{"_id":"6355858970644c3ea3615019","slug":"laxmi-return-after-10-years-jhansi-news-jhs231531596","type":"story","status":"publish","title_hn":"दस साल पहले खोई ‘लक्ष्मी’ दिवाली पर मिली.. नहीं रुके ‘राधा’ के आंसू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दस साल पहले खोई ‘लक्ष्मी’ दिवाली पर मिली.. नहीं रुके ‘राधा’ के आंसू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। कहते हैं दिवाली पर लक्ष्मी मिल जाए तो क्या कहना...और यह लक्ष्मी 10 साल पहले लापता हुई किसी की बेटी हो तो परिवार की झोली तो त्योहार पर खुशियों से भर जाएगी। ऐसा ही मामला झांसी के लहचूरा थाना पुलिस के सामने आया। पुलिस ने बपसी गांव सिद्धार्थ नगर के थाना मिसरौली इलाके से 10 साल पहले लापता हुई एक बेटी लक्ष्मी को रविवार को सूरत से आई उसकी मां राधा और भाई कन्हैया के सुपुर्द किया तो लक्ष्मी को देखकर उनके आंसू नहीं थमे, परिवार गले मिलकर खूब रोया। मां ने बताया कि लक्ष्मी जब लापता हुई थी तब वह मात्र 11 साल की थी।
बपसी गांव सिद्धार्थ नगर के थाना मिसरौली इलाके में एक परिवार रहता था। दस साल पहले उनकी 11 साल की बेटी लक्ष्मी घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक लापता हो गई थी। पिता संतराम और मां राधा ने बेटी को ढूंढने में दिन-रात एक कर दिया लेकिन बेटी नहीं मिली। उसका कहीं पता नहीं लगा तो पिता ने थाने में बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज करा दी। लेकिन दिन-महीने-साल गुजरते रहे और परिवार बेटी को याद करके रोता रहा। मां हर होली-दिवाली दुआ मनाती थी कि उनकी प्यारी बिटिया जहां भी हो सलामत रहे। कोई जरा भी कहता है कि अब बिटिया कहां मिलेगी..तो राधा उससे कहती थी कि एक दिन उसकी बिटिया जरूर मिलेगी। इस बात को जब सात-आठ साल गुजर गए तो गांव के लोग लक्ष्मी को भूलने लगे लेकिन परिवार इसी आस में था कि लक्ष्मी एक दिन जरूरी लौटेगी।
उधर, दो-तीन दिन पहले जिला झांसी में लहचूरा थाने के प्रभारी निरीक्षक अमरनाथ त्योहार के चलते गश्त कर रहे थे। तभी उन्हें एक युवती बाजार में मिली। वह रो रही थी। इस कारण से उन्होंने युवती से रोने का कारण पूछा लेकिन वह कुछ नहीं बता पाई। उससे बातचीत करने की कोशिश में लगा कि युवती की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे वह महिला पुलिस के साथ युवती को थाने ले गए। वहां उसे खाना खिलाया। थाने में महिला पुलिस ने युवती की देखभाल करते हुए उससे उसके बारे में पूछा तो उसने अपने गांव का नाम बपसी बताया। महिला पुलिस को उसने अपने हाथ पर लिखा नाम दिखाया तो पता चला कि उसका नाम लक्ष्मी है। इसके अलावा वह कुछ नहीं बता सकी।
विज्ञापन
युवती से मिली इस जानकारी के बाद प्रभारी निरीक्षक अमरनाथ ने गूगल पर बपसी गांव सर्च किया। इसके बाद सी-प्लान एप पर जानकारी व युवती की फोटो शेयर की तो कुछ घंटे बाद ही सिद्धार्थ नगर से बपसी गांव के प्रधान ने संपर्क किया। पड़ताल में पता चला कि बपसी गांव सिद्धार्थ नगर के थाना मिसरौली इलाके में है। पुलिस ने फोन पर ग्राम प्रधान से संपर्क साधा। उन्होंने बताया कि युवती गांव के संतराम की बेटी है। इन दिनों उसके परिजन सूरत में रह रहे हैं। इस पर पुलिस ने नंबर लेकर मोबाइल के जरिये युवती के परिजनों से संपर्क किया। परिजनों ने पुलिस को बताया कि लक्ष्मी 10 साल पहले लापता हो गई थी।
उधर, रविवार की सुबह युवती की मां और भाई उसे लेने सूरत से झांसी आए। पुलिस ने युवती को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इस पर परिजनों ने पुलिस का खूब आभार जताया। इस दौरान तीनों लोग गले मिलकर खूब रोए, मां राधा के तो आंसू ही नहीं रुके। वह बार-बार पुलिस को धन्यवाद देती रहीं।
लापता होने के बाद लक्ष्मी कहां रही, बता नहीं पा रही...
पुलिस के अनुसार लापता होने के बाद लक्ष्मी कहां रही और कैसे लापता हुई, अभी वह ठीक से बता नहीं पा रही है। बताया जा रहा है कि उसकी मानसिक स्थिति सही नहीं है। उधर, परिवार के अनुसार वह लोग बेटी का इलाज करवाएंगे। परिवार से मिली लक्ष्मी खुशी-खुशी अपने घर चली गई। मां ने कहा कि अब 10 साल बाद बेटी के साथ दिवाली मनाएंगे।
विज्ञापन
बपसी गांव सिद्धार्थ नगर के थाना मिसरौली इलाके में एक परिवार रहता था। दस साल पहले उनकी 11 साल की बेटी लक्ष्मी घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक लापता हो गई थी। पिता संतराम और मां राधा ने बेटी को ढूंढने में दिन-रात एक कर दिया लेकिन बेटी नहीं मिली। उसका कहीं पता नहीं लगा तो पिता ने थाने में बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज करा दी। लेकिन दिन-महीने-साल गुजरते रहे और परिवार बेटी को याद करके रोता रहा। मां हर होली-दिवाली दुआ मनाती थी कि उनकी प्यारी बिटिया जहां भी हो सलामत रहे। कोई जरा भी कहता है कि अब बिटिया कहां मिलेगी..तो राधा उससे कहती थी कि एक दिन उसकी बिटिया जरूर मिलेगी। इस बात को जब सात-आठ साल गुजर गए तो गांव के लोग लक्ष्मी को भूलने लगे लेकिन परिवार इसी आस में था कि लक्ष्मी एक दिन जरूरी लौटेगी।
विज्ञापन
उधर, दो-तीन दिन पहले जिला झांसी में लहचूरा थाने के प्रभारी निरीक्षक अमरनाथ त्योहार के चलते गश्त कर रहे थे। तभी उन्हें एक युवती बाजार में मिली। वह रो रही थी। इस कारण से उन्होंने युवती से रोने का कारण पूछा लेकिन वह कुछ नहीं बता पाई। उससे बातचीत करने की कोशिश में लगा कि युवती की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे वह महिला पुलिस के साथ युवती को थाने ले गए। वहां उसे खाना खिलाया। थाने में महिला पुलिस ने युवती की देखभाल करते हुए उससे उसके बारे में पूछा तो उसने अपने गांव का नाम बपसी बताया। महिला पुलिस को उसने अपने हाथ पर लिखा नाम दिखाया तो पता चला कि उसका नाम लक्ष्मी है। इसके अलावा वह कुछ नहीं बता सकी।
विज्ञापन
युवती से मिली इस जानकारी के बाद प्रभारी निरीक्षक अमरनाथ ने गूगल पर बपसी गांव सर्च किया। इसके बाद सी-प्लान एप पर जानकारी व युवती की फोटो शेयर की तो कुछ घंटे बाद ही सिद्धार्थ नगर से बपसी गांव के प्रधान ने संपर्क किया। पड़ताल में पता चला कि बपसी गांव सिद्धार्थ नगर के थाना मिसरौली इलाके में है। पुलिस ने फोन पर ग्राम प्रधान से संपर्क साधा। उन्होंने बताया कि युवती गांव के संतराम की बेटी है। इन दिनों उसके परिजन सूरत में रह रहे हैं। इस पर पुलिस ने नंबर लेकर मोबाइल के जरिये युवती के परिजनों से संपर्क किया। परिजनों ने पुलिस को बताया कि लक्ष्मी 10 साल पहले लापता हो गई थी।
उधर, रविवार की सुबह युवती की मां और भाई उसे लेने सूरत से झांसी आए। पुलिस ने युवती को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इस पर परिजनों ने पुलिस का खूब आभार जताया। इस दौरान तीनों लोग गले मिलकर खूब रोए, मां राधा के तो आंसू ही नहीं रुके। वह बार-बार पुलिस को धन्यवाद देती रहीं।
लापता होने के बाद लक्ष्मी कहां रही, बता नहीं पा रही...
पुलिस के अनुसार लापता होने के बाद लक्ष्मी कहां रही और कैसे लापता हुई, अभी वह ठीक से बता नहीं पा रही है। बताया जा रहा है कि उसकी मानसिक स्थिति सही नहीं है। उधर, परिवार के अनुसार वह लोग बेटी का इलाज करवाएंगे। परिवार से मिली लक्ष्मी खुशी-खुशी अपने घर चली गई। मां ने कहा कि अब 10 साल बाद बेटी के साथ दिवाली मनाएंगे।