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झांसी में शुरू होगा किडनी ट्रांसप्लांट, पीजीआई के डॉक्टर करेंगे
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जल्द ही किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हो जाएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज और पीजीआई के बीच अनुबंध होने जा रहा है। पीजीआई के सर्जन झांसी आकर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के साथ मिलकर किडनी ट्रांसप्लांट करेंगे। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मौजूदा समय में प्रदेश के गिने-चुने अस्पतालों में ही किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा है। ज्यादातर लोग किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली की दौड़ लगाते हैं। यह प्रत्यारोपण काफी महंगा होने के कारण हर किसी के बस की बात भी नहीं होतर है। अब महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा झांसी में शुरू करने की कवायद तेज कर दी है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज और पीजीआई लखनऊ के बीच जल्द अनुबंध हो जाएगा। पीजीआई के डॉक्टर ही मेडिकल कॉलेज आकर किडनी ट्रांसप्लांट करेंगे। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया का खाका तैयार करने के लिए कमेटी का भी गठन कर दिया है। अब कमेटी ही पूरी रिपोर्ट तैयार कर प्राचार्य को सौंपेगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
अब तक सौ से ज्यादा ट्रांसप्लांट कर चुके
बुंदेलखंड में किडनी के तमाम रोगी हैं। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के अनुसार अब तक सौ से अधिक लोग अपना किडनी ट्रांसप्लांट कराकर परिजन की जान बचा चुके हैं। इसमें लगभग 65 महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी एक किडनी देकर पति को जीवनदान देने का काम किया है।
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ऐसे होता गुर्दा प्रत्यारोपण
किडनी ट्रांसप्लांट दो तरह से होता है, एक कैडेवर और दूसरा लाइव। कैडेवर का मतलब किसी ब्रेन डेड व्यक्ति की किडनी को अगर उसके परिजन दान करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। ऐसे में जिस मरीज को जरूरत होगी, उसकी किडनी बदली जा सकेगी। वहीं, लाइव ट्रांसप्लांट में मरीज के किसी परिजन की किडनी तुरंत निकालकर मरीज को लगाई जाती है। इसमें दोनों की जान को खतरा रहता है और डॉक्टरों की बड़ी टीम काम करती है।
कॉलेज में ये हैं सुविधाएं
- ट्रांसप्लांट के लिए मॉड्यूलर ओटी, आईसीयू, डायलिसिस यूनिट पूरी तरह से तैयार हैं।
- किसी भी संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट में नेफ्रोलॉजिस्ट का नहीं मिलना बड़ी परेशानी होती है लेकिन मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य ही नेफ्रोलॉजिस्ट हैं।
मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए पीजीआई के आला अधिकारियों से बात भी हो चुकी है। वहां के डॉक्टर यहां आकर किडनी ट्रांसप्लांट करने में अपना योगदान देंगे। पूरा खाका तैयार करने के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद शासन से पत्र लिखकर अनुमति ली जाएगी।
- डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज।
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मौजूदा समय में प्रदेश के गिने-चुने अस्पतालों में ही किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा है। ज्यादातर लोग किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली की दौड़ लगाते हैं। यह प्रत्यारोपण काफी महंगा होने के कारण हर किसी के बस की बात भी नहीं होतर है। अब महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा झांसी में शुरू करने की कवायद तेज कर दी है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज और पीजीआई लखनऊ के बीच जल्द अनुबंध हो जाएगा। पीजीआई के डॉक्टर ही मेडिकल कॉलेज आकर किडनी ट्रांसप्लांट करेंगे। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया का खाका तैयार करने के लिए कमेटी का भी गठन कर दिया है। अब कमेटी ही पूरी रिपोर्ट तैयार कर प्राचार्य को सौंपेगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
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अब तक सौ से ज्यादा ट्रांसप्लांट कर चुके
बुंदेलखंड में किडनी के तमाम रोगी हैं। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के अनुसार अब तक सौ से अधिक लोग अपना किडनी ट्रांसप्लांट कराकर परिजन की जान बचा चुके हैं। इसमें लगभग 65 महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी एक किडनी देकर पति को जीवनदान देने का काम किया है।
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ऐसे होता गुर्दा प्रत्यारोपण
किडनी ट्रांसप्लांट दो तरह से होता है, एक कैडेवर और दूसरा लाइव। कैडेवर का मतलब किसी ब्रेन डेड व्यक्ति की किडनी को अगर उसके परिजन दान करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। ऐसे में जिस मरीज को जरूरत होगी, उसकी किडनी बदली जा सकेगी। वहीं, लाइव ट्रांसप्लांट में मरीज के किसी परिजन की किडनी तुरंत निकालकर मरीज को लगाई जाती है। इसमें दोनों की जान को खतरा रहता है और डॉक्टरों की बड़ी टीम काम करती है।
कॉलेज में ये हैं सुविधाएं
- ट्रांसप्लांट के लिए मॉड्यूलर ओटी, आईसीयू, डायलिसिस यूनिट पूरी तरह से तैयार हैं।
- किसी भी संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट में नेफ्रोलॉजिस्ट का नहीं मिलना बड़ी परेशानी होती है लेकिन मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य ही नेफ्रोलॉजिस्ट हैं।
मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए पीजीआई के आला अधिकारियों से बात भी हो चुकी है। वहां के डॉक्टर यहां आकर किडनी ट्रांसप्लांट करने में अपना योगदान देंगे। पूरा खाका तैयार करने के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद शासन से पत्र लिखकर अनुमति ली जाएगी।
- डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज।