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बनेगा बुंदेलखंड राज्य, राजधानी होगी प्रयागराज!

Tue, 01 Oct 2019 02:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Oct 2019 02:21 AM IST
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make bundelkhand state, prayagraj became capital
make bundelkhand state, prayagraj became capital
बनेगा बुंदेलखंड राज्य, राजधानी होगी प्रयागराज!
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झांसी। इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक मेसेज ने बुंदेलखंड में हलचल बढ़ा रखी है। इसमें बताया गया है कि सरकार उप्र को तीन अलग-अलग राज्यों में बांटने जा रही है। इनमें उप्र, पूर्वांचल के अलावा बुंदेलखंड भी है। बुंदेलखंड राज्य में झांसी और चित्रकूट मंडल के सात जनपदों के अलावा प्रयागराज, मिर्जापुर और कानपुर मंडल के दस जिले और जोड़े जा रहे हैं और राजधानी प्रयागराज बनाई जाएगी। हालांकि, इसे लेकर सरकार की ओर से कोई अधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन, अलग बुंदेलखंड राज्य के पैरोकारों के बीच बहस तेज हो चली है। वे इस नये बुंदेलखंड राज्य को सिरे खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि उप्र और मप्र के सात-सात जनपदों को मिलाकर ही बुंदेलखंड राज्य बनाया जा सकता है। वास्तविक बुंदेलखंड यही है।
उत्तर प्रदेश के सात जिले झांसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, महोबा, हमीरपुर व चित्रकूट तथा मध्य प्रदेश के सात जिले दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर व निवाड़ी को बुंदेलखंड माना जाता है। इन चौदह जिलों की भौगोलिक स्थितियां समान हैं, साथ ही भाषा-बोली और परंपराओं के मामले में भी ये एक जैसे हैं। यही वजह है कि 2009 में केंद्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड विशेष पैकेज उक्त जिलों के लिए ही दिया गया था। लेकिन, हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए मेसेज में प्रस्तावित बुंदेलखंड राज्य में उत्तर प्रदेश के उक्त सात जिले तो दर्शाए जा रहे हैं, परंतु मध्य प्रदेश के जनपद इसमें नहीं है। इनके स्थान पर प्रयागराज मंडल के प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी व प्रतापगढ़, मिर्जापुर मंडल के मिर्जापुर, संत रविदास नगर व सोनभद्र और कानपुर मंडल के कानपुर नगर, कानपुर देहात व औरैया को बुंदेलखंड राज्य में दिखाया जा रहा है। प्रस्तावित बुंदेलखंड राज्य की राजधानी प्रयागराज को बताया जा रहा है। इस मेसेज ने क्षेत्र में एक नई बहस शुरू कर दी है।
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खासतौर पर पृथक बुंदेलखंड राज्य निर्माण की लड़ाई लड़ने वाले संगठन बुंदेलखंड के इस नये नक्शे को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि ने नक्शा बेमेल है। प्रयागराज मंडल और कानपुर मंडल की भाषा बोली तक अलग हैं। बुदेलखंड की जरूरतें अलग हैं। यहां औद्योगिक विकास की जरूरत है। क्षेत्र के पर्यटन विकास की जरूरत है। रोजगार की जरूरत है। लेकिन, यदि प्रस्तावित बुंदेलखंड राज्य बन जाता है तो औद्योगिक विकास कानपुर मंडल में पहुंच जाएगा और पर्यटन विकास की धारा प्रयागराज की ओर मुड़ जाएगी जाएगी। ऐसे में बुंदेलखंड राज्य बन जाने के बाद भी क्षेत्र का कोई भला होने वाला नहीं है।
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उप्र व मप्र का भूभाग ही बुंदेलखंड
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चौदह जिलों को सरकार भी बुंदेलखंड क्षेत्र मानती है। 2009 में बुंदेलखंड विशेष पैकेज इन्हीं चौदह जिलों को दिया गया था। इसके अलावा पिछले साल सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में भी गृह मंत्रालय की ओर से बताया गया था बुंदेलखंड राज्य का प्रस्ताव लंबित पड़ा हुआ है, जिसमें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जिले शामिल हैं।
प्रस्ताव हो चुका है पारित
2007 में मायावती के नेतृत्व में बनी प्रदेश की बसपा सरकार ने बुंदेलखंड राज्य के प्रस्ताव को पारित कर केंद्र के पास भेजा था। प्रदेश सरकार ने झांसी और चित्रकूट मंडल के सातों जनपदों को मिलाकर बुंदेलखंड राज्य बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा था। लेकिन, इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
2014 में उम्मीदें चढ़ीं थीं परवान
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में झांसी-ललितपुर संसदीय सीट से भाजपा ने उमा भारती को प्रत्याशी बनाया था। चुनाव से पहले उन्होंने वादा किया था कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने पर तीन साल में अलग राज्य बना दिया जाएगा। सरकार बनने के बाद उमा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इससे लगने लगा था कि अब केंद्र में अलग राज्य की तगड़ी पैरोकारी होगी। लेकिन, हुआ कुछ नहीं।
मेसेज पर इसलिए किया जा रहा भरोसा
सोशल मीडिया पर वायरल हुए मेसेज पर तमाम लोग आसानी से भरोसा कर रहे हैं। उनका मानना है कि कहीं न कहीं अंदरखाने में प्रदेश को तीन अलग-अलग राज्यों में बांटने की बात जरूर चल रही है। भाजपा को छोटे राज्यों की पक्षधर माने जाने के चलते ये भरोसा और भी बढ़ा हुआ है। उल्लेखनीय है कि केंद्र में भाजपा सरकार के दौरान ही उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड जैसे छोटे राज्य अस्तित्व में आए थे और अभी हाल ही में तेलंगाना अलग राज्य बनाया गया है।
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सोशल मीडिया पर चल रहे मेसेज की तरह यदि बुंदेलखंड राज्य बनाया जाता है, तो ये क्षेत्र के साथ बेइंसाफी होगी। इससे बुंदेलखंड का अस्तित्व ही मिट जाएगा। क्षेत्र के लोगों को कोई लाभ भी नहीं मिलेगा। जो हालात उप्र में रहते हुए हैं, वही इस क्षेत्र के बुंदेलखंड में रहते हुए रहेंगे। सरकार यदि ऐसा कदम उठाती है, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
- भानु सहाय, अध्यक्ष - बुंदेलखंड राज्य निर्माण मोर्चा
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सरकार की ओर से इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में वायरल मेसेज पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। अगर ऐसा होता भी है, तो ये क्षेत्र के लिए फायदेमंद नहीं रहेगा। अलग बुंदेलखंड राज्य उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जिलों को मिलाकर ही बनाया जाना चाहिए। वास्तविक बुंदेलखंड भी यही है।
- राजा बुुंदेला, उपाध्यक्ष - बुंदेलखंड विकास बोर्ड
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राज्यों की सीमाएं कागज के नक्शे पर लकीरें खींचकर तय नहीं की जाती हैं। समान भाषा, संस्कृति और भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य बनाए जाते हैं। वायरल मेसेज के अनुसार यदि सरकार राज्य बनाना चाहती है, तो इसका विरोध किया जाएगा। क्योंकि ये पूरी तरह से बेमेल है। इससे क्षेत्र को कोई लाभ नहीं होगा।

- सत्येंद्र पाल सिंह, अध्यक्ष - बुंदेलखंड क्रांति दल
आठ साल बना रहा बुंदेलखंड राज्य
बुंदेलखंड के इतिहास के जानकार मुकुंद मेहरोत्रा ने बताया कि आजादी के बाद सरकार ने 12 मार्च 1948 को पैंतीस रियासतों को मिलाकर बुंदेलखंड राज्य बनाया था। इसके आठ साल बाद राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद 31 अक्तूबर 1956 को इसे खत्म कर दिया गया। इसका कुछ हिस्सा उत्तर प्रदेश और कुछ मध्य प्रदेश में मिला दिया गया।
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