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युवक को जिंदा जलाने पर दो को आजीवन कारावास
ब्यूरो
Updated Tue, 15 Dec 2015 01:38 AM IST
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झांसी। युवक को जिंदा जला कर मारने के मामले में दोषी पाये जाने पर अदालत ने दो लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। घटना के बाद पुलिस ने पीड़ित परिवार की मदद नहीं की थी, बाद में एसएसपी के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
थाना बरुआसागर क्षेत्र के ग्राम वनगुवां निवासी कमलेश ने 14 जुलाई 2014 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि गांव का ही डालचंद उसके भाई अरविंद को तीन जुलाई को रात आठ बजे घर से बुला कर ले गया था। करीब एक घंटे बाद अरविंद के चीखने की आवाजें आईं, जिसे सुन कर अरविंद की पत्नी मुस्कान व पिता दौड़ कर उसके पास पहुंचे।
वहां उन्होंने देखा कि अरविंद आग में जल रहा है। दोनों ने उसके शरीर में लगी आग को बुझाया और उपचार के लिए मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। अरविंद ने उन्हें बताया था कि डालचंद ने उसे पकड़ा और गांव के ही सरजू ने उस पर तेल डालकर आग लगा दी थी।
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कमलेश ने मामले की शिकायत थाना पुलिस से की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। तत्कालीन एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दो शकील अहमद खां की अदालत ने साक्ष्यों और बयानों के आधार पर डालचंद और सरजू को दोषी पाया।
उन्होंने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर छह-छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मी चंद्र जैन ने पैरवी की।
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थाना बरुआसागर क्षेत्र के ग्राम वनगुवां निवासी कमलेश ने 14 जुलाई 2014 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि गांव का ही डालचंद उसके भाई अरविंद को तीन जुलाई को रात आठ बजे घर से बुला कर ले गया था। करीब एक घंटे बाद अरविंद के चीखने की आवाजें आईं, जिसे सुन कर अरविंद की पत्नी मुस्कान व पिता दौड़ कर उसके पास पहुंचे।
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वहां उन्होंने देखा कि अरविंद आग में जल रहा है। दोनों ने उसके शरीर में लगी आग को बुझाया और उपचार के लिए मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। अरविंद ने उन्हें बताया था कि डालचंद ने उसे पकड़ा और गांव के ही सरजू ने उस पर तेल डालकर आग लगा दी थी।
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कमलेश ने मामले की शिकायत थाना पुलिस से की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। तत्कालीन एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दो शकील अहमद खां की अदालत ने साक्ष्यों और बयानों के आधार पर डालचंद और सरजू को दोषी पाया।
उन्होंने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर छह-छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मी चंद्र जैन ने पैरवी की।