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करामती कोट के जादू में खोए बच्चे
Fri, 04 Jan 2019 01:45 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Fri, 04 Jan 2019 01:45 AM IST
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bal film amar ujala
- फोटो : demo
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बृहस्पतिवार को अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चल चित्र समिति की ओर से बाल फिल्म महोत्सव के अंतर्गत लाल स्कूल में संचालित आवासीय एक्सीलेरेटिड लर्निंग कै ंप में बच्चों को करामाती कोट फिल्म दिखाई गई। फिल्मदेखने के बाद दिव्यांग व विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के अलावा शिक्षकों ने भी खुशी जताई और अमर उजाला के प्रयासों को सराहा।
नई बस्ती स्थित सर्व शिक्षा अभियान समेकित शिक्षा के अंतर्गत दृष्टि बाधित व श्रवण बाधित बच्चों के लिए संचालित कैंप में दिखाई गई 90 मिनट की फिल्म में बाल कलाकार रघु बेहद गरीब है और मेहनत मजदूरी कर अपनी बहन के परिवार को आर्थिक सहायता देता है। एक रात उसे नीली बालों वाली गुड़िया चमत्कारी कोट दे जाती है, जिसकी जेब से हमेशा पैसे निकलते हैं। इस कोट के चमत्कार से रघु की आर्थिक परेशानियां दूर हो जाती हैं और धीरे- धीरे वह अपने दोस्तों में रघु सेठ के नाम से जाना जाने लगता है। हालांकि उसके गांव में आए तीन चोर उसका कोट चुराना चाहते हैं, लेकिन वह सफल नहीं हो पाते हैं। बाल कल्पना और हास्य से भरी फिल्म के प्रदर्शन से खुश बच्चों व शिक्षिकों ने इसे सराहा। इस मौके पर केयर टेकर जितेंद्र त्रिपाठी, सुधा, पार्वती, हरगोविंद कुशवाहा, प्रेमा, घनश्याम भारती, देवेंद्र त्रिवेदी, गजनफर आदि मौजूद रहे।
बच्चों ने कहा, बहुत अच्छी थी फिल्म
कैंप में बच्चे कोई दृष्टिबाधित है, तो कोई श्रवण बाधित। लेकिन बाल फिल्म देखने और सुनने की उत्सुकता सभी में नजर आई। सुनने में अक्षम रागिनी और अंशिका ने बताया कि फिल्म उन्हें बढ़िया लगी। कलाकारों के अभिनय व उनके हाव भाव के माध्यम से फिल्म को समझा। इसी प्रकार से दृष्टिबाधित राजाराम और सूरज ने कहा कि वह भले ही ईश्वर की बनाई खूबसूरत दुनिया को नहीं देख पाते हो। लेकिन फिल्म में संगीत की धुनेें अच्छी लगीं और कलाकारों की आवाज से उन्हें फिल्म समझ में आ गई। कोट का चमत्कार अच्छा लगा।
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नई बस्ती स्थित सर्व शिक्षा अभियान समेकित शिक्षा के अंतर्गत दृष्टि बाधित व श्रवण बाधित बच्चों के लिए संचालित कैंप में दिखाई गई 90 मिनट की फिल्म में बाल कलाकार रघु बेहद गरीब है और मेहनत मजदूरी कर अपनी बहन के परिवार को आर्थिक सहायता देता है। एक रात उसे नीली बालों वाली गुड़िया चमत्कारी कोट दे जाती है, जिसकी जेब से हमेशा पैसे निकलते हैं। इस कोट के चमत्कार से रघु की आर्थिक परेशानियां दूर हो जाती हैं और धीरे- धीरे वह अपने दोस्तों में रघु सेठ के नाम से जाना जाने लगता है। हालांकि उसके गांव में आए तीन चोर उसका कोट चुराना चाहते हैं, लेकिन वह सफल नहीं हो पाते हैं। बाल कल्पना और हास्य से भरी फिल्म के प्रदर्शन से खुश बच्चों व शिक्षिकों ने इसे सराहा। इस मौके पर केयर टेकर जितेंद्र त्रिपाठी, सुधा, पार्वती, हरगोविंद कुशवाहा, प्रेमा, घनश्याम भारती, देवेंद्र त्रिवेदी, गजनफर आदि मौजूद रहे।
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बच्चों ने कहा, बहुत अच्छी थी फिल्म
कैंप में बच्चे कोई दृष्टिबाधित है, तो कोई श्रवण बाधित। लेकिन बाल फिल्म देखने और सुनने की उत्सुकता सभी में नजर आई। सुनने में अक्षम रागिनी और अंशिका ने बताया कि फिल्म उन्हें बढ़िया लगी। कलाकारों के अभिनय व उनके हाव भाव के माध्यम से फिल्म को समझा। इसी प्रकार से दृष्टिबाधित राजाराम और सूरज ने कहा कि वह भले ही ईश्वर की बनाई खूबसूरत दुनिया को नहीं देख पाते हो। लेकिन फिल्म में संगीत की धुनेें अच्छी लगीं और कलाकारों की आवाज से उन्हें फिल्म समझ में आ गई। कोट का चमत्कार अच्छा लगा।
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