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प्राचीन स्वरूप में दिखेगा महाकालेश्वर मंदिर
Mon, 18 Feb 2019 12:22 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Mon, 18 Feb 2019 12:22 AM IST
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mahakaleshwar mandir jhansi
- फोटो : amarujala
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तीन शताब्दी पुराने मढ़िया महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र को पुराना स्वरूप दिया जा रहा है। जन सहयोग से इसके जीर्णोद्धार का काल चल रहा है। शिवरात्रि से पहले काम पूरा करने की तैयारी है।
सैंयर गेट बाहर मढ़िया मुहल्ले में महाकालेश्वर मंदिर का निर्माण सत्रहवीं शताब्दी में गुसाइयों द्वारा कराया गया था। यहां एक मुख्य मंदिर और बारह अन्य मंदिर समाधियां हैं। तीन साल पहले तक मंदिर परिसर में एक समुदाय के लोगों का कब्जा था। लेकिन, प्रशासन की ओर से इन्हें कांशीराम कॉलोनी में मकान आवंटित कर दिए गए, जिससे मंदिर क्षेत्र कब्जामुक्त हो गया था। छह महीने पहले राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे अपने संरक्षण में लिया। चार साल पहले ये मंदिर तब सुर्खियों में आया था, जब यहां जलाभिषेक करने आ रहे गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को कानपुर में हिरासत में ले लिया गया था।
अब मंदिर परिसर को उसका पुराना स्वरूप लौटाया जा रहा है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर जमी काई हटाई जा रही है। दीवारों की मरम्मत कर पुरानी नक्काशी बनाई जा रही है। इसके बाद रंगरोगन होगा। मंदिर के पुजारी रामेश्वर प्रसाद उपाध्याय और विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री अंचल अड़जरिया ने बताया कि ये काम जन सहयोग से हो रहा है। शिवरात्रि से पहले मंदिर अपने पुराने स्वरूप में आ जाएगा।
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सैंयर गेट बाहर मढ़िया मुहल्ले में महाकालेश्वर मंदिर का निर्माण सत्रहवीं शताब्दी में गुसाइयों द्वारा कराया गया था। यहां एक मुख्य मंदिर और बारह अन्य मंदिर समाधियां हैं। तीन साल पहले तक मंदिर परिसर में एक समुदाय के लोगों का कब्जा था। लेकिन, प्रशासन की ओर से इन्हें कांशीराम कॉलोनी में मकान आवंटित कर दिए गए, जिससे मंदिर क्षेत्र कब्जामुक्त हो गया था। छह महीने पहले राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे अपने संरक्षण में लिया। चार साल पहले ये मंदिर तब सुर्खियों में आया था, जब यहां जलाभिषेक करने आ रहे गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को कानपुर में हिरासत में ले लिया गया था।
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अब मंदिर परिसर को उसका पुराना स्वरूप लौटाया जा रहा है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर जमी काई हटाई जा रही है। दीवारों की मरम्मत कर पुरानी नक्काशी बनाई जा रही है। इसके बाद रंगरोगन होगा। मंदिर के पुजारी रामेश्वर प्रसाद उपाध्याय और विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री अंचल अड़जरिया ने बताया कि ये काम जन सहयोग से हो रहा है। शिवरात्रि से पहले मंदिर अपने पुराने स्वरूप में आ जाएगा।
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