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Jhansi News: बुंदेलखंड में एक्यूआई की निगरानी के लिए बीयू में बनेगी लैब
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- यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के तहत मिनी सुपर साइट बनेगा विवि
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की निगरानी के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में लैब स्थापित होगी। यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के तहत बीयू को मिनी सुपर साइट बनाने की मंजूरी मिल गई है। बीयू द्वारा एक्यूआई कम करने के लिए तकनीक विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।
प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों में क्षेत्रीय ज्ञान केंद्र बनाए जा रहे हैं। जबकि, झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में मिनी सुपर साइट बननी है, जिसे कानपुर के मुख्य केंद्र के साथ मिलकर काम करना होगा। बीयू कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में वायु गुणवत्ता सूचकांक की निगरानी के लिए प्रयोगशाला स्थापित होगी। बुंदेलखंड के सातों जिलों में एक्यूआई की निगरानी इस लैब के जरिए हो सकेगी। लैब के जरिए पता किया जाएगा कि कहां पर एक्यूआई का स्तर ठीक है और कहां खराब। दोनों के ही कारणों का भी पता लगाया जाएगा। जहां एक्यूआई बढ़ रहा है, वहां उसे कम करने के प्रयास किए जाएंगे। एक्यूआई स्तर कम करने को लेकर नई तकनीक विकसित करने की दिशा में भी शोध कार्य किया जाएगा। साथ ही उसे पेंटेंट कराने और धरातल पर उतारने की दिशा में भी कार्य होगा। लोगों को भी जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण और कार्यशाला आयोजित की जाएंगी। शासन स्तर से बजट जारी होते ही लैब की स्थापना का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की निगरानी के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में लैब स्थापित होगी। यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के तहत बीयू को मिनी सुपर साइट बनाने की मंजूरी मिल गई है। बीयू द्वारा एक्यूआई कम करने के लिए तकनीक विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।
प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों में क्षेत्रीय ज्ञान केंद्र बनाए जा रहे हैं। जबकि, झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में मिनी सुपर साइट बननी है, जिसे कानपुर के मुख्य केंद्र के साथ मिलकर काम करना होगा। बीयू कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में वायु गुणवत्ता सूचकांक की निगरानी के लिए प्रयोगशाला स्थापित होगी। बुंदेलखंड के सातों जिलों में एक्यूआई की निगरानी इस लैब के जरिए हो सकेगी। लैब के जरिए पता किया जाएगा कि कहां पर एक्यूआई का स्तर ठीक है और कहां खराब। दोनों के ही कारणों का भी पता लगाया जाएगा। जहां एक्यूआई बढ़ रहा है, वहां उसे कम करने के प्रयास किए जाएंगे। एक्यूआई स्तर कम करने को लेकर नई तकनीक विकसित करने की दिशा में भी शोध कार्य किया जाएगा। साथ ही उसे पेंटेंट कराने और धरातल पर उतारने की दिशा में भी कार्य होगा। लोगों को भी जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण और कार्यशाला आयोजित की जाएंगी। शासन स्तर से बजट जारी होते ही लैब की स्थापना का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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