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बेतवा और घुरारी नदी के संगम पर किया गया था महात्मा गांधी की भस्मी का विसर्जन

Sat, 02 Oct 2021 01:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Oct 2021 01:45 AM IST
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Mahatma Gandhi's ashes were immersed at the confluence of Betwa and Ghurari rivers
ओरछा। महात्मा गांधी के अंतिम संस्कार के बाद देश की सभी बड़ी नदियों में उनकी भस्मी विसर्जित की गई थी। इसी क्रम में बुंदेलखंड में ओरछा के तुंगारण्य घाट पर बेतवा व घुरारी नदी के संगम स्थल पर बापू की भस्मी विसर्जित की गई थी। विभिन्न क्षेत्रों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बापू के दाह संस्कार के बाद कलशों में भस्मी भरकर इस आशय से दी गई थी कि इसका विसर्जन गंगा के अलावा यमुना, बेतवा, नर्मदा, मंदाकनी जैसी पवित्र नदियों में भी किया जाए। ओरछा के तुगारण्य घाट पर बापू के भस्मी विसर्जन स्थल पर उस समय एक स्मारक का भी निर्माण कराया गया था। इस स्मारक पर लगी शिला पट्टिका में लिखा है कि इस स्थान पर महात्मा गांधी के अंतिम संस्कार की भस्म विसर्जित की गई थी। पट्टिका में विसर्जन करने वाले बुंदेलखंड के कांग्रेस नेताओं के नाम भी अंकित हैं। पर, इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा बापू की जयंती पर इस स्थल पर कुछ सर्वोदयी नेताओं को छोड़कर कोई नहीं जाता है। संगम पर बने इस स्थल तक पहुंचने के लिए लोगों को पानी के बीच से निकलकर जाना पड़ता है। स्मारक भी जर्जरहाल हो चुका है, पर सरकार और उसके नुमाइंदों का इसकी ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं है।
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अफसर और नेता भूल चुके हैं बापू के भस्मी विसर्जन स्थल को
इस संबंध में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार से ताल्लुक रखने वाले उत्तरप्रदेश के पूर्व वित्तमंत्री ओमप्रकाश रिछारिया बताते हैं कि गांधी जी के निधन के बाद उनके दाह संस्कार के पश्चात उनकी भस्मी को पवित्र नदियों में विसर्जित करने के लिए भस्मी कलश तैयार किए गए थे। इसी क्रम में बुंदेलखंड की बेतवा नदी में विसर्जित करने के लिए भस्मी कलश इस क्षेत्र के कांग्रेस नेता लालाराम वाजपेयी, सुन्नूलाल नापित को सौंपा गया था। भारी संख्या में मौजूद लोगों के बीच इस कलश को बेतवा नदी के तुंगारण्य घाट के पास बेतवा और घुरारी नदी के संगम स्थल पर ले जाकर भस्मी को विसर्जित किया गया था। इसके बाद यहां स्मारक का निर्माण करके शिला पट्टिका भी लगाई गई थी। इसके बाद महात्मा गांधी की जयंती और बलिदान दिवस पर सर्वोदयी नेता व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यहां जाकर बापू को पुष्पांजलि अर्पित करते रहे, पर एक लंबे अंतराल के बाद शायद नई पीढ़ी के नेता और अफसर इस स्मारक को भूल गए। अब बापू की जयंती पर यहां सन्नाटा रहता है।
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स्मारक से युवा पीढ़ी है अब तक अनजान
भाजपा के युवा नेता रोहित यादव का कहना है कि युवा पीढ़ी महात्मा गांधी के इस स्मारक से अनजान है। इस संबंध में प्रशासनिक अफसरों व सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी इस स्मारक के बारे में जान सकें और गांधी जी की जयंती व बलिदान दिवस पर यहां पहुंचकर पुष्पांजलि दी जा सके। यादव ने कहा कि स्मारक के जीर्णोद्धार के लिए प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेजा जाएगा।
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