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किसी ने मां-बाप खोए तो कहीं भाइयों की मौत से उजड़ा परिवार

Sat, 22 May 2021 01:40 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 22 May 2021 01:40 AM IST
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kishi ne ma or bap khoye to kahi bhaiyo ki mot se ujda aprivar
अनाथ हुए बच्चे शायना, सायरा व अरबाज। - फोटो : REPORTERS
किसी ने मां-बाप खोए तो कहीं भाइयों की मौत से उजड़ा परिवार
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झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण ने बेरहमी के साथ इंसानियत पर हमला बोला है। कई परिवारों को इस महामारी ने कभी न भूल पाने वाले जख्म दिए हैं। हंसते - खेलते परिवारों में मातम पसरा हुआ है। किसी के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है, तो किसी ने अपने पति को खो दिया है। एक ही परिवार के कई लोगों की अर्थियां कुछ ही दिनों के अंतराल में उठी हैं। हालात ये हैं कि मातम करते - करते अब लोगों की आंखों में पानी भी नहीं बचा है।
पहले पिता गया, अब मां ने छोड़ा साथ, तीन बच्चे अनाथ
झांसी। आवास विकास के पिरिया रोड पर रहने वाली शायना, सायरा व अरबाज को कोरोना ने बेसहारा कर दिया है। जी हां, तेरह साल पहले इन बच्चों के पिता ऑटो ड्राइवर हनीफ की मौत हो गई थी। बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी मां जुमरत के कंधों पर आ गई थी। छोटे-मोटे काम कर मां बच्चों का लालन-पालन कर रही थी और उन्हें पढ़ा भी रही थी। अचानक बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट गया। मां कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गई और 13 मई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अब तीनों बच्चे बेसहारा हो गए हैं। खाने के भी लाले पड़े हुए हैं।
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दो दिन में सिर से उठ गया माता-पिता का साया
झांसी। मानिक चौक खत्रयाना निवासी अमित अग्रवाल मेडिकल स्टोर संचालक हैं। इस काम में उनके पिता डा. हरीराम अग्रवाल भी पूरा सहयोग करते थे। हालांकि, पिछले कुछ माह से अमित पिता को कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे की वजह से मेडिकल स्टोर नहीं आने दे रहे थे। वे घर पर ही रहते थे। अचानक अप्रैल माह में अमित की मां उमा अग्रवाल (72) कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गईं और 30 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई। इस सदमे को उनके पिता डा. हरीराम अग्रवाल (76) बर्दाश्त नहीं कर सके और दो मई को उनकी भी मृत्यु हो गई। अमित कहते हैं कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं सोचा था। महज दो दिन में ही सिर से माता-पिता का साया उठ गया। इस जख्म को वो जिंदगी में कभी नहीं भूल पाएंगे।
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पंद्रह दिन में मां और दो सगे भाइयों की मौत
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर ने परिवारों को बुरी तरह से उजाड़ दिया है। संक्रमण की चपेट में आने से ललितपुर में एक ही परिवार के तीन लोगों की महज पंद्रह दिनों के भीतर मौत हो गई। 14 से 29 अप्रैल के बीच आईटीआई के पास निरवासी डा. राकेश दत्त उनके भाई सचेंद्र भरत दत्त तथा मां बिंदेश्वरी देवी का कोरोना से निधन हो गया। परिजनों ने में कोहराम मचा हुआ है। रो-रोकर आंखों के आंसू भी सूख गए हैं।
पिता-पुत्र की टूटी सांसें
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण की तीसरी लहर में तमाम दिल दहलाने वाली तस्वीरें सामने आईं। ललितपुर में कारोबारी अजमेरी राईन की कोरोना के संक्रमण की चपेट में आने से मौत हो गई। पिता भी चल बसे। दो लोगों की जान जाने से परिवार एकदम टूट गया है।

मां की मौत के बाद बेटा भी चल बसा
झांसी। ललितपुर के कारोबारी महेंद्र सतभैया की मां की कुछ दिन पहले मृत्यु हो गई थी। शुक्रवार को महेंद्र भी चल बसे। मां - बेटों की कुछ ही दिनों के अंतराल में घर से अर्थियां उठीं। परिवार पर मानों दुखों का पहाड़ टूट गया। परिजन सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं।
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