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35 सालों से आत्मरक्षा में आत्मनिर्भर बना रहे मेवालाल

Sat, 05 Sep 2020 12:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2020 12:45 AM IST
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karate training
कराटे प्रशिक्षक मेवालाल राजपूत। - फोटो : REPORTERS
झांसी। उम्र ने भले ही सीनियर सिटीजन का तमगा दे दिया हो, लेकिन जोश और शारीरिक क्षमता अब भी युवाओं को मात देने वाली है। जी हां, यहां बात हो रही है कराटे प्रशिक्षक मेवालाल राजपूत की, जो 62 साल की आयु में भी रोजाना आठ घंटे मैदान में अपना पसीना बनाते हैं। ये मेहनत वो खुद के शरीर को स्वस्थ रखने के लिए तो करते ही हैं, लेकिन उनका बड़ा उद्देश्य अपने विद्यार्थियों को कराटे में पारंगत करना होता है। गरियागांव निवासी मेवालाल राजपूत ने 1985 में कराटे का प्रशिक्षण देने शुरू किया था और ये सिलसिला निरंतर जारी है। पिछले पैंतीस सालों के दरम्यान वे एक लाख से अधिक बच्चों व नौजवानों को कराटे का प्रशिक्षण देकर आत्मरक्षा में आत्मनिर्भर बनाने का काम करते चले आ रहे हैं। इसमें खासी संख्या महिलाओं की है। उनसे सीखे हुए कई प्रतिभाग राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा की चमक बिखेर चुके हैं। मेवालाल कहते हैं कि कराटे एक ऐसी विधा है, जिसके जरिये कोई भी व्यक्ति बगैर किसी हथियार के अपनी आत्मरक्षा आसानी से कर सकता है। उनसे सीखे हुए विद्यार्थी आज इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लोगों को आत्मरक्षा में आत्मनिर्भर बना रहे हैं। इसमें उन्हें बेहद संतोष मिलता है।
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