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पुराने दर्द पर मरहम लगा रहा पेन क्लीनिक, 200 से ज्यादा मरीज स्वस्थ
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पेन क्लीनिक मरीजों के दर्द पर मरहम लगाने में मददगार साबित हो रहा है। क्लीनिक में पेन स्पाज्म ब्रेकिंग इंजेक्शन से सालों पुराने माइग्रेन, जोड़, कमर दर्द, गठिया, मांसपेशियों में खिंचाव के दर्द को दूर किया जा चुका है। अब तक 200 से ज्यादा मरीज ठीक हो चुके हैं।
पेन क्लीनिक में मरीजों का उपचार कर रहीं डॉ. छवि सहगल ने बताया कि दो साल से संचालित शोध कार्य से पता चला है कि सेलाइन, लोकल एनेस्थी को अगर हम नसों में लगाते हैं तो मरीजों को दर्द में आराम मिलता है। रीढ़ की हड्डी से जुड़े दर्द के उपचार में 50 सालों से भी अधिक समय से इस्तेमाल होने वाले स्टेरॉयड्स की सुई के इस विकल्प की सबसे बड़ी खासियत ये है कि आपको स्टेरायॅड्स के साइड इफेक्ट से निजात दिलाता है। अब तो एक नई तकनीक पेन स्पाज्म ब्रेकिंग इंजेक्शन से इलाज हो रहा है। मरीजों की गर्दन, रीढ़ की हड्डी और कमर से निकलने वाली नसों को हाथ-पैर, कंधे या पंजे में खोज करके उसकी जगह दर्द का इंजेक्शन दिया जाता है। यह इंजेक्शन सोडियम चैनल ब्लॉकिंग तकनीक से काम करता है। इंजेक्शन से मरीज को दर्द से तुरंत राहत मिलने के बाद उसके फिजियोथैरेपी, खानपान, लाइफ स्टाइल में बदलाव और विटामिन समेत अन्य दवाई शुरू की जाती हैं। डॉ. छवि सहगल ने बताया कि झांसी में लगभग 400 मरीजों को पेन स्पाज्म ब्रेकिंग इंजेक्शन दिया गया है। इसमें 50 फीसदी मरीजों ने एक इंजेक्शन लेने के बाद राहत महसूस की। हालांकि, कुछ लोगों को दो या तीन इंजेक्शन भी दिए गए हैं। इसमें से 5-10 प्रतिशत मरीजों को ही ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई है।
दर्द की दवाएं अंगों पर असर बढ़ातीं
दर्द के लिए नियमित ली जाने वाली दवाई एसिडिटी और अंगों पर असर होने की आशंका बढ़ जाती है। इस तकनीक से मरीजों को नियमित दी जाने वाली दवाई से भी छुटकारा मिल जाता है। जल्द ही कमर दर्द से आराम के लिए स्टेरॉयड की सुई का इस्तेमाल खत्म हो सकता है। स्टेरायड की छोटी डोज की जरूरत हो सकती है।
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पेन क्लीनिक में मरीजों का उपचार कर रहीं डॉ. छवि सहगल ने बताया कि दो साल से संचालित शोध कार्य से पता चला है कि सेलाइन, लोकल एनेस्थी को अगर हम नसों में लगाते हैं तो मरीजों को दर्द में आराम मिलता है। रीढ़ की हड्डी से जुड़े दर्द के उपचार में 50 सालों से भी अधिक समय से इस्तेमाल होने वाले स्टेरॉयड्स की सुई के इस विकल्प की सबसे बड़ी खासियत ये है कि आपको स्टेरायॅड्स के साइड इफेक्ट से निजात दिलाता है। अब तो एक नई तकनीक पेन स्पाज्म ब्रेकिंग इंजेक्शन से इलाज हो रहा है। मरीजों की गर्दन, रीढ़ की हड्डी और कमर से निकलने वाली नसों को हाथ-पैर, कंधे या पंजे में खोज करके उसकी जगह दर्द का इंजेक्शन दिया जाता है। यह इंजेक्शन सोडियम चैनल ब्लॉकिंग तकनीक से काम करता है। इंजेक्शन से मरीज को दर्द से तुरंत राहत मिलने के बाद उसके फिजियोथैरेपी, खानपान, लाइफ स्टाइल में बदलाव और विटामिन समेत अन्य दवाई शुरू की जाती हैं। डॉ. छवि सहगल ने बताया कि झांसी में लगभग 400 मरीजों को पेन स्पाज्म ब्रेकिंग इंजेक्शन दिया गया है। इसमें 50 फीसदी मरीजों ने एक इंजेक्शन लेने के बाद राहत महसूस की। हालांकि, कुछ लोगों को दो या तीन इंजेक्शन भी दिए गए हैं। इसमें से 5-10 प्रतिशत मरीजों को ही ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई है।
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दर्द की दवाएं अंगों पर असर बढ़ातीं
दर्द के लिए नियमित ली जाने वाली दवाई एसिडिटी और अंगों पर असर होने की आशंका बढ़ जाती है। इस तकनीक से मरीजों को नियमित दी जाने वाली दवाई से भी छुटकारा मिल जाता है। जल्द ही कमर दर्द से आराम के लिए स्टेरॉयड की सुई का इस्तेमाल खत्म हो सकता है। स्टेरायड की छोटी डोज की जरूरत हो सकती है।
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