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शहीद की विधवा को दो साल बाद भी नहीं मिल पाई नौकरी

Sat, 02 Jul 2022 11:48 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2022 11:48 PM IST
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Martyr's widow could not get job even after two years
झांसी। कानपुर में दो साल पहले बिकरु कांड में शहीद हुए सिपाही की पत्नी को दो साल बाद भी अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल पाई है। जबकि, पहले उसे शिक्षा विभाग में नौकरी का भरोसा दिया गया था, जिसे पूरा नहीं किया गया। अब पुलिस विभाग में नौकरी की खातिर शहीद की विधवा लगातार महकमे के चक्कर काट रही है, लेकिन उसकी फरियाद सुनी नहीं जा रही है।
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कानपुर के बिकरु में गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने दो जुलाई 2020 की रात पुलिस टीम पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं थीं। इस घटना में डीएसपी व एसओ समेत आठ पुलिस कर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। घटना में शहीद होने वालों में झांसी का भोजला निवासी सिपाही सुल्तान सिंह भी था। घटना के बाद शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई थी। जबकि, उसकी पत्नी उर्मिला को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दिए जाने का भरोसा दिया गया था। उर्मिला बीएड और टीईटी किए हुए थी, ऐसे में उसने शिक्षा विभाग में नौकरी की इच्छा जताई थी, जिस पर सरकार के नुमाइंदों की ओर से हामी भर दी गई थी। लेकिन, समय के साथ शहादत की यादें भी धुंधली होती चली गईं। शिक्षा विभाग ने शहीद की विधवा को महकमे में नौकरी देने से हाथ खड़े कर दिए। इस पर उर्मिला ने पुलिस विभाग में नौकरी की गुहार लगाई। लेकिन, ये भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। पुलिस विभाग की ओर से 32 वर्षीय शहीद की विधवा के साथ फिजिकल टेस्ट पास करने की शर्त रखी है। दौड़ का टेस्ट पास करने के लिए कहा गया है। लेकिन, बीमार होने की वजह से इस टेस्ट को पास करना उसके लिए मुश्किल साबित हो रहा है।
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सीएम से नहीं मिल पाई, अफसर सुन नहीं रहे
झांसी। शहीद सुल्तान सिंह की पत्नी उर्मिला ने बताया कि पुलिस विभाग में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पाने के लिए उसकी ओर से विभागीय अधिकारियों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है, परंतु ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई बार लखनऊ पहुंचकर उसने मुख्यमंत्री से मिलने की भी कोशिश की, ताकि वह उन तक अपनी पीड़ा पहुंचा सके, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद सीएम से मिलने का उसे मौका नहीं मिल पाया।
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