{"_id":"5d9263c98ebc3e93a76ff6a8","slug":"life-imprisonment-in-murder-jhansi-news-jhs1492933155","type":"story","status":"publish","title_hn":"हत्या में पिता पुत्र समेत तीन को आजीवन कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हत्या में पिता पुत्र समेत तीन को आजीवन कारावास
विज्ञापन
life imprisonment in murder
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हत्या मेें पिता - पुत्र समेत तीन को आजीवन कारावास
झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या पांच अभय श्रीवास्तव की अदालत में हत्या के मामले में दोष सिद्ध होने पर पिता-पुत्र समेत तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भान प्रकाश सिरवैया ने बताया कि रौनीजा गांव निवासी हरिओम सिंह ने तहरीर देते हुए बताया था कि उसके भाई चंद्रभान ने 25 दिसंबर 2012 को गांव के ही जगदीश आदि को फसल में पानी लगाने के लिये इंजन किराये पर दिया था। 31 दिसंबर 2012 को चंद्रभान इंजन लेने गया और किराए के पैसे मांगे। जिस पर सूरज पुत्र जगदीश, जगदीश पुत्र मज्जू, अनिल पुत्र मातादीन अहिरवार, मातादीन पुत्र तुलई ने रुपये देने से मना कर दिया। दूसरे दिन एक जनवरी 2013 की शाम हरिओम सिंह के साथ उसका भाई चंद्रभान सिंह, भतीजा सुरेंद्र इंजन लेने के लिए बैलगाड़ी लेकर खेत पर पहुंचे तथा इंजन उठाकर बैलगाड़ी से चलने लगे। इसी दौरान जगदीश, सूरज, अनिल व मातादीन आ गए और किराए के पैसे मांगने पर धमकाने लगे। गुंडागर्दी करने से मना करने पर चारों ने एक राय होकर कट्टों से फायरिंग शुरू कर दी। चंद्रभान को गोली लगने पर वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जबकि, हरिओम व भतीजा सुरेंद्र बाल-बाल बच गए। चीखपुकार व गोली की आवाज सुनकर लोगों को आता देख चारों हमलावर फायरिंग करते हुए भाग गए। चंद्रभान को खेत से थाना सीपरी बाजार और फिर थाने से जिला चिकित्सालय लाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। जहां चिकित्सक ने चंद्रभान को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने चारों अभियुक्तों के विरूद्ध मामला दर्ज कर विवेचना बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। सोमवार को प्रस्तुत साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त अनिल अहिरवार, मातादीन अहिरवार व जगदीश अहिरवार को धारा 302/34 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही बीस - बीस हजार रुपये अर्थदंड लगाया, जिसके अदा न करने पर एक-एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। वहीं, अनिल अहिरवार को धारा 25 आर्म्स एक्ट में तीन वर्ष के सश्रम कारावास, एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह के अतिररिक्त कारावास की सजा सुनाई गई।
विज्ञापन
झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या पांच अभय श्रीवास्तव की अदालत में हत्या के मामले में दोष सिद्ध होने पर पिता-पुत्र समेत तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भान प्रकाश सिरवैया ने बताया कि रौनीजा गांव निवासी हरिओम सिंह ने तहरीर देते हुए बताया था कि उसके भाई चंद्रभान ने 25 दिसंबर 2012 को गांव के ही जगदीश आदि को फसल में पानी लगाने के लिये इंजन किराये पर दिया था। 31 दिसंबर 2012 को चंद्रभान इंजन लेने गया और किराए के पैसे मांगे। जिस पर सूरज पुत्र जगदीश, जगदीश पुत्र मज्जू, अनिल पुत्र मातादीन अहिरवार, मातादीन पुत्र तुलई ने रुपये देने से मना कर दिया। दूसरे दिन एक जनवरी 2013 की शाम हरिओम सिंह के साथ उसका भाई चंद्रभान सिंह, भतीजा सुरेंद्र इंजन लेने के लिए बैलगाड़ी लेकर खेत पर पहुंचे तथा इंजन उठाकर बैलगाड़ी से चलने लगे। इसी दौरान जगदीश, सूरज, अनिल व मातादीन आ गए और किराए के पैसे मांगने पर धमकाने लगे। गुंडागर्दी करने से मना करने पर चारों ने एक राय होकर कट्टों से फायरिंग शुरू कर दी। चंद्रभान को गोली लगने पर वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जबकि, हरिओम व भतीजा सुरेंद्र बाल-बाल बच गए। चीखपुकार व गोली की आवाज सुनकर लोगों को आता देख चारों हमलावर फायरिंग करते हुए भाग गए। चंद्रभान को खेत से थाना सीपरी बाजार और फिर थाने से जिला चिकित्सालय लाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। जहां चिकित्सक ने चंद्रभान को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने चारों अभियुक्तों के विरूद्ध मामला दर्ज कर विवेचना बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। सोमवार को प्रस्तुत साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त अनिल अहिरवार, मातादीन अहिरवार व जगदीश अहिरवार को धारा 302/34 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही बीस - बीस हजार रुपये अर्थदंड लगाया, जिसके अदा न करने पर एक-एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। वहीं, अनिल अहिरवार को धारा 25 आर्म्स एक्ट में तीन वर्ष के सश्रम कारावास, एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह के अतिररिक्त कारावास की सजा सुनाई गई।
विज्ञापन