबीबीएस की मान्यता पर भी खतरा मंडरा रहा है। अभी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 150 सीटें हैं।
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पिछले सत्र में भी फैकल्टी कमी पर लगा था जुर्माना
चिकित्सा शिक्षा विनियमन 2023 के अंतर्गत चिकित्सा संस्थान द्वारा मानकों का उल्लंघन या किसी चूक के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना या उक्त विनियमन में अन्य कठोर कार्रवाई निर्धारित की गई है। जबकि, शैक्षणिक सत्र 2024-25 में भी झांसी मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी की बायोमेट्रिक उपस्थिति और अन्य मापदंडों में कमी पाई गई थी। फिर कॉलेज पर बोर्ड ने आर्थिक दंड भी लगाया था।
कॉलेज में अहम पदों पर वरिष्ठ चिकित्सकों को प्रभार
कॉलेज में न सिर्फ फैकल्टी की कमी है। बल्कि, प्रधानाचार्य, एसआईसी से लेकर सीएमएस पद पर भी नियमित अधिकारी तैनात नहीं है। वरिष्ठ चिकित्सकों को अतिरिक्त प्रभार मिला हुआ है। ऐसे में उन पर भी काम का बोझ ज्यादा है।
वर्जन..
एनएमसी को जब स्वघोषणा पत्र भेजा गया, उसके बाद से 11 चिकित्सा शिक्षकों की तैनाती हो चुकी है। लगातार संविदा पर साक्षात्कार के जरिये भी फैकल्टी की नियुक्ति की जा रही है। इसके अलावा पत्र में जिन बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, वे सभी मानक पूरे हैं। बृहस्पतिवार को एनएमसी को जवाब भेज दिया जाएगा। - डॉ. मयंक सिंह, प्रभारी प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज