मनरेगा का धन मिला पर जरूरत नहीं हुई पूरी

अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 12 Apr 2016 01:55 AM IST
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झांसी। मनरेगा की मजदूरी नहीं मिली तो मजदूरों ने काम बंद कर दिया है। एक माह से ज्यादा जब पेमेंट नहीं हुई तो ठेकेदार ने भी सामग्री देनी बंद कर दी है। सरकार ने मनरेगा के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये जारी किए। लेकिन देनदारी 27 करोड़ से अधिक होने से अभी भी करीब बारह करोड़ रुपये बकाया रह गया है। अब स्थानीय अधिकारी बकाया राशि चुकाने को लेकर पेशोपेश में हैं।
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महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में लोगों को राहत देने के लिए क्षेत्र में ही रोजगार देने के निर्देश दिए गए थे। इससे क्षेत्रीय लोगों को विशेषकर ग्रामीण इलाकों में रोजगार के लिए पलायन करने वाले परिवारों को काफी मदद मिली थी। 23 फरवरी को मजदूरों को आखिरी भुगतान किया गया था। धनराशि न होने पर मजदूरों से उधारी में काम कराया जाने लगा। ठेकेदारों को भी निर्माण सामग्री का भुगतान नहीं किया गया।


मार्च में भी बिना भुगतान किए मजदूरों से काम कराया गया। स्थिति यह हो गई कि मजदूरी न मिलने पर ग्रामीणों ने जहां काम करना बंद कर दिया, वहीं ठेकेदारों ने सामग्री की आपूर्ति नहीं की। 29 मार्च से तीन अप्रैल के बीच प्रदेश सरकार को 281 करोड़ रुपये केंद्र से मिले। इसमें से झांसी को लगभग 15 करोड़ रुपये की धनराशि मिल सकी। इससे 27 करोड़ की मजदूरी व सामग्री की बकाएदारी पूरी नहीं चुकाई जा सकी।

नतीजा यह निकला कि रकम खर्च करने के बावजूद मजदूरों की 5.68 करोड़ और सामग्री के 6.85 करोड़ रुपये बकाया रह गए। अर्थात कुल 12.63 करोड़ की देनदारी शेष रह गई। वहीं, अधिकारियों के मुताबिक शासन से धनराशि मिलते ही मजदूरों व ठेकेदारों का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा।

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आंकड़ों के खेल में उलझी मनरेगा
झांसी। जनपद में लगभग 1.70 लाख जॉब कार्ड धारक हैं। इनमें तीन लाख से अधिक मजदूर चिह्नित किए गए हैं। इसके बावजूद प्रतिदिन अधिकतम 6,500 लोगों को ही वास्तविकता में रोजगार मिलता है, जबकि आंकड़ों में यह बाजीगरी 20,000 हजार तक बताई जाती है। यही कारण रहा कि झांसी जनपद को 34 हजार मानव दिवस सृजित करने के उपलक्ष्य में सरकार से शाबासी मिली और अधिकारियों ने अपने हाथों अपनी पीठ भी थपथपाई। आंकड़ों की बाजीगरी से अधिकारी तो अंक पा गए, मगर गरीबों को उनका हक उतना नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।

प्रदेश सरकार के खाते में 704 करोड़ आए
झांसी। केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार के खाते में पहली किस्त के रूप में 704 करोड़ रुपये जमा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है। लेकिन इस बार धनराशि भुगतान का तरीका बदल दिया गया है। अब मनरेगा की मजदूरी जॉब कार्ड धारकों के खाते में सीधे सरकार द्वारा जमा कराई जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर होने वाला लेन-देन बंद हो जाएगा और गरीबों को उनका हक सरकार द्वारा सीधा मिल सकेगा। मनरेगा उपायुक्त विकास कुमार का कहना है कि सीधे खाते में रुपये जाने से बीच का सिस्टम जो कुछ असंतुलित हो रहा था, सुधर जाएगा। इस धनराशि के खत्म होने का भी भय नहीं होगा और धनराशि पूरे प्रदेश में जिलों की जरूरत के हिसाब से वितरित होगी।

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