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कलरव नहीं अब रिमझिम से बरसेगा ज्ञान
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झांसी। जिले के परिषदीय प्राथमिक विद्यालय की कक्षा एक में अब कलरव किताब नहीं पढ़ाई जाएगी। बच्चों को नए शिक्षा सत्र से एनसीईआरटी की किताबों के जरिए अध्ययन कराया जाएगा। इसमें लिखने से अधिक तार्किक ज्ञान पर जोर दिया जाएगा। नए सत्र में लागू हो रहे नए पाठ्यक्रम को लेकर विभाग के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक में अब क्रिया आधारित शिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। अब तक बच्चों को कक्षा एक में कलरव किताब के जरिए पढ़ाया जाता था। जिसमें लिखने का काम अधिक हुआ करता था। अब नए सत्र से एनसीईआरटी की तीन नई किताबें होंगीं। जिसमें हिंदी की रिमझिम, गणित के लिए गणित का जादू और अंग्रेजी के लिए मैरीगोल्ड किताब होगी। इन तीनों किताबों में चित्रों पर अधिक जोर दिया गया है। इसके आधार पर बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
वहीं अंग्रेजी में कैपिटल लेटर की जगह अब स्मॉल लेटर की बच्चों को पहचान कराई जाएगी। शिक्षकों का मानना है कि स्माल लेटर का ज्ञान कराने के पीछे मंशा है कि आमतौर पर स्मॉल लेटर अधिक लिखे जाते हैं। ऐसे में इनका ज्ञान जरूरी है। वहीं नए शिक्षा सत्र से बच्चों को होमवर्क भी नहीं मिलेगा। करीब 75 दिन तक बच्चों को चित्रों और क्रियात्मक ज्ञान के आधार पर सिखाया जाएगा। बीएसए हरिवंश कुमार का कहना है कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को लेकर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। छोटे बच्चों को क्रियात्मक ज्ञान के जरिए सीखने की प्रेरणा दी जाएगी।
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परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक में अब क्रिया आधारित शिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। अब तक बच्चों को कक्षा एक में कलरव किताब के जरिए पढ़ाया जाता था। जिसमें लिखने का काम अधिक हुआ करता था। अब नए सत्र से एनसीईआरटी की तीन नई किताबें होंगीं। जिसमें हिंदी की रिमझिम, गणित के लिए गणित का जादू और अंग्रेजी के लिए मैरीगोल्ड किताब होगी। इन तीनों किताबों में चित्रों पर अधिक जोर दिया गया है। इसके आधार पर बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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वहीं अंग्रेजी में कैपिटल लेटर की जगह अब स्मॉल लेटर की बच्चों को पहचान कराई जाएगी। शिक्षकों का मानना है कि स्माल लेटर का ज्ञान कराने के पीछे मंशा है कि आमतौर पर स्मॉल लेटर अधिक लिखे जाते हैं। ऐसे में इनका ज्ञान जरूरी है। वहीं नए शिक्षा सत्र से बच्चों को होमवर्क भी नहीं मिलेगा। करीब 75 दिन तक बच्चों को चित्रों और क्रियात्मक ज्ञान के आधार पर सिखाया जाएगा। बीएसए हरिवंश कुमार का कहना है कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को लेकर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। छोटे बच्चों को क्रियात्मक ज्ञान के जरिए सीखने की प्रेरणा दी जाएगी।
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