झांसी के युवाओं ने अपने काम से कमाया नाम, हर क्षेत्र में बनाई पहचान
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महानगर के युवाओं ने सफलता और बुलंदी के आसमान छुआ है। किसी ने खेल जगत में नाम कमाया तो किसी ने कारोबार को नया रंग दिया। तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद भी इन्होंने नौकरी करना जरूरी नहीं समझा। अपना बिजनेस शुरू कर बेरोजगारी मिटाने की तरफ कदम बढ़ा दिया। कुछ ऐसे भी हैं जो बड़ी कंपनियों का शानदार सैलरी पैकेज छोड़कर खेती में हाथ आजमा रहे हैं। झांसी के इन युवाओं ने अपने काम से अपनी एक पहचान कायम की है। ऐसे ही कुछ युवाओं से अमर उजाला ने युवा दिवस के मौके पर बात कर तैयार किया यह स्पेशल पैकेज।
टेलीविजन सीरियलों के निर्देशक हैं प्रशांत
शहर के पंचकुइयां निवासी युवा निर्देशक प्रशांत पचौरी कई टेलीविजन सीरियलों का निर्देशन कर चुके हैं। इनमें हर साख पर उल्लू बैठा है, चिड़ियाघर, बीच वाले बापू देख रहा है प्रमुख हैं। हर साख पर उल्लू बैठा है, ने प्रदेश की राजनीति पर करारा व्यंग्य किया था। इसके चलते यह सीरियल घर - घर सराहा जाने लगा। प्रशांत पचौरी का कहना है कि वह 2009 में मुंबई गए और एक साल के संघर्ष के बाद वह प्रसिद्ध डायरेक्टर अश्वनी धीर के सहायक बन गए। उनका लक्ष्य है कि वह अधिक से अधिक फिल्मों क ा निर्देशन करें।
बॉलीवुड में पहचान बन चुके हैं राज
महानगर के खाती बाबा निवासी राज शांडिल्य आज हिंदी फिल्मों और टेलीविजन शो के जाने पहचाने नाम हैं। हिट फिल्म ड्रीमगर्ल का निर्देशन करने वाले राज ने वैलकम बैक सहित कई फिल्मों के संवाद लिखे। साथ ही कामेडी सर्कस, कामेडी नाइट विद कपिल शो के बोल भी लिखे। ड्रीमगर्ल फिल्म के निर्देशक राज ने कहा कि देश प्रेम सबसे पहले है। युवा अपनी प्रतिभा से अपने- अपने क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल करें। जीवन में जब तक संघर्ष नहीं रहता है, तब तक सफलता का मजा भी नहीं मिलता है। राज शांडिल्य ने बताया कि नए साल में लक्ष्य है कि वह अच्छी से अच्छी फिल्में बनाएं। जो प्यार दर्शकों से मिला है, वह बराबर जारी रहे।

राज शांडिल्य - फोटो : REPORTERS