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पांच साल के बालक के हत्यारोपी को आजीवन कारावास
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झांसी। बबीना के सरवां गांव में पांच साल के प्रिंस की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश अविनाश कुमार सिंह ने आरोपी सुनील बरार को आजीवन कारावास समेत 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। हत्यारोपी ने बालक के पिता से विवाद के बाद बदला चुकाने के इरादे से उसकी हत्या कर दी और शव अपने घर के पास की झाड़ियों में फेंक दिया।
विशेष लोक अभियोजक संजय पांडेय ने बताया कि 9 अगस्त 2017 को सरवां गांव निवासी बद्री प्रसाद वंशकार का पांच साल का बेटा प्रिंस घर के सामने खेलते समय लापता हो गया। परिजनों ने बबीना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। दूसरे दिन उसका शव पड़ोस में रहने वाले सुनील बरार पुत्र शिवदयाल बरार के घर के पास झाड़ियों से बरामद हुआ। पुलिस पड़ताल में सुनील बरार का नाम सामने आया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके मुताबिक सुनील और बद्रीप्रसाद एक साथ पानी की टंकी बनाने का काम करते थे। दोनों के बीच विवाद हो गया था। इसके बाद सुनील को काम मिलना बंद हो गया। इसको लेकर सुनील ने बद्रीप्रसाद से दुश्मनी मान ली। बद्रीप्रसाद को सबक सिखाने की गरज से उसने उसके पुत्र प्रिंस की हत्या कर दी। सुबूत एवं गवाहों को देखते हुए अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनील पर लगे आरोपोें को सही पाते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा आईपीसी की धारा 363, 364 समेत का भी उसे दोषी पाया गया। अदालत ने इन सभी में जुर्माना भी लगाया है। यह सभी सजा एक साथ चलेंगी।
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विशेष लोक अभियोजक संजय पांडेय ने बताया कि 9 अगस्त 2017 को सरवां गांव निवासी बद्री प्रसाद वंशकार का पांच साल का बेटा प्रिंस घर के सामने खेलते समय लापता हो गया। परिजनों ने बबीना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। दूसरे दिन उसका शव पड़ोस में रहने वाले सुनील बरार पुत्र शिवदयाल बरार के घर के पास झाड़ियों से बरामद हुआ। पुलिस पड़ताल में सुनील बरार का नाम सामने आया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके मुताबिक सुनील और बद्रीप्रसाद एक साथ पानी की टंकी बनाने का काम करते थे। दोनों के बीच विवाद हो गया था। इसके बाद सुनील को काम मिलना बंद हो गया। इसको लेकर सुनील ने बद्रीप्रसाद से दुश्मनी मान ली। बद्रीप्रसाद को सबक सिखाने की गरज से उसने उसके पुत्र प्रिंस की हत्या कर दी। सुबूत एवं गवाहों को देखते हुए अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनील पर लगे आरोपोें को सही पाते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा आईपीसी की धारा 363, 364 समेत का भी उसे दोषी पाया गया। अदालत ने इन सभी में जुर्माना भी लगाया है। यह सभी सजा एक साथ चलेंगी।
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