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कब्रिस्तान में दफनाया गया मदन मोहन का शव
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Oct 2017 12:45 AM IST
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kavrr, jhansi news
- फोटो : demo
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धर्म हिंदू और जाति यादव, बावजूद मृत्यु के बाद चिता में जलकर पंचतत्व में विलीन होने की जगह ढाई गज जमीन में दफन होने की इच्छा। यहां बात हो रही है दाऊ समोसे वाले के नाम से मशहूर मदन मोहन यादव की, जिनका सोमवार को निधन हो गया और परिजनों ने उनकी इच्छा के अनुसार शव को जीवनशाह कब्रिस्तान में सुपुर्द एखाक किया। इस दौरान हिंदू - मुस्लिम समुदाय के भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।
सैंयर गेट अंदर फूटा चौपड़ा निवासी मदन मोहन यादव के पुत्र अशोक, राजेंद्र और प्रदीप यादव ने बताया कि उनके पिता हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों का बराबर सम्मान करते थे। उनकी हमेशा से ही यह इच्छा थी कि मृत्यु उपरांत उन्हें दफनाया जाए। दो दिन पहले भी उन्होंने यह अपनी इच्छा जाहिर की थी। वह यह भी कहते थे कि यदि उन्हें दफनाए जाने पर कोई एतराज करे तो इसकी फिक्र मत करना। पिता की इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें दफनाया गया। पुत्र अशोक के मुताबिक उनके पिता ईदगाह के समीप स्थित मजार पर नियमित रूप से जाते थे। वह नमाज अदा करते थे और ईद पर कुर्बानी भी देते थे। रोजा खोलने के लिए रोजेदारों के लिए वह समोसे भेजा करते थे। उन्होंने बताया कि उनकी मां शकुंतला को भी उनके दफनाए जाने से कोई एतराज नहीं है।
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सैंयर गेट अंदर फूटा चौपड़ा निवासी मदन मोहन यादव के पुत्र अशोक, राजेंद्र और प्रदीप यादव ने बताया कि उनके पिता हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों का बराबर सम्मान करते थे। उनकी हमेशा से ही यह इच्छा थी कि मृत्यु उपरांत उन्हें दफनाया जाए। दो दिन पहले भी उन्होंने यह अपनी इच्छा जाहिर की थी। वह यह भी कहते थे कि यदि उन्हें दफनाए जाने पर कोई एतराज करे तो इसकी फिक्र मत करना। पिता की इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें दफनाया गया। पुत्र अशोक के मुताबिक उनके पिता ईदगाह के समीप स्थित मजार पर नियमित रूप से जाते थे। वह नमाज अदा करते थे और ईद पर कुर्बानी भी देते थे। रोजा खोलने के लिए रोजेदारों के लिए वह समोसे भेजा करते थे। उन्होंने बताया कि उनकी मां शकुंतला को भी उनके दफनाए जाने से कोई एतराज नहीं है।
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