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कीमिया खजूर बने रोेजेदारों की पहली पसंद
Thu, 09 May 2019 01:43 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Thu, 09 May 2019 01:43 AM IST
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ramdan
- फोटो : demo
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झांसी। इबादत के महीने रमजान में रोजा इफ्तार करने के लिए खजूर का इस्तेमाल किया जाता है। वैसे तो बाजार में कई तरह की खजूर मौजूद हैं लेकिन कीमिया खजूर रोजेदारों की पहली पसंद बना है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस साल दामों में दस फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। बावजूद, मांग पर कोई भी असर नहीं हुआ है।
रमजान के महीने में खजूर से रोजा इफ्तार करना सुन्नत माना जाता है। रमजान में बाजारों में खजूर की दुकानें खूब सजी हुई हैं। शहर के मुख्य चौराहों के अलावा ठेलों पर भी नजर आ रही हैं। इसके अलावा मुस्लिम बहुल इलाकों में भी खजूर की बिक्री हो रही है। शहर के बाजारों में देसी के अलावा सऊदी अरब, जार्डन व ईरान से खजूर आ रहा है लेकिन सबसे अधिक सऊदी अरब से आने वाला खजूर को ही पसंद किया जा रहा है। इनमें मगरूम, सबाबी, कलमी, सगई, सुुकरी और बर्नी खजूर की किस्में बाजारों में मौजूद हैं। इसके अलावा जबील, हदीया फर्द, कुर्मा और जाहोदी किस्म के खजूर की बिक्री अधिक हो रही है लेकिन सबसे अधिक कीमिया खजूर रोजेदारों को पसंद आ रही है। इस बार बाजारों में सौ रुपये से पांच सौ रुपये प्रति किलो की दर से खजूर मिल रहा है। वही कीमिया खजूर की कीमत तीन सौ रुपये प्रति किलो है।
खजूर विक्रेता मोहम्मद रफीक ने बताया कि इस बार खजूर के दामों में पिछले साल के मुकाबले में दस फीसदी का इजाफा हुआ है। दामों बढ़ोत्तरी होने के बाद भी मांग बरकरार है। इस कारण खजूर की बिक्री भी पर्याप्त मात्रा में हो रही है।
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खजूर में पर्याप्त पोषक तत्व
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि खजूर में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को बढ़ाता है। इससे शरीर में तुरंत ऊर्जा मिलती है। कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में होता है, जो शरीर की ऊर्जा की कमी को पूरा करता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया में सहायक होता है। जबकि, प्रोटीन प्यास को कंट्रोल करता है।
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रमजान के महीने में खजूर से रोजा इफ्तार करना सुन्नत माना जाता है। रमजान में बाजारों में खजूर की दुकानें खूब सजी हुई हैं। शहर के मुख्य चौराहों के अलावा ठेलों पर भी नजर आ रही हैं। इसके अलावा मुस्लिम बहुल इलाकों में भी खजूर की बिक्री हो रही है। शहर के बाजारों में देसी के अलावा सऊदी अरब, जार्डन व ईरान से खजूर आ रहा है लेकिन सबसे अधिक सऊदी अरब से आने वाला खजूर को ही पसंद किया जा रहा है। इनमें मगरूम, सबाबी, कलमी, सगई, सुुकरी और बर्नी खजूर की किस्में बाजारों में मौजूद हैं। इसके अलावा जबील, हदीया फर्द, कुर्मा और जाहोदी किस्म के खजूर की बिक्री अधिक हो रही है लेकिन सबसे अधिक कीमिया खजूर रोजेदारों को पसंद आ रही है। इस बार बाजारों में सौ रुपये से पांच सौ रुपये प्रति किलो की दर से खजूर मिल रहा है। वही कीमिया खजूर की कीमत तीन सौ रुपये प्रति किलो है।
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खजूर विक्रेता मोहम्मद रफीक ने बताया कि इस बार खजूर के दामों में पिछले साल के मुकाबले में दस फीसदी का इजाफा हुआ है। दामों बढ़ोत्तरी होने के बाद भी मांग बरकरार है। इस कारण खजूर की बिक्री भी पर्याप्त मात्रा में हो रही है।
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खजूर में पर्याप्त पोषक तत्व
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि खजूर में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को बढ़ाता है। इससे शरीर में तुरंत ऊर्जा मिलती है। कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में होता है, जो शरीर की ऊर्जा की कमी को पूरा करता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया में सहायक होता है। जबकि, प्रोटीन प्यास को कंट्रोल करता है।