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दहेज हत्या में पति, ससुर एवं सास को आजीवन कारावास
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झांसी। अपर सत्र न्यायालय ने दहेज हत्या के एक मामले में पति, ससुर एवं सास को दोषी करार देते हुए तीनों को आजीवन कारावास सुनाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल ने बताया कि थाना ककरबई के ग्राम देवरी निवासी पतंगी लाल के पुत्र रामकुमार उर्फ रामू से उरई निवासी संगीता की शादी हुई थी। विवाह के बाद से ही ससुराल में संगीता को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। पति रामकुमार समेत ससुर पतंगीलाल एवं सास पानकुंवर मिलकर संगीता को मारते-पीटते थे। कई बार संगीता ने अपने माता-पिता को इसके बारे में बताया। एफआईआर के मुताबिक 25 मार्च 2014 सुबह छह बजे ससुराल के लोगों ने संगीता पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया। संगीता की मौत के बाद भी ससुराल पक्ष के लोग शव लेने नहीं आए। मायके पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने रामकुमार, पतंगीलाल, पानकुंवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
विवेचना के बाद पुलिस ने रामकुमार, पतंगीलाल एवं पानकुंवर के खिलाफ चार्जशीट फाइल की। लंबी सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ओमवीर ने तीनों को धारा 304 बी के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। धारा 498 ए के तहत तीनों को तीन-तीन वर्ष कारावास, 10 हजार रुपये का अर्थदंड एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम धारा तीन के तहत पांच-पांच वर्ष की सजा सुनाई। यह सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल ने बताया कि थाना ककरबई के ग्राम देवरी निवासी पतंगी लाल के पुत्र रामकुमार उर्फ रामू से उरई निवासी संगीता की शादी हुई थी। विवाह के बाद से ही ससुराल में संगीता को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। पति रामकुमार समेत ससुर पतंगीलाल एवं सास पानकुंवर मिलकर संगीता को मारते-पीटते थे। कई बार संगीता ने अपने माता-पिता को इसके बारे में बताया। एफआईआर के मुताबिक 25 मार्च 2014 सुबह छह बजे ससुराल के लोगों ने संगीता पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया। संगीता की मौत के बाद भी ससुराल पक्ष के लोग शव लेने नहीं आए। मायके पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने रामकुमार, पतंगीलाल, पानकुंवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
विवेचना के बाद पुलिस ने रामकुमार, पतंगीलाल एवं पानकुंवर के खिलाफ चार्जशीट फाइल की। लंबी सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ओमवीर ने तीनों को धारा 304 बी के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। धारा 498 ए के तहत तीनों को तीन-तीन वर्ष कारावास, 10 हजार रुपये का अर्थदंड एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम धारा तीन के तहत पांच-पांच वर्ष की सजा सुनाई। यह सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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