{"_id":"5cbf6d0fbdec2213e273124a","slug":"laxmi-talab-ki-safai-ka-kam","type":"story","status":"publish","title_hn":"लक्ष्मी तालाब: वक्त कम, काम ज्यादा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लक्ष्मी तालाब: वक्त कम, काम ज्यादा
Wed, 24 Apr 2019 01:22 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
jhansi
Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Wed, 24 Apr 2019 01:22 AM IST
विज्ञापन
laxmi talab jhansi
- फोटो : amarujala
लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम 70 फीसदी पूरा हो गया है। जल निगम के पास अभी दो महीने का वक्त और है, अगर इस अवधि में काम पूरा नहीं हुआ तो बरसात शुरू हो जाएगी। बरसात होने पर तालाब दोबारा पानी से भर जाएगा और विभाग की ज्यादातर मेहनत बेकार हो जाएगी। सफाई में लगा पैसा भी बेकार हो जाएगा। जबकि, जलनिगम अधिकारी इसे चुनौती नहीं मान रहे हैं और वह दो महीने को पर्याप्त मानकर बेफिक्र हैं। वह 15 मई तक काम खत्म करने का दावा कर रहे हैं। वहीं, सफाई का भुगतान न होने से ठेकेदारों में नाराजगी है और वह काम बंद करने के मूड में हैं।
लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम अप्रैल 2018 में शुरू किया गया था। तीन महीने में दस फीसदी सफाई का काम काम पूरा हुआ, लेकिन बारिश होने लगी। स्थिति जहां की तहां हो गई और पैसा भी बेकार चला गया। अक्तूबर 2018 से दोबारा लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम शुरू किया गया। जिओ मिलर कंपनी के साथ पांच ठेकेदार सफाई का काम कर रहे हैं। जल निगम ने फरवरी तक काम पूरा होने की लक्ष्य बनाया था, लेकिन कार्य में आए व्यवधानों के चलते पूरा नहीं हो सका। अब 15 मई तक काम पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया। मगर अभी 70 फीसदी ही काम पूरा हो सका है। अभी तालाब के चारों तरफ छह मीटर की सतह बनाने के बाद उस पर पाथवे बनाने और कई किनारों पर मिट्टी हटाने का काम बाकी है। काम को देखकर लगता है कि अभी दो महीने से अधिक का वक्त लग सकता है, लेकिन अधिकारी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वह तय वक्त में काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं। वहीं, ठेकेदारों का कहना है कि उनका 50 लाख रुपये का भुगतान लटका चल रहा है। अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो उनको काम बंद करना पड़ेगा।
मालूम हो कि, लक्ष्मी तालाब की सफाई पर छह करोड़ रुपये खर्च होेने हैं, इसमें जिओ मिलर कंपनी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का ठेका कुल 34 करोड़ रुपये में मिला है। इसमें से पांच प्रतिशत हिस्सा सफाई मद में खर्च करना है। ढाई लाख क्यूबिक मीटर सफाई होनी है। कंपनी ने 29 मई 2018 से सफाई शुरू कर दस जुलाई तक दो हजार क्यूबिक मीटर की सफाई कर दी थी। इसमें दस लाख रुपये से अधिक खर्च हो गए थे। बरसात के पानी से फिर तालाब भर गया और स्थिति जस की तस हो गई थी।
विज्ञापन
‘अधिकांश सफाई का काम पूरा हो चुका है। तालाब के चारों तरफ छह मीटर ऊंचा पाथवे बनना है, जिसका काम शुरू हो गया है। 15 मई तक सफाई और पाथवे बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। ठेकेदारों का बराबर भुगतान किया जा रहा है। अभी कुछ ठेेकेदार बेतरतीब काम कर रहे हैं। इस वजह से कुछ भुगतान बाकी है। काम ठीक होते ही वह भी भुगतान कर दिया जाएगा।’
राजेश कुमार, मुख्य अभियंता जल निगम।
यह भी जानिए
नारायण बाग के पास स्थित लक्ष्मी ताल को सुंदर बनाने पर 54 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें साठ फीसदी पैसा (32.50 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार व चालीस फीसदी (21.50 करोड़ रुपये) राज्य सरकार को देना है। योजना 2015 में शुरू हुई थी, जिसमें 25 करोड़ रुपये का बजट अभी तक मिल चुका है। दिल्ली की जिओ मिलर कंपनी को 34 करोड़ रुपये का ठेका जल शोधन वाटर टैंक (एसटीपी) व अन्य निर्माण काम के लिए दिया गया है।
विज्ञापन
लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम अप्रैल 2018 में शुरू किया गया था। तीन महीने में दस फीसदी सफाई का काम काम पूरा हुआ, लेकिन बारिश होने लगी। स्थिति जहां की तहां हो गई और पैसा भी बेकार चला गया। अक्तूबर 2018 से दोबारा लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम शुरू किया गया। जिओ मिलर कंपनी के साथ पांच ठेकेदार सफाई का काम कर रहे हैं। जल निगम ने फरवरी तक काम पूरा होने की लक्ष्य बनाया था, लेकिन कार्य में आए व्यवधानों के चलते पूरा नहीं हो सका। अब 15 मई तक काम पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया। मगर अभी 70 फीसदी ही काम पूरा हो सका है। अभी तालाब के चारों तरफ छह मीटर की सतह बनाने के बाद उस पर पाथवे बनाने और कई किनारों पर मिट्टी हटाने का काम बाकी है। काम को देखकर लगता है कि अभी दो महीने से अधिक का वक्त लग सकता है, लेकिन अधिकारी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वह तय वक्त में काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं। वहीं, ठेकेदारों का कहना है कि उनका 50 लाख रुपये का भुगतान लटका चल रहा है। अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो उनको काम बंद करना पड़ेगा।
विज्ञापन
मालूम हो कि, लक्ष्मी तालाब की सफाई पर छह करोड़ रुपये खर्च होेने हैं, इसमें जिओ मिलर कंपनी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का ठेका कुल 34 करोड़ रुपये में मिला है। इसमें से पांच प्रतिशत हिस्सा सफाई मद में खर्च करना है। ढाई लाख क्यूबिक मीटर सफाई होनी है। कंपनी ने 29 मई 2018 से सफाई शुरू कर दस जुलाई तक दो हजार क्यूबिक मीटर की सफाई कर दी थी। इसमें दस लाख रुपये से अधिक खर्च हो गए थे। बरसात के पानी से फिर तालाब भर गया और स्थिति जस की तस हो गई थी।
विज्ञापन
‘अधिकांश सफाई का काम पूरा हो चुका है। तालाब के चारों तरफ छह मीटर ऊंचा पाथवे बनना है, जिसका काम शुरू हो गया है। 15 मई तक सफाई और पाथवे बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। ठेकेदारों का बराबर भुगतान किया जा रहा है। अभी कुछ ठेेकेदार बेतरतीब काम कर रहे हैं। इस वजह से कुछ भुगतान बाकी है। काम ठीक होते ही वह भी भुगतान कर दिया जाएगा।’
राजेश कुमार, मुख्य अभियंता जल निगम।
यह भी जानिए
नारायण बाग के पास स्थित लक्ष्मी ताल को सुंदर बनाने पर 54 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें साठ फीसदी पैसा (32.50 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार व चालीस फीसदी (21.50 करोड़ रुपये) राज्य सरकार को देना है। योजना 2015 में शुरू हुई थी, जिसमें 25 करोड़ रुपये का बजट अभी तक मिल चुका है। दिल्ली की जिओ मिलर कंपनी को 34 करोड़ रुपये का ठेका जल शोधन वाटर टैंक (एसटीपी) व अन्य निर्माण काम के लिए दिया गया है।