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कन्हैया झूलेंगे झूला और भोले की होगी आराधना

Sat, 24 Jul 2021 01:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jul 2021 01:27 AM IST
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Kanhaiya will swing in a swing and Bhole will be worshipped
झांसी। भगवान शिव का पावन प्रिय महीना सावन रविवार से शुरू होगा। इसमें भोले की आराधना होगी वहीं, भगवान कृष्ण को झूले में झुलाया जाएगा। इसके लिए महानगर में सावन का बाजार सज चुका है। दुकानों पर कन्हैया के आकर्षक झूले हैं तो भोलेनाथ की पूजा के लिए रुद्राक्ष मालाएं, महामृत्युंजय यंत्र और त्रिशूल आदि है।
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बाजार में शिव पूजा में चढ़ाने के लिए त्रिशूल, डमरू, कलश, बेलपत्र और आर्टिफिशियल सर्प आदि की बाजारों में बिक्री हो रही है। सर्वाधिक मांग चांदी से बने सर्प की है। मानिक चौक स्थित पूजन सामग्री के विक्रेता ओम प्रकाश राय के अनुसार सावन में पूजा की थाली आकर्षण है। इसमें शिवलिंग, चंदन, सुपारी, कपूर, रुद्राक्ष की मालाएं, महामृत्युंजय यंत्र आदि सामग्री एक साथ मिलेगी। इसके अलावा सावन में कई श्रद्धालु भगवान कन्हैया को घर में झूले पर विराजमान करते हैं। कन्हैया के झूले भी मीनाकारी में उपलब्ध है। झूले चांदी अन्य धातुओं से बने हैं।
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ये हैं पूजन सामग्री के भाव
त्रिशूल 50 से 250 रुपए तक, शिवलिंग 40 से 300 रुपये तक, रुद्राक्ष माला 50 से 500 रुपये तक, काह्ना का झूला 20 से 500 रुपये तक, नंदी 40 से शंख 150 से 500 रुपये तक, पूजा- कथा आरती की किताब 10 से 150 रुपये तक, आर्टिफिशिल व चांदी से बने सर्प 20 से 500 तक तथा पूजा की थाली 100 से लेकर 1000 रुपए तक में महानगर के बाजारों में उपलब्ध है।
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कांवड़ का बाजार सूना
कोरोना के कारण इस साल भी कांवड़ का बाजार नहीं सजा है। बड़ा बाजार, मालिनों का तिराहा, मानिक चौक सहित कई प्रमुख बाजारों में बोल बम प्रिंटेड कुर्ता, टीशर्ट और गमछा के अलावा नारंगी साड़ियां आदि खूब बिकती थी। लेकिन इस साल कांवड़ यात्रा पर रोक होने के कारण यह कपड़े कुछ दुकानों पर ही बिकते नजर आ रहे है।

गुरु पूर्णिमा का पर्व मनेगा आज
गुरु पूर्णिमा का पर्व शनिवार को श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया जाएगा। मंदिरों और आश्रमों में पर्व को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो गई है। कोरोना के कारण बाहर के श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, कई गुरुजनों ने भक्तों से अपील की है कि वह मास्क पहनकर आए। गुरु पूर्णिमा पर्व को आषाढ़ की पूर्णिमा एवं व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
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