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माइक्रो बायोलॉजी में रोजगार की अपार संभावनाएं
amarujala
Updated Sat, 31 Mar 2018 01:07 AM IST
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bu, jhansi news
- फोटो : demo
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सूक्ष्म जैविकी (माइक्रो बायोलॉजी) उन सूक्ष्म जीवों का अध्ययन है, जो एककोशकीय या सूक्ष्मदर्शीय कोशिका होते हैं। विषाणुओं को स्थायी तौर पर जीव या प्राणी नहीं कहा गया है, फिर भी इसी के अंतर्गत इनका अध्ययन होता है। सूक्ष्म जैविकी उन सजीवों का अध्ययन है जो कि नग्न आंखों से दिखाई नहीं देते। इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्र-छात्राएं अपना कॅरियर इस क्षेत्र में संवार सकते हैं। बीयू में माइक्रो बायोलॉजी से आप एमएससी और पीएचडी कर सकते हैं।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के माइक्रोलॉजी विभाग के डा. ऋषि सक्सेना बताते हैं कि जीवाणुओं की कई श्रेणियां हैं। उदाहरण के तौर पर मेडिकल बायोलॉजिस्ट मानव व जंतु रोगों में सूक्ष्म जीवाणुओं की भूमिका को जांचते हैं और इन बीमारियों की रोकथाम के तरीके खोजते हैं। एग्रीकल्चरल माइक्रोबायोलॉजिस्ट पौधों की बीमारियों में सूक्ष्म जीवाणुओं का अध्ययन करते हैं। इसी तरह इंडस्ट्रीयल माइक्रोबायोलॉजिस्ट खाद्य उत्पादों के लिए सूक्ष्म जीवाणुओं का इस्तेमाल करते हैं।
माइक्रोबायोलॉजी से पास आउट छात्र-छात्राएं रिसर्च संस्थानों की लेबोरेटरी, अस्पतालों, फूड एंड बेवरेजज इंडस्ट्रीज और फार्मास्यूटिकल्स फर्म में काम करते हैं। लैब का सेटअप प्राइवेट या सरकारी सेक्टर के मुताबिक अलग-अलग हो सकता है, लेकिन काम एक है। ताकतवर सूक्ष्म जीवाणुओं पर काम करते हुए उन्हें रिपोर्ट तैयार करनी होती है। अपनी खोज में निष्कर्ष निकालने होते हैं। कई इक्युपमेंटस व किताबों को रेफर करना होता है। ऐसे में काम करने के लिए यहां गहन अध्ययन व बेहतर विश्लेषण क्षमता जरूरी होतीं हैं।
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इन संस्थाओं में पा सकते हैं शिक्षा
- बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी
- गुरु लोकन महाविद्यालय, उरई
- जीवाजी यूनिवर्सिटी, ग्वालियर
- दिल्ली यूनिवर्सिटी
- जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी, दिल्ली
- पुणे यूनिवर्सिटी
- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर
रोजगार के लिए डिग्री धारक फार्मास्यूटिकल्स इंडस्ट्रीज, यूनिवर्सिटी, प्राइवेट अस्पताल, रिसर्च संस्थानों, पर्यावरण एजेंसियों, फूड इंडस्ट्री, केमिकल इंडस्ट्री में अपना कॅरियर बना सकते हैं। आप इन क्षेत्रों में इकोलॉजिस्ट, साइंटिस्ट, मरीन बायोलाूजिस्ट, साइंस राइटर आदि के रूप में काम कर सकते हैं।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के माइक्रोलॉजी विभाग के डा. ऋषि सक्सेना बताते हैं कि जीवाणुओं की कई श्रेणियां हैं। उदाहरण के तौर पर मेडिकल बायोलॉजिस्ट मानव व जंतु रोगों में सूक्ष्म जीवाणुओं की भूमिका को जांचते हैं और इन बीमारियों की रोकथाम के तरीके खोजते हैं। एग्रीकल्चरल माइक्रोबायोलॉजिस्ट पौधों की बीमारियों में सूक्ष्म जीवाणुओं का अध्ययन करते हैं। इसी तरह इंडस्ट्रीयल माइक्रोबायोलॉजिस्ट खाद्य उत्पादों के लिए सूक्ष्म जीवाणुओं का इस्तेमाल करते हैं।
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माइक्रोबायोलॉजी से पास आउट छात्र-छात्राएं रिसर्च संस्थानों की लेबोरेटरी, अस्पतालों, फूड एंड बेवरेजज इंडस्ट्रीज और फार्मास्यूटिकल्स फर्म में काम करते हैं। लैब का सेटअप प्राइवेट या सरकारी सेक्टर के मुताबिक अलग-अलग हो सकता है, लेकिन काम एक है। ताकतवर सूक्ष्म जीवाणुओं पर काम करते हुए उन्हें रिपोर्ट तैयार करनी होती है। अपनी खोज में निष्कर्ष निकालने होते हैं। कई इक्युपमेंटस व किताबों को रेफर करना होता है। ऐसे में काम करने के लिए यहां गहन अध्ययन व बेहतर विश्लेषण क्षमता जरूरी होतीं हैं।
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इन संस्थाओं में पा सकते हैं शिक्षा
- बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी
- गुरु लोकन महाविद्यालय, उरई
- जीवाजी यूनिवर्सिटी, ग्वालियर
- दिल्ली यूनिवर्सिटी
- जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी, दिल्ली
- पुणे यूनिवर्सिटी
- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर
रोजगार के लिए डिग्री धारक फार्मास्यूटिकल्स इंडस्ट्रीज, यूनिवर्सिटी, प्राइवेट अस्पताल, रिसर्च संस्थानों, पर्यावरण एजेंसियों, फूड इंडस्ट्री, केमिकल इंडस्ट्री में अपना कॅरियर बना सकते हैं। आप इन क्षेत्रों में इकोलॉजिस्ट, साइंटिस्ट, मरीन बायोलाूजिस्ट, साइंस राइटर आदि के रूप में काम कर सकते हैं।