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लाइट जा नहीं रही, फिर भी नगर निगम के जेनरेटर पी रहे 30 लीटर डीजल

Sat, 30 Oct 2021 01:51 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 30 Oct 2021 01:51 AM IST
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Light is not going, yet municipal generators are drinking 30 liters of diesel
झांसी। नगर निगम में तेल के नाम पर चलने वाला खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। निगम कार्यालय के जेनरेटर ही रोजाना करीब 30 लीटर डीजल पी रहे हैं। यह हालात तब हैं जब महज चंद मिनट के लिए लाइट जाती है। ऐसे में सिर्फ नगर निगम के जेनरेटरों में लाखों रुपये की डीजल की खपत सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं, हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अफसरों के पास इसका कोई रिकॉर्ड तक नहीं है।
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नगर निगम के पास करीब 150 वाहनों का लंबा-चौड़ा जखीरा है। इनके लिए रोजाना 2200-2500 लीटर पेट्रोल-डीजल की जरूरत होती है। हर वर्ष करीब 525 लाख रुपये सिर्फ डीजल-पेट्रोल पर ही खर्च होता है लेकिन, निगम का अपना कोई पेट्रोल पंप नहीं है। नगर निगम बाहरी पेट्रोल पंप से हर माह यह ईंधन खरीदता है। इसकी निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इसी का फायदा उठाकर डीजल एवं पेट्रोल के नाम पर गोलमाल का खेल पिछले काफी समय से चल रहा है। निगम कार्यालय के भीतर लगातार विद्युत आपूर्ति के लिए दो जनरेटर लगे हैं। सामान्यता सुबह नौ से शाम के छह बजे के बीच लाइट न के बराबर जाती है। अगर कभी चंद मिनट के लिए लाइट गई तब उसके बैकअप की खातिर सोलर पैनल लगे हैं। उनसे ही आधे-पौन घंटे तक का काम चल जाता है। तब तक जेनरेटर चलाने की नौबत नहीं आती लेकिन, इसके बावजूद जेनरेटर के लिए डीजल की पर्ची नियमित अंतराल पर लगातार जारी होती है। सूत्रों का कहना है रोजाना करीब 30 लीटर की पर्ची जारी होती हैं। दो माह पहले इसकी निगरानी के लिए सेवानिवृत्त सैन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। उस दौरान उनकी निगरानी में ही डीजल की पर्ची निर्गत होती थी लेकिन, यह व्यवस्था भी खत्म हो चुकी। वहीं, निगम के जिम्मेदार अफसरों के पास इस तरह से खर्च होने वाले डीजल का कोई भी हिसाब-किताब नहीं है। प्रभारी अधिकारी डा.विनीत कुमार तक इस डीजल के खर्च के बारे में कुछ नहीं बता सके।
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लॉकबुक में इसका हिसाब रखा जाता है लेकिन, रोजाना तीस लीटर खर्च कैसे हो रहा है, इसकी जांच कराई जाएगी।
शादाब असलम, प्रभारी नगर आयुक्त
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