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खतरा बन सकती है प्रवासी मजदूरों की तेजी से बढ़ रही आमद

Mon, 12 Apr 2021 01:41 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 12 Apr 2021 01:41 AM IST
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labours return home, dangorous for others
झांसी। गाड़ी में भरकर घर लौटते प्रवासी मजदूर। - फोटो : REPORTERS
झांसी। मप्र के शिवपुरी मार्ग बॉर्डर पर प्रवासी श्रमिकों की आमद लगातार बढ़ती जा रही है। ऑटो, टैंपो, ट्रकों व बसों से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके श्रमिक झांसी से गुजरते हुए अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन, ये मजदूर आने वाले दिनों में खतरा साबित हो सकते हैं। ये श्रमिक गुजरात और महाराष्ट्र के संक्रमित इलाकों से आ रहे हैं और बगैर कोरोना जांच के अपने गांवों में पहुंच रहे हैं।
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ऑटो, टैंपों, ट्रकों व बसों में सवार होकर घर - गृहस्थी के सामान के साथ सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके भूखे - प्यासे मजदूर अपने घर- गांव की ओर लौट रहे हैं। पहले महाराष्ट्र से ही श्रमिक लौट रहे थे, परंतु अब गुजरात से भी मजदूरों की वापसी होने लगी है। श्रमिकों का कहना है कि कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। कहीं लॉकडाउन लगा दिया गया है तो कहीं अन्य प्रतिबंध है। इससे काम मिलना पूरी तरह से बंद हो गया है। खाने तक की जुगाड़ नहीं हो पा रही है। ऐसे में किसी तरह किराए के पैसों का बंदोबस्त कर वापस अपने घर - गांव की ओर लौट रहे हैं। इसके अलावा कोई और विकल्प अब उनके पास नहीं है। श्रमिकों को लॉकडाउन की भी आशंका है। ऐसे में वे अपने घर वापस लौटना ही बेहतर समझ रहे हैं।
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विदित हो कि इनमें से ज्यादातर मजदूर महाराष्ट्र व गुजरात के उन इलाकों से जहां से संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। वापस लौटने पर इनकी किसी तरह की जांच नहीं हो रही है और वे आसानी से अपने गांवों में प्रवेश पा जा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में पंचायत चुनाव चल रहे हैं। ऐसे में भीड़भाड़ भी खूब जमा हो रही है। इन परिस्थितियों में ये प्रवासी बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।
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दोहरा रहा है इतिहास
झांसी। इतिहास एक बार फिर से अपने आप को दोहरा रहा है। जी हां, पिछले साल लॉकडाउन लागू होने पर हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर अचानक उमड़ पड़े थे। पहले ग्वालियर रोड से इनकी आमद हुई थी, उसके बाद शिवपुरी रोड से प्रवासियों का आगमन शुरू हुआ था। प्रशासन को प्रवासी मजदूरों के भोजन, पानी के बंदोबस्त व उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ गई थी। सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर ये मजदूर पैदल ही झांसी पहुंच गए थे। एक बार फिर से बॉर्डर पर पुराने हालात नजर आने लगे हैं। हालांकि, इस बार श्रमिक पैदल नहीं, बल्कि वाहनों से आ रहे हैं।
पुणे में एक नाके पर काम करते थे। वहां कोरोना के संक्रमण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। लॉकडाउन की आशंका है, जिसके चलते वापस लौटना ही बेहतर समझा। हाथ में पैसा भी नहीं है। गांव में कम से कम खाने का बंदोबस्त तो हो ही जाएगा। - सोनू दास, फर्रुखाबाद
सूरत में पार्सल डिलीवरी का काम करते थे। वहां लोगों को आशंका है कि एक बार फिर से लॉकडाउन लग जाएगा। पिछली साल लॉकडाउन में महीनों फंसे रहे थे। ऐसे में समय रहते वापस लौटना ही बेहतर समझा। वैसे भी अब सूरत में काम नहीं मिल रहा है। - मानसिंह, गोंडा
महाराष्ट्र के पुणे में एक बेकरी में काम करते थे। लेकिन, वहां प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में बेकरी बंद हो गई है, जिससे वे बेरोजगार हो गए। मालिक ने किराए के पैसे हाथ में देकर गांव वापस लौटने को कहा है। जब परिस्थितियां सामान्य हो जाएंगी, तब बुला लिया जाएगा। - गगन कुमार, संत कबीर नगर

पिछली साल कोरोना काल में गांव वापस आ गए थे। परिस्थितियां ठीक होने पर हाल ही में वापस मुंबई गए थे। वहां गैराज में मोटर मैकेनिक का काम कर रहे थे। लेकिन, एक बार फिर से वहां कोरोना बढ़ने लगा। लॉकडाउन की आशंका है। ऐसे में वापस लौटना ही बेहतर समझा। - सुदामा, गोरखपुर
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