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रानी की नगरी ने बापू को भी दिया प्यार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Oct 2017 12:52 AM IST
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Mahatma Gandhi JHansi News
- फोटो : demo
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रानी की नगरी ने बापू को भी दिया प्यार
झांसी।
अंग्रेजों के खिलाफ अपनी तलवार से पहली क्रांति करने वालीं रानी लक्ष्मीबाई की नगरी ने अहिंसा के दूत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी अपना भरपूर समर्थन और प्यार दिया था। बापू तीन बार झांसी आए और लोगों को अहिंसा का रास्ता अपना कर आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने यहां जनसभाएं की एवं विदेशी कपड़ों की होली जलवाई थी। रानी की नगरी उनकी कई यादों को सहेजे हुए है।
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की दीपशिखा रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद सहित कई बडे़ क्रांतिकारियों की कर्मभूमि रही झांसी से राष्ट्रपिता को खासा लगाव था। जानकी शरण वर्मा की पुस्तक कालजयी महामानव गांधी में उल्लेख है कि 1920 में पहली बार झांसी आए गांधी जी को लोगों से भरपूर समर्थन और स्नेह मिला था। उनके आह्वान पर यहां हजारों युवा स्वतंत्रता के राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पडे़ थे। उनकी सभाओं में लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते थे। उनकी बातों से प्रेरित होकर देश की आजादी के लिए युवा उनके बताए रास्ते पर चल दिए थे। इसके परिणामस्वरूप, विदेशी वस्त्रों की होली कई जगह जलने लगी थी। उन्होंने मिनर्वा चौराहा और हार्डीगंज में सभाएं की थी। नगर के पुराने शैक्षिक संस्थान सरस्वती पाठशाला इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज में ठहरकर आंदोलन की रणनीति तैयार की थी। लोगों के व्यापक समर्थन के कारण गांधी दूसरी बार 1921 में और तीसरी बार 1929 में भी झांसी आए थे।
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झांसी।
अंग्रेजों के खिलाफ अपनी तलवार से पहली क्रांति करने वालीं रानी लक्ष्मीबाई की नगरी ने अहिंसा के दूत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी अपना भरपूर समर्थन और प्यार दिया था। बापू तीन बार झांसी आए और लोगों को अहिंसा का रास्ता अपना कर आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने यहां जनसभाएं की एवं विदेशी कपड़ों की होली जलवाई थी। रानी की नगरी उनकी कई यादों को सहेजे हुए है।
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की दीपशिखा रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद सहित कई बडे़ क्रांतिकारियों की कर्मभूमि रही झांसी से राष्ट्रपिता को खासा लगाव था। जानकी शरण वर्मा की पुस्तक कालजयी महामानव गांधी में उल्लेख है कि 1920 में पहली बार झांसी आए गांधी जी को लोगों से भरपूर समर्थन और स्नेह मिला था। उनके आह्वान पर यहां हजारों युवा स्वतंत्रता के राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पडे़ थे। उनकी सभाओं में लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते थे। उनकी बातों से प्रेरित होकर देश की आजादी के लिए युवा उनके बताए रास्ते पर चल दिए थे। इसके परिणामस्वरूप, विदेशी वस्त्रों की होली कई जगह जलने लगी थी। उन्होंने मिनर्वा चौराहा और हार्डीगंज में सभाएं की थी। नगर के पुराने शैक्षिक संस्थान सरस्वती पाठशाला इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज में ठहरकर आंदोलन की रणनीति तैयार की थी। लोगों के व्यापक समर्थन के कारण गांधी दूसरी बार 1921 में और तीसरी बार 1929 में भी झांसी आए थे।
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