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स्कूल की छुट्टी से पहले पता चलेगा बच्चों ने मिड डे मील खाया या नहीं

Sat, 04 Mar 2017 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 04 Mar 2017 12:20 AM IST
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Leave school before the mid-day meal eaten by the children will know whether or not
स्कूल की छुट्टी से पहले पता चलेगा बच्चों ने मिड डे मील खाया या नहीं - फोटो : demo
नई दिल्ली। आधार कार्ड के माध्यम से गुणवत्ता व पारदर्शिता लाने के साथ-साथ अब सरकार मिड-डे मील की पूरी निगरानी भी होगी। देश के किस इलाके के किस स्कूल में कितने बच्चों ने मिड-डे मील खाया, क्या खाया और कितने बजे खाया इसकी पूरी रिपोर्ट स्कूल की छुट्टी से पहले केंद्र सरकार को मिल जाया करेगी। सरकार देशभर के सभी बच्चों को समय से मिड-डे मील मुहैया कराने के लिए प्रतिदिन ऑनलाइन निगरानी करेगी। मंत्रालय और एनआईसी के विशेषज्ञ खाका तैयार कर रहे हैं। सरकार जुलाई से इस योजना को शुरू करने की तैयारी में है। हालांकि आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भी सरकार को सोचना होगा।
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सूत्रों के मुताबिक, देशभर के सभी बच्चों को समय से मिड-डे मील मिले इसकी कोशिश जारी है। हालांकि स्कूल राज्य सरकारों के अधीन आते हैं और इनकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को तीन या छह महीने के आधार पर मिलती है। उस रिपोर्ट में भी हर स्कूल की जानकारी नहीं होती है। इसी वजह से मंत्रालय मिड-डे मील की प्रतिदिन ऑनलाइन निगरानी करने जा रहा है। बता दें कि देशभर में 11.51 लाख शिक्षण संस्थानों में 10.13 करोड़ छात्र मिड-डे मील का लाभ उठाते हैं।
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इंटीग्रेडिट वाइस रिस्पॉस सिस्टम से होगी निगरानी
- सरकार ने ऑनलाइन निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड वाइस रिस्पॉस सिस्टम बनाया है। इसमें सभी उपलब्ध कराए गए आधार नंबर जोड़े जाएंगे। यह सिस्टम एनआईसी (नेशनल इंफोरमेटिक्स सेंटर) के सर्वर से जुड़ा होगा, जिसमें देशभर के शैक्षणिक संस्थानों के प्रभारियों (हेडमास्टर, प्रिंसिपल या सीनियर टीचर) के मोबाइल नंबर भी जोड़े गए हैं। इंटीग्रेटेड वाइस रिस्पॉस सिस्टम से ऑटोमेटिक कॉल जनरेट होगी और सीधे स्कूल प्रभारी के मोबाइल पर जाएगी। इस कॉल में करीब चार या पांच स्तर के सवाल होंगे। पहला कितने बच्चों ने खाना खाया या नहीं खाया? खाना बना, लेट बना या फिर क्यों नहीं बना? खाना बनाने के लिए सामान था या नहीं, खाने बनाने वाली आया थी या नहीं। साथ ही बच्चों ने क्या खाना खाया के बारे में भी जानकारी देनी होगी। इस ऑटोमेटिक काल जनरेट में स्कूल प्रभारी को मोबाइल एसएमस की तर्ज पर जानकारी देनी होगी।
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नहीं हो सकेगी धांधली
- अक्सर मिड-डे मील में धांधली की शिकायतें सामने आती रहती हैं, लेकिन इस नई योजना के बाद राज्य सरकार या प्रशासन धांधली नही कर सकेगा। सरकार प्रतिदिन यह जांच करवाएगी कि बच्चों को खाना मिल रहा है या नहीं? जब बच्चों तक खाना नहीं पहुंचेगा तो सरकार संबंधित राज्य सरकारों से सवाल कर सकती है कि आखिर बच्चों को खाना क्यों नहीं मिल रहा है।
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