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लापरवाहीः 10 बजे आई थी पेपर लीक होने की मेल, फिर भी नहीं पकड़ सके नकल माफिया को
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Mail came due to paper leak at 10 , still could not catch copycat mafia
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन के पास सुबह 10 बजे ई-मेल पर वायरल प्रश्नपत्र आ गया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद जब शासन से पत्र आया, तब बीयू अधिकारी चेते और दोपहर डेढ़ बजे के आसपास कुलपति के पास वायरल पेपर लेकर पहुंचे। तब तक सभी परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र खुल चुके थे। यदि सभी परीक्षा केंद्रों को पेपर न खोलने का निर्देश देकर सभी जिले के स्थानीय प्रशासन की मदद लेकर जांच करा ली जाती तो वहीं आरोपी की पकड़ हो सकती थी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की वार्षिक परीक्षा के दौरान लीक हुआ हाथ से लिखा प्रश्नपत्र कई सवाल खड़े कर रहा है। यह प्रश्नपत्र होली के पहले परीक्षा केंद्रों पर पहुंचा दिए गए थे। आशंका है कि किसी परीक्षा केंद्र के स्ट्रांग रूम से लिफाफा खोलकर प्रश्नपत्र एक पन्ने पर उतार लिया गया हो। इसके बाद लिफाफा बंद कर रख दिया हो। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के पास महोबा के व्यक्ति ने सोमवार की सुबह पेपर लीक होने की सूचना के साथ-साथ वायरल प्रश्नपत्र ई-मेल कर दिया था। इसके बाद बीयू अधिकारियों ने मामले में तेजी नहीं दिखाई। मामला शासन स्तर तक पहुंच गया। जब शासन से पत्र आया तब आनन-फानन बीयू अधिकारी प्रश्नपत्र लेकर कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन के पास पहुंचे। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। सभी परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र खुल चुके थे। यदि बीयू अधिकारी पहले ही इस प्रकरण की जड़ तक पहुंचने में रुचि दिखाते तो जिस परीक्षा केंद्र से पेपर लीक हुआ है, उसकी पकड़ की जा सकती थी।
पेपर खुलने पर हट जाती सील
जिस लिफाफे में प्रश्नपत्र बंद होता है, उस पर पेपर छापने वाले प्रेस की सील और हस्ताक्षर होता है। इसके अलावा पेपर दो-तीन लिफाफे में बंद होता है। एक बार लिफाफा खुलने के बाद उसे पहले की तरह पैक नहीं किया जा सकता है। ऐसे में परीक्षा शुरू होने से पहले जांच हो जाती तो जिस केंद्र से पेपर लीक हुआ उसका पता लग सकता है।
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दो पेपर और लीक होने की रही चर्चा
बीएससी प्रथम वर्ष के केमिस्ट्री द्वितीय प्रश्नपत्र के अलावा बीएससी के ही दो अन्य पेपरों के भी लीक होने की चर्चा रही। हालांकि, बीयू अधिकारियों ने भी कहा कि उनके पास सिर्फ एक प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने की सूचना आई है।
मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। पता लगाने का पूरा प्रयास किया जाएगा कि पेपर कहां से लीक हुआ है। दोषी को कतई बख्शा नहीं जाएगा। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की वार्षिक परीक्षा के दौरान लीक हुआ हाथ से लिखा प्रश्नपत्र कई सवाल खड़े कर रहा है। यह प्रश्नपत्र होली के पहले परीक्षा केंद्रों पर पहुंचा दिए गए थे। आशंका है कि किसी परीक्षा केंद्र के स्ट्रांग रूम से लिफाफा खोलकर प्रश्नपत्र एक पन्ने पर उतार लिया गया हो। इसके बाद लिफाफा बंद कर रख दिया हो। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के पास महोबा के व्यक्ति ने सोमवार की सुबह पेपर लीक होने की सूचना के साथ-साथ वायरल प्रश्नपत्र ई-मेल कर दिया था। इसके बाद बीयू अधिकारियों ने मामले में तेजी नहीं दिखाई। मामला शासन स्तर तक पहुंच गया। जब शासन से पत्र आया तब आनन-फानन बीयू अधिकारी प्रश्नपत्र लेकर कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन के पास पहुंचे। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। सभी परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र खुल चुके थे। यदि बीयू अधिकारी पहले ही इस प्रकरण की जड़ तक पहुंचने में रुचि दिखाते तो जिस परीक्षा केंद्र से पेपर लीक हुआ है, उसकी पकड़ की जा सकती थी।
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पेपर खुलने पर हट जाती सील
जिस लिफाफे में प्रश्नपत्र बंद होता है, उस पर पेपर छापने वाले प्रेस की सील और हस्ताक्षर होता है। इसके अलावा पेपर दो-तीन लिफाफे में बंद होता है। एक बार लिफाफा खुलने के बाद उसे पहले की तरह पैक नहीं किया जा सकता है। ऐसे में परीक्षा शुरू होने से पहले जांच हो जाती तो जिस केंद्र से पेपर लीक हुआ उसका पता लग सकता है।
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दो पेपर और लीक होने की रही चर्चा
बीएससी प्रथम वर्ष के केमिस्ट्री द्वितीय प्रश्नपत्र के अलावा बीएससी के ही दो अन्य पेपरों के भी लीक होने की चर्चा रही। हालांकि, बीयू अधिकारियों ने भी कहा कि उनके पास सिर्फ एक प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने की सूचना आई है।
मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। पता लगाने का पूरा प्रयास किया जाएगा कि पेपर कहां से लीक हुआ है। दोषी को कतई बख्शा नहीं जाएगा। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।