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फाइलों में साफ हो रहा लक्ष्मी ताल का गंदा पानी

Thu, 05 Nov 2015 01:22 AM IST
झांसी न्यूज
झांसी न्यूज Updated Thu, 05 Nov 2015 01:22 AM IST
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Lakshmi rhythm files are clearing dirty water
झांसी। पर्यटन विकास व पुरातात्विक धरोहर के संरक्षण के लिए बनाई गई लक्ष्मी ताल के सौंदर्यीकरण की योजना फाइलों में ही झूल रही है। वित्तीय स्वीकृति के एक साल बाद भी योजना के क्रियान्वयन के लिए एक पाई भी हाथ में नहीं आई है। आदेश पर आदेश हो रहे हैं, परंतु धरातल पर काम शून्य है।
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लक्ष्मी ताल के सौंदर्यीकरण की बहुउद्देश्यीय योजना है। इसके तहत पानी को साफ किया जाएगा तथा ताल का सौंदर्यीकरण होगा। साथ ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की भी स्थापना होगी। इस कार्य के लिए उत्तर प्रदेश जल निगम की निर्माण शाखा द्वारा 71.56 करोड़ रुपये का प्राक्लन भारत सरकार को भेजा था। इसके सापेक्ष भारत सरकार ने सात नवंबर 2014 को 54.13 करोड़ रुपये की प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति प्रदान की थी। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा प्रथम किस्त के रूप में 10.52 करोड़ रुपये जारी किए जाने के आदेश दिए थे। बाद में इसे बदलकर 2.30 करोड़ रुपये का आदेश किया गया था। लेकिन, धनराशि अब तक अवमुक्त नहीं हो पाई है, जिससे विकास की यह योजना धरातल पर क्रियान्वित नहीं हो पा रही है।
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‘लक्ष्मीताल के सौंदर्यीकरण की योजना तैयार है। इसे केंद्र सरकार की मंजूरी भी मिल चुकी है। लेकिन, बजट के अभाव में इसका क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।’
- ए पी यादव, अधिशासी अभियंता - जल निगम

‘डेड वाटर’ है ताल का पानी
झांसी।  बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय के अनुसार ताल का पानी ‘डेड वाटर’ की श्रेणी में आ गया है। आरटीआई द्वारा मांगी गई सूचना में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ताल के पानी को मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है। बोर्ड द्वारा पिछले चार सालों में पानी का 38 बार परीक्षण किया गया। सभी रिपोर्टों में पानी अत्यधिक प्रदूषित पाया गया। परीक्षण में ताल के आसपास का भूगर्भ जल भी प्रदूषित पाया गया।
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सिकुड़ गया ताल का रकबा
झांसी। राजस्व विभाग के अभिलेखों में ताल का रकबा लगभग अस्सी एकड़ दर्ज है। लेकिन, मौके पर तकरीबन तेहत्तर एकड़ भूमि ही पाई गई है। राजस्व विभाग द्वारा कई बार जरीब डाले जाने के बाद भी अवशेष जमीन का पता नहीं चल पाया है।


ट्रीटमेंट प्लांट को जमीन भी नहीं मिली
झांसी। लक्ष्मीताल के सौंदर्यीकरण की योजना के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किया जाना है। यह लक्ष्मीताल के निकट स्थित राजकीय उद्यान नारायण बाग में बनाया जाना है। इसके लिए उद्यान विभाग से नारायण बाग की चार एकड़ भूमि मांगी गई है। इसके लिए दो साल पूर्व कार्यवाही शुरू हुई थी, लेकिन यह अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
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