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बिजली विभाग नहीं दे रहा कनेक्शन, मजबूरन जुगाड़ करके जलानी पड़ रही लाइट

Tue, 28 Jul 2020 12:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2020 12:21 AM IST
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light problem in jhansi
light problem in jhansi
झांसी। महानगर की नई विकसित कई कॉलोनियों में लाखों रुपये की लागत से बने कई घरों में बिजली कनेक्शन न होने से उनकी रौनक छिनी हुई है। यहां रहने वाले कई परिवारों के लिए बिजली का कनेक्शन लेने के लिए विभाग के नियम परेशानी का कारण बन गए हैं। ऐसे में लोगों को या तो कनेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं या दूर- दूर से बल्लियों के सहारे जुगाड़ करके केबल डालकर काम चला रहे हैं। इस समस्या से 25 से अधिक कॉलोनियों व बस्तियों के हजारों लोग जूझ रहे है। लोगों की यह समस्या महानगर को स्मार्ट सिटी बनाने पर ग्रहण लगा रही है।
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दरअसल, अगर कोई बिल्डर या कॉलोनाइजर प्लाट बेचकर या फ्लैट बनाकर कॉलोनी विकसित करता है तो इस स्थिति में उस कॉलोनी को बिजली कनेक्शन तभी मिलेगा, जब बिल्डर कॉलोनी में खंभे व तार खींचकर ढांचा स्वयं तैयार करवाए और खुद का ट्रांसफार्मर लगवाएं। विद्युत विभाग अपनी इसी शर्त पर नई कॉलोनियों को कनेक्शन देता है। कनेक्शन देने की दूसरी शर्त यह है कि अगर नई बस्ती में किसी भी नए उपभोक्ता का घर पास के खंभे से चालीस मीटर दूर है तो उस स्थिति में अगर तीन उपभोक्ता एक साथ कनेक्शन लें, तभी बीच में एक खंभा लगाकर विभाग कनेक्शन देगा। विभाग की इन दोनों शर्तों की वजह से लोग कनेक्शन नहीं ले पा रहे हैं। इस कारण या तो अस्थायी कनेक्शन लेकर या कटिया डालकर दूर- दूर से लोग जुगाड़ करके केबल डालकर बिजली जला रहे हैं।
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कुछ ऐसी ही परेशानी में करगुवा जैन मंदिर के पीछे, भगवंतपुरा पानी की टंकी के पास, बाहर उनाव गेट स्थित वृंदावन लाल वर्मा कॉलोनी, पंचवटी कॉलोनी, बाहर बड़ागांव गेट शमशान घाट के निकट बाबा का अटा, तलैया बस्ती, प्रेमनगर स्थित राय कॉलोनी, महावीरनपुरा, केके पुरी समेत महानगर की 25 से अधिक कॉलोनियों और बस्तियों के लोग फंसे हुए हैं।
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- घर बनाने से पहले लोगों को बिजली कनेक्शन लेने के नियमों को ध्यान रखना चाहिए। अगर अलग-अलग लोगों से प्लाट खरीदकर मकान बनाए गए हैं तो विभाग बस्ती मानकर ऐसे लोगों को कनेक्शन दे सकता है। एक साथ तीन कनेक्शन होने पर विभाग एक खंभा व तार खींचकर कनेक्शन दे सकता है। अगर 15 कनेक्शन एक साथ लिए जाएंगे तो पांच खंभे भी लगाए जा सकते हैं। इस समस्या को लेकर वे अधिशासी अभियंता व उपखंड अधिकारी के साथ कार्य योजना तैयार कर रहे हैं, लेकिन ऐसी समस्याओं को शीघ्र समाधान निकल सके।
- एसआर गर्ग, अधीक्षण अभियंता (महानगर)।
ये हैं नियम
अगर किसी कॉलोनाइजर की ओर से विकसित किसी कालोनी के दस फीसदी उपभोक्ता एकसाथ बिजली कनेक्शन के आवेदन करेंगे तो वहां विद्युतीकरण के लिए एस्टीमेट बना दिया जाएगा। इसके साथ पचास फीसदी उपभोक्ता 35 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से पैसा जमा कर दें तो वहां विद्युतीकरण करवा दिया जाएगा और बिजली कनेक्शन भी दे दिए जाएंगे। दूसरी शर्त यह है कि खंभे से चालीस मीटर दूर है, तो सुगम योजना के तहत एकसाथ तीन लोगों के आवेदन करने पर उन्हें बिजली कनेक्शन दे दिया जाएगा। तब बीच में एक खंभा और तार भी बिजली विभाग लगाएगा। ऐसा अधिकतम पांच खंभों तक हो सकता है। मगर अधिकारी इन योजनाओं का संचालन भी नहीं करा पा रहे हैं।
दो सौ घंटे बाद भी नहीं निकला हल, अंधेरे में डेढ़ सौ परिवार
- करगुवा जैन मंदिर में खराब ट्रांसफार्मर बदलने के दौरान हटा दिए थे तार
- बिजली कार्यालय के चक्कर लगाते रहे स्थानीय लोग
झांसी। करगुवा जैन मंदिर के पीछे स्थित नई बस्ती के लोगों के घर का अंधेरा दो सौ घंटे बाद भी दूर नहीं हो सका। यहां रहने वाले परिवारों के बच्चे और बुजुर्ग गर्मी से बेहाल है। कई परिवार तो घर पर ताला डालकर रिश्तेदारों के घर चले गए हैं।
विगत 19 जुलाई को करगुवा जैन मंदिर परिसर में लगा ट्रांसफार्मर खराब हो गया था। ट्रांसफार्मर तो बदल गया, लेकिन नई बस्ती के लोगों के तारों को लाइन से हटा दिया गया था। इससे यहां रहने वाले डेढ़ सौ घरों में अंधेरा हो गया। संबंधित क्षेत्र के जेई अब दोबारा उनके तार जोड़ने को तैयार नहीं है और न ही लोगों को स्थायी या अस्थायी कनेक्शन मिल पा रहा है। इससे लोगों के लिए बिजली के बिना पल- पल काटना मुश्किल हो रहा है। लोग अपने मोबाइल तक चार्ज करने के लिए रिश्तेदारों व अन्य स्थानों पर जा रहे हैं। लोगों के घरों में पानी तक नहीं है। इस संबंध में उपखंड अधिकारी नवीन जिंदल ने बताया कि संबंधित क्षेत्र में विद्युतीकरण करने के लिए एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। एस्टीमेट स्वीकृत होने तक एक- दो दिन में लोगों को बिजली देने का वैकल्पिक रूप से इंतजाम किया जा रहा है।
बिजली के बिना एक- एक दिन काटना मुश्किल हो रहा है। गर्मी से रात भर बच्चे रोते हैं। नर्क जैसा जीवन जी रहे हैं। राजकुमारी।
बिजली विभाग ने स्थायी इंतजाम करने की जगह मनमानी कर उनके केबल हटा दिए। तीन सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जनरेटर लगाकर काम चला रहे हैं। राजीव श्रीवास्तव।
दिन तो इधर- उधर पेड़ के नीचे बैठकर गुजार लेते हैं, लेकिन अंधेरा होते ही डर लगने लगता है। समस्या कैसे सुलझेगी? समझ नहीं आ रहा है। राहुल प्रजापति।
हम सभी बस्ती के लोग बेबस हो गए हैं। न अधिकारी और न ही जेई फोन उठा रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि हम अपनी समस्या को लेकर किसके पास जाएं? गायत्री देवी।

मैंने भी किराए पर जनरेट मंगाया है। कुछ घंटे में ही चार पांच सौ का डीजल लग जाता है। जनरेटर की आवाज से अलग परेशान रहते हैं। उर्मिला देवी।
आदमी तो इधर- उधर बैठकर वक्त गुजार लेते हैं। मगर अब महिलाओं को तो घर में रहकर बिना बिजली के दम घुटने लगा है। विधायक भी आश्वासन के बाद उनकी समस्या देखने नहीं आए। उमा देवी।
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